चंडीगढ़, 16/10/2026
चंडीगढ़ स्थित पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER) में पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजी (बाल चिकित्सा तंत्रिका विज्ञान) के DM ट्रेनी, डॉ. पार्थ लाल ने प्रतिष्ठित ‘2025 पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजी ट्रेनी अवार्ड’ प्राप्त करने वाले पहले भारतीय बनकर संस्थान और भारतीय पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है। यह पुरस्कार पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजी के किसी ट्रेनी द्वारा लिखे गए उत्कृष्ट और मौलिक शोध लेख के लिए दिया जाता है। चयन प्रक्रिया में शोध के वैज्ञानिक महत्व, कार्यप्रणाली की सटीकता, गुणवत्ता और उसमें मौजूद नवीनता को ध्यान में रखा जाता है।
डॉ. पार्थ को यह सम्मान ‘पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजी’ (Pediatric Neurology) जर्नल में प्रकाशित उनके शोध “NitRIS ट्रायल” के लिए मिला है। इस शोध ने ‘इन्फेंटाइल एपिलेप्टिक स्पाज्म सिंड्रोम’ (IESS) से पीड़ित बच्चों में ‘नाइट्राजेपाम’ (nitrazepam) की संभावित प्रभावशीलता के लिए ‘प्रूफ-ऑफ-कांसेप्ट’ साक्ष्य प्रदान किए हैं। IESS शिशुओं में होने वाली मिर्गी का एक जटिल रूप है, जिसका इलाज करना काफी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। उनका काम इस स्थिति के लिए एक संभावित चिकित्सीय विकल्प की पड़ताल करता है, जिसमें समय पर और प्रभावी इलाज बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस शोध के वैज्ञानिक महत्व को जर्नल के संपादकीय बोर्ड के सदस्यों द्वारा लिखे गए एक संपादकीय में भी रेखांकित किया गया है।
यह पुरस्कार आज कनाडा के क्यूबेक प्रांत के मॉन्ट्रियल में आयोजित ‘चाइल्ड न्यूरोलॉजी सोसाइटी’ की बैठक में प्रदान किया गया, जिससे अंतरराष्ट्रीय मंच पर डॉ. पार्थ के वैज्ञानिक योगदान को मान्यता मिली। अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हुए, उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय पीडियाट्रिक्स विभाग के शोध-अनुकूल माहौल, मार्गदर्शन और सहयोग को दिया।
इससे पहले, दिसंबर 2025 में, डॉ. पार्थ लाल को अमेरिकन एपिलेप्सी सोसाइटी (AES) की ओर से ‘सुज़ैन एंड पीटर बेरी इंटरनेशनल ट्रैवल अवार्ड’ मिला था। दुनिया भर से आए 1,500 से अधिक शोध प्रस्तावों में से चुने गए डॉ. पार्थ उन केवल दो युवा शोधकर्ताओं में से एक थे, जिन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान मिला। यह उनके शोध के वैश्विक महत्व को दर्शाता है।
ये उपलब्धियां इस बात को रेखांकित करती हैं कि युवा चिकित्सक-वैज्ञानिक (clinician-scientists) किस प्रकार गहन, अभिनव और चिकित्सकीय रूप से प्रासंगिक शोध के माध्यम से महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। यह, जटिल न्यूरोलॉजिकल विकारों से प्रभावित बच्चों के लिए वैज्ञानिक समझ और उपचार के विकल्पों को आगे बढ़ाने, तथा उभरते शोधकर्ताओं को तैयार करने के प्रति PGIMER की निरंतर प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करता है।
