वाशिंगटन, 02/10/2026
अमेरिका के मिलवौकी में आयोजित जी-20 (G-20) व्यापार मंत्रियों की बैठक के अंतिम दिन भारत ने वैश्विक व्यापार नियमों को लेकर बेहद सख्त और मजबूत रुख अपनाया है। भारत के केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने वैश्विक मंच पर दुनिया का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाली गड़बड़ियों और अनुचित व्यापार प्रथाओं से केवल विश्व व्यापार संगठन (WTO) के तय मानकों और नियमों के दायरे में रहकर ही निपटा जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट ताकीद की कि कोई भी देश मनमाने ढंग से एकतरफा कार्रवाई न करे। बैठक के विभिन्न महत्वपूर्ण सत्रों को संबोधित करते हुए पीयूष गोयल ने औद्योगिक क्षमता, मोस्ट-फेवर्ड-नेशन (MFN) सिद्धांत और ग्लोबल सप्लाई चेन से जबरन मजदूरी (Forced Labour) के खात्मे जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भारत का पक्ष पुरजोर ढंग से रखा।
‘छिपी हुई सब्सिडी’ और बाजार बिगाड़ने की नीति पर प्रहार
केंद्रीय मंत्री गोयल ने वैश्विक मंच पर स्वीकार किया कि कुछ देशों द्वारा अपनी घरेलू कंपनियों को दी जाने वाली अप्रत्यक्ष और ‘छिपी हुई वित्तीय मदद’ (Subsidies) के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में डंपिंग (कम कीमत पर सामान खपाना) और प्रेडेटरी प्राइसिंग जैसी गंभीर समस्याएं जन्म लेती हैं। उन्होंने कहा कि औद्योगिक क्षमता बढ़ाना गलत नहीं है, लेकिन छिपी हुई सब्सिडी के दम पर किसी एक देश या क्षेत्र में उत्पादन का केंद्रीकरण वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदेह है। ऐसी अनुचित व्यापार पद्धतियों पर अंकुश लगाने के लिए WTO के तहत एंटी-डंपिंग और काउंटरवेलिंग ड्यूटी जैसे कड़े कदम उठाए जाने चाहिए, जो निष्पक्ष कानूनी समीक्षा और ठोस सबूतों पर आधारित हों।
विकासशील देशों के अधिकारों और MFN की वकालत
पीयूष गोयल ने विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं का पक्ष लेते हुए कहा कि वैश्विक सप्लाई चेन में विविधता लाना स्वागत योग्य है, लेकिन इसके नाम पर विकासशील देशों पर अनुचित शर्तें नहीं थोपी जानी चाहिए। विकासशील राष्ट्रों को अपने औद्योगिक विकास और आर्थिक प्रगति के लिए नीतियां बनाने की पूरी स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। उन्होंने ‘मोस्ट-फेवर्ड-नेशन’ (MFN) नियम को अंतरराष्ट्रीय व्यापार की रीढ़ करार दिया, जो सभी छोटे-बड़े देशों को व्यापार का समान अवसर प्रदान करता है। इसके साथ ही भारत ने WTO की दो-स्तरीय विवाद निपटान प्रणाली (Dispute Settlement Mechanism) को जल्द से जल्द पूरी तरह बहाल करने की मांग की।
जबरन मजदूरी पर भारत का कड़ा कदम
ग्लोबल सप्लाई चेन से बंधुआ/जबरन मजदूरी को समाप्त करने के मुद्दे पर मंत्री गोयल ने भारत की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने बताया कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 23 जबरन मजदूरी को एक मौलिक अधिकार के रूप में पूरी तरह प्रतिबंधित करता है। भारत ने इस दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाते हुए जुलाई 2026 में अपनी विदेश व्यापार नीति (Foreign Trade Policy) में बड़ा संशोधन किया है, जिसके तहत जबरन मजदूरी से बने सामानों के आयात पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। हालांकि, उन्होंने सचेत किया कि सीमाओं पर की जाने वाली किसी भी दंडात्मक कार्रवाई के लिए सत्यापन योग्य और स्पष्ट सबूत होना अनिवार्य है, यह किसी पूर्वाग्रह से प्रेरित नहीं होना चाहिए।
