न्यूज डेस्क, 18/05/2026
पीएम मोदी की अपील के बाद खेती की लागत को कम करने, भूमि की सेहत सुधारने और आम लोगों तक जहर-मुक्त खाद्यान्न पहुंचाने के लिए प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाया है. कुरुक्षेत्र के उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा ने कहा कि जिले में प्राकृतिक और जैविक खेती को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने के लिए किसानों को अगले पांच वर्षों तक 10,000 रुपये प्रति एकड़ प्रति वर्ष की अनुदान राशि दी जाएगी. सरकार की इस पहल का उद्देश्य ना केवल किसानों की आमदनी को बढ़ाना है, बल्कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग पर लगाम लगाना भी है.
बदलते दौर में बढ़ी जैविक उत्पादों की मांग
उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा ने कहा कि आज के दौर में उपभोक्ता अपने स्वास्थ्य को लेकर बेहद जागरूक हो चुके हैं. यही कारण है कि बाजार में बिना रसायनों के तैयार होने वाले जैविक और प्राकृतिक उत्पादों की मांग दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है. ऐसे में किसानों के पास पारंपरिक खेती से हटकर इस ओर कदम बढ़ाने और अपनी आय को दोगुना करने का यह बेहतरीन मौका है
अनुदान के लिए एपीडा प्रमाणन अनिवार्य
उन्होंने कहा इस सरकारी योजना का लाभ उठाने के लिए प्रशासन ने गुणवत्ता और विश्वसनीयता से जुड़ी एक महत्वपूर्ण शर्त रखी है. योजना के तहत वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए किसानों को अपनी उपज का सर्टिफिकेशन पहले से ही ‘एपीडा’ (Agricultural and Processed Food Products Export Development Authority) से करवाना अनिवार्य होगा. इस प्रमाणन से किसानों के उत्पादों की शुद्धता और गुणवत्ता पर मोहर लगेगी, जिससे उन्हें न केवल स्थानीय बल्कि वैश्विक स्तर के बाजारों में भी अपनी फसलों के बेहद शानदार दाम मिल सकेंगे.
पर्यावरण के लिए भी वरदान
डीसी विश्राम कुमार मीणा ने इस योजना के बहुआयामी फायदों को बताते हुए कहा कि ये पहल सिर्फ किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत करने तक सीमित नहीं है. इसके जरिए रासायनिक खादों के दुष्प्रभाव से घट रही मिट्टी की उर्वरता और गुणवत्ता को फिर से सुधारा जा सकेगा. खेती के पारंपरिक तौर-तरीकों को अपनाकर पर्यावरण का संरक्षण होगा. आम जनता को बीमारियों से बचाने के लिए स्वस्थ और पौष्टिक खाद्य पदार्थ उपलब्ध हो सकेंगे. प्रशासन ने जिले के प्रगतिशील और आम किसानों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में प्राकृतिक खेती से जुड़कर इस कल्याणकारी योजना का लाभ उठाएं.
पीएम मोदी ने की थी अपील
आपको बता दें कि पीएम मोदी ने वैश्विक हालातों को देखते हुए किसान भाईयों से रसायनिक खादों के इस्तेमाल के बजाय प्राकृतिक और जैविक खेती अपनाने की अपील की थी ताकि देश की विदेशी मुद्रा को बचाया जा सके.
