Punjab Pollution control Board
चंडीगढ़, 14 अगस्त 2026
पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) ने काले धुएं के उत्सर्जन पर प्रभावी रोक लगाने तथा पंजाब के जल स्रोतों की सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए पूरे राज्य में स्रोत-आधारित पर्यावरणीय हस्तक्षेप तेज कर दिए हैं। इस पहल का उद्देश्य दिखाई देने वाले धुएं को कम करना, जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाना और उद्योगों में स्वच्छ कार्यप्रणालियों को बढ़ावा देना है। इसके लिए बोर्ड द्वारा लक्षित नियामक कार्रवाई, वैज्ञानिक निगरानी, तकनीकी मार्गदर्शन और क्षमता निर्माण को और मजबूत किया जा रहा है।
बोर्ड के क्षेत्रीय एवं जोनल कार्यालयों की हाल ही में हुई समीक्षा के बाद पीपीसीबी की चेयरपर्सन रीना गुप्ता ने काले धुएं वाले संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करने और नदियों के पानी को प्रदूषित होने से बचाने के लिए तकनीक आधारित तथा केंद्रित कार्रवाई को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं।
उद्योगों में नियमों का अनुपालन अधिक प्रभावी बनाने के लिए ईंट-भट्ठों, राइस शेलरों, भट्टियों (फर्नेस), खतरनाक अपशिष्ट उत्पन्न करने वाली इकाइयों तथा अन्य चिन्हित क्षेत्रों के लिए क्षेत्र-विशिष्ट मानक संचालन प्रक्रियाएं (एसओपी) तैयार की जाएंगी। क्षेत्रीय कार्यालय स्थानीय भाषाओं में औद्योगिक इकाइयों के लिए एसओपी तथा प्रदूषण कम करने संबंधी सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को लेकर प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित करेंगे।
विशेष रूप से ईंट-भट्ठों में अनुमोदित ईंधन के इस्तेमाल तथा स्वच्छ संचालन प्रणाली सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है। पंजाब स्टेट काउंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी के सहयोग से ईंट-भट्ठा मालिकों एवं कर्मचारियों को जिग-जैग तकनीक, अनुमोदित ईंधन, रखरखाव, काले धुएं की रोकथाम तथा इसके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों संबंधी तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके अलावा, मौके पर होने वाली जांच के दौरान अनुमोदित ईंधन के इस्तेमाल की पुष्टि के लिए पराली/धान की भूसी से बने पेलेट्स के खरीद आदेशों को दस्तावेजी प्रमाण के तौर पर भी जांचा जाएगा।
स्वच्छ औद्योगिक कार्यप्रणालियों को बढ़ावा देने के लिए बोर्ड प्रिंसटन यूनिवर्सिटी के तकनीकी सहयोग से एक मॉडल एवं सर्वोत्तम कार्यप्रणाली विकसित करेगा। इसके अलावा सेंटर फॉर स्टडी ऑफ साइंस, टेक्नोलॉजी एंड पॉलिसी (सीएसटीईपी) के सहयोग से जागरूकता सामग्री, वीडियो तथा नियमों के अनुपालन संबंधी मार्गदर्शन दस्तावेज भी तैयार किए जाएंगे।
प्रशिक्षण एवं तकनीकी सहायता का विस्तार राइस शेलरों, स्टोन क्रशरों, इलेक्ट्रोप्लेटिंग इकाइयों तथा अन्य औद्योगिक क्षेत्रों तक भी किया जाएगा। इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा अनुमोदित एसओपी, रसायनों का सुरक्षित उपयोग, ईटीपी (इफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) का संचालन, खतरनाक अपशिष्ट प्रबंधन, कर्मचारियों की सुरक्षा तथा अन्य प्रदूषण नियंत्रण उपायों की जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा, लक्षित जांचों के माध्यम से दिखाई देने वाले धुएं के बार-बार सामने आने वाले कारणों, जैसे संचालन प्रणाली, फीडिंग सिस्टम, रिक्यूपरेटर, एयर सील और कोयला पल्वराइजर आदि की भी जांच की जाएगी।
पंजाब के जल स्रोतों की सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए चेयरपर्सन ने सभी क्षेत्रीय कार्यालयों को नदियों और उनकी सहायक नदियों के किनारे स्थित उद्योगों के सभी संभावित निकास बिंदुओं पर नाइट विजन एवं मोशन सेंसर युक्त सीसीटीवी कैमरे लगाने की प्रक्रिया सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों तथा जल प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों की पहचान निगरानी डेटा, पिछले अध्ययनों और प्राप्त शिकायतों के आधार पर की जाएगी।
जिन क्षेत्रों में ड्रेनों के प्रदूषित होने का खतरा पाया गया है, वहां प्रदूषण के स्रोतों की पहचान, निरंतर निगरानी और समयबद्ध कार्रवाई के लिए तकनीक आधारित प्रणालियां विकसित की जाएंगी। जहां तकनीकी रूप से संभव और आवश्यक होगा, वहां ड्रोन आधारित सर्वेक्षण भी किए जाएंगे। इसके अलावा बोर्ड संबंधित विभागों एवं अन्य हितधारकों के साथ मिलकर रोकथाम तथा सुधारात्मक कदम उठाएगा।
चेयरपर्सन ने यह भी निर्देश दिए हैं कि जांच के दौरान पर्यावरणीय मंजूरी की शर्तों, वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग), प्रदूषण नियंत्रण प्रणालियों तथा अन्य सभी लागू कानूनी एवं नियामकीय प्रावधानों की पूरी तरह समीक्षा की जाए।
इस अवसर पर रीना गुप्ता ने कहा, “हमारा उद्देश्य पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करना, प्रदूषण के तकनीकी कारणों को समझना और उनके व्यावहारिक समाधान लागू करना है। काला धुआं केवल दिखाई देने वाला प्रदूषण नहीं है, बल्कि यह इस बात का संकेत है कि स्वच्छ संचालन प्रणालियों और प्रभावी प्रदूषण नियंत्रण उपायों को अपनाने की आवश्यकता है। इसी तरह प्रत्येक ड्रेन, जलमार्ग और जलग्रहण क्षेत्र एक मूल्यवान पर्यावरणीय संपत्ति है, जिसे अनधिकृत प्रदूषण से बचाना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।”
उन्होंने आगे कहा, “डिजिटल निगरानी, वैज्ञानिक निर्णय प्रक्रिया और हितधारकों की निरंतर भागीदारी को अपनाकर हम एक पारदर्शी, जवाबदेह और पंजाब के सतत विकास के विजन के अनुरूप नियामक ढांचा तैयार कर रहे हैं। आइए, पंजाब को काले धुएं से मुक्त और सबसे स्वच्छ जल स्रोतों वाला राज्य बनाने का संकल्प लें।”
पीपीसीबी लक्षित नियामक कार्रवाई, तकनीकी मार्गदर्शन, वैज्ञानिक निगरानी और क्षमता निर्माण को एक साथ लेकर स्वच्छ औद्योगिक कार्यप्रणालियों को बढ़ावा देने तथा पंजाब के पर्यावरणीय संसाधनों की सुरक्षा के लिए अपने प्रयास लगातार जारी रखेगा।
