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बठिंडा, 29 जून 2026
वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व शिक्षा मंत्री विजय इंदर सिंगला ने आज बथिंडा और मानसा में आयोजित बैक-टू-बैक प्रेस वार्ताओं के दौरान राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली के पूरी तरह ध्वस्त होने पर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। प्रदीप मेघवाल, ऋतिक मिश्रा, सिद्धार्थ हेगड़े और भाग्यश्री जैसे कई अन्य छात्रों का नाम लेते हुए सिंगला ने कहा कि देश के इन होनहार और उज्ज्वल युवाओं को इस विफल शिक्षा प्रणाली ने पूरी तरह धोखा दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) अपने मूल दायित्व को निभाने में पूरी तरह विफल रही है, जिसके कारण नीट-यूजी (NEET-UG) और यूजीसी-नेट (UGC-NET) जैसी कई राष्ट्रीय परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं, पेपर लीक और परीक्षाएं रद्द होने के मामले सामने आए हैं। एक पूर्व शिक्षा मंत्री के रूप में सिंगला ने इस बात पर जोर दिया कि परीक्षाओं की शुचिता बनाए रखने के लिए सख्त और समझौताहीन नियमों की आवश्यकता होती है, लेकिन बार-बार हो रहे पेपर लीक मौजूदा केंद्रीय मंत्रालय के तहत बुनियादी सुरक्षा, सत्यापन और प्रशासनिक नियंत्रण की पूर्ण विफलता को साबित करते हैं।
सिंगला ने रेखांकित किया कि यह पूरी व्यवस्था शिक्षा के मंदिर से बदलकर एक “वसूली मशीन” बन गई है, और जब दोनों क्षेत्रों के युवा गंभीर मानसिक तनाव, अवसाद और पूर्ण निराशा का सामना कर रहे हैं, तब मंत्रालय मूकदर्शक बना हुआ है। लाखों मध्यमवर्गीय परिवारों का आर्थिक शोषण किया जा रहा है, जिसमें केवल नीट (NEET) परीक्षा के लिए ही 22 लाख से अधिक परिवार मिलकर हर साल लगभग 1.32 लाख करोड़ रुपये खर्च कर रहे हैं। यह भारी-भरकम राशि—जो भारत के पूरे वार्षिक केंद्रीय शिक्षा बजट के बराबर है—लोगों की जीवन भर की जमा पूंजी और भारी कर्ज से जुटाई जाती है, केवल इसलिए ताकि एक संगठित और उच्च स्तरीय सांठगांठ से चलने वाला पेपर-लीक माफिया योग्यता प्रणाली में हेरफेर कर सके। उन्होंने खुलासा किया कि यह व्यवस्था परिवारों को फंसाने के लिए गारंटीड रोजगार का एक बड़ा झूठ बेचती है, जबकि वास्तविकता यह है कि इस व्यवस्था में पिसने वाले हर 1,000 छात्रों में से मुश्किल से 12 ही स्थायी और वेतनभोगी नौकरियां पा पाते हैं, और यहां तक कि आईआईटी (IIT) के 80% स्नातकों को भी रोजगार के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
दिखावटी बदलावों और राजनीतिक लीपापोती को खारिज करते हुए सिंगला ने स्पष्ट कहा कि एनटीए (NTA) प्रमुख को बदलना या सामान्य सीबीआई (CBI) जांच की मांग करना केवल वरिष्ठ अधिकारियों और बड़े दोषियों को बचाने के लिए समय काटने के हथकंडे हैं। कांग्रेस पार्टी की ओर से उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे की मांग की। सिंगला ने पार्टी की प्रमुख मांगों को रेखांकित किया, जिसमें एनटीए (NTA) के पूरे डिजिटल ढांचे, वित्तीय लेन-देन और वेंडरों के चयन की प्रक्रिया की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में समयबद्ध और स्वतंत्र जांच शामिल है। इसके अलावा, कांग्रेस मांग करती है कि किसी एक जगह पर गड़बड़ी से पूरी व्यवस्था को ठप होने से बचाने के लिए केंद्रीकृत प्रतियोगी परीक्षाओं का पूरी तरह से विकेंद्रीकरण किया जाए, सख्त राष्ट्रीय एंटी-पेपर लीक कानून बनाकर विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतें स्थापित की जाएं, और एक निश्चित व पूर्व-घोषित वार्षिक शैक्षणिक व भर्ती कैलेंडर जारी किया जाए ताकि किसी अन्य छात्र को हताशा में कोई कदम न उठाना पड़े।
इस संस्थागत अन्याय के खिलाफ लड़ने के लिए सिंगला ने चरणबद्ध तरीके से एक व्यापक राष्ट्रव्यापी आंदोलन के कार्यक्रम की घोषणा की और जोर दिया कि मालवा क्षेत्र के युवा इस संघर्ष में सबसे आगे होंगे। 30 जून से शुरू होकर, कांग्रेस कार्यकर्ता और एनएसयूआई (NSUI) व युवा कांग्रेस (IYC) सहित पार्टी की युवा शाखाएं एक व्यापक जनसंपर्क अभियान शुरू करेंगी, जिसके तहत वे छात्रों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए घर-घर जाएंगे और लाइब्रेरी हब, हॉस्टलों व पेइंग-गेस्ट (PG) आवासों का दौरा करेंगे। इसके बाद, 1 अगस्त को पार्टी पंजाब के मुख्य केंद्रों सहित देश भर के 28 प्रमुख शैक्षणिक केंद्रों में जिला कलेक्टर कार्यालयों के बाहर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन और घेराव करेगी। इस आंदोलन का पहला चरण 9 अगस्त को एक विशाल “दिल्ली चलो” संसद मार्च के साथ समाप्त होगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सरकार सदन के पटल पर विपक्ष का सामना करने से भाग न सके।
सिंगला ने देश भर के छात्र समुदाय से एक भावुक अपील की कि वे चुप न रहें और इस भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ एकजुट होकर इस आंदोलन में शामिल हों जब तक कि पूर्ण न्याय नहीं मिल जाता। उन्होंने छात्रों और अभिभावकों दोनों को आश्वस्त किया कि वे उम्मीद न खोएं, क्योंकि कांग्रेस पार्टी हर कदम पर उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि श्री राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी का हर एक सदस्य तब तक शांत नहीं बैठेगा जब तक कि युवाओं की आवाज नहीं सुनी जाती और उनका भविष्य सुरक्षित नहीं हो जाता।

