अमृतसर, 16/10/2026
श्री अकाल तख्त साहिब की फसील से 16 अक्टूबर को कौम के नाम जारी संदेश के दौरान एक कड़ा फैसला लिया गया है। लुधियाना की पायल विधानसभा सीट से आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक मनविंदर सिंह ग्यासपुरा को श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा ‘तन्खाहिया’ (धार्मिक सजा का पात्र) करार दिया गया है। साथ ही, सिख संगत को सख्त आदेश दिए गए हैं कि वे उनके साथ किसी भी तरह का जुड़ाव न रखें।
क्या है पूरा मामला?
श्री अकाल तख्त साहिब के सचिवालय में पांच सिंह साहिबान की हुई उच्च स्तरीय बैठक के दौरान विधायक मनविंदर सिंह ग्यासपुरा के मामले पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। सिंह साहिबान ने बताया कि विधायक ग्यासपुरा पर सिख मर्यादा, श्री अकाल तख्त साहिब और श्री दरबार साहिब के सेवादारों के खिलाफ जातिगत भेदभाव के कथित झूठे आरोप लगाने और अपमानजनक शब्दावली का इस्तेमाल करने के गंभीर आरोप सिद्ध पाए गए हैं। इसी के चलते उन्हें धार्मिक नियमों के उल्लंघन के मामले में ‘तन्खाहिया’ घोषित किया गया है।
जीवन सिंह बगीचीवाले के प्रचार पर पूर्ण प्रतिबंध
श्री अकाल तख्त साहिब से स्वयंभू प्रचारक बताए जाने वाले जीवन सिंह बगीचीवाले के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की गई है। उन पर लंबे समय से सिख इतिहास और सिख रहित मर्यादा के खिलाफ विवादित टिप्पणियां करने तथा श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की सर्वोच्चता को चुनौती देने के आरोप लगते रहे हैं। सिंह साहिबान ने स्पष्ट किया कि उन्हें गुरबानी और सिख सिद्धांतों की सही समझ नहीं है, इसलिए उनके प्रचार करने और कीर्तन करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।
नशे के खिलाफ संघर्ष और शहीद भाई परविंदर सिंह को श्रद्धांजलि
संबोधन के दौरान पंजाब में तेजी से बढ़ रहे नशे के प्रकोप पर गहरी चिंता जताई गई। उन्होंने समस्त सिख संगत और पंजाब वासियों से अपील की कि वे शहीद परविंदर सिंह के परिवार की हरसंभव मदद करें और नशे के खिलाफ इस जंग को एकजुट होकर आगे बढ़ाएं।
सोशल मीडिया पर भ्रामक प्रचार करने वालों को कड़ी चेतावनी
श्री अकाल तख्त साहिब की फसील से पॉडकास्ट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए बिना गहरे अध्ययन के गुरबानी और सिख इतिहास की मनमर्जी से व्याख्या करने वालों को भी कड़ी चेतावनी दी गई है। जथेडार साहिब ने स्पष्ट किया कि सिख रहित मर्यादा और पंथक परंपराओं के दायरे में रहकर ही अपने विचार रखे जाने चाहिए। अंत में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के चरणों में अरदास कर पंथ की चढ़ती कला और आपसी भाईचारे की कामना की गई।
