देहरादून, 1/10/2026
उत्तराखंड प्रीमियर लीग (UPL) सीजन-3 के फाइनल मुकाबले के साथ गुरुवार को राजीव गांधी इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में रंगारंग क्लोजिंग सेरेमनी का आयोजन किया गया। हालांकि, इस समारोह में हरियाणवी सिंगर मासूम शर्मा की परफॉर्मेंस को लेकर हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। कार्यक्रम के दौरान स्टेडियम के बाहर उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) के कार्यकर्ताओं ने जमकर प्रदर्शन और नारेबाजी की, जिसके बाद पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया।
क्यों हो रहा है मासूम शर्मा का विरोध?
मासूम शर्मा को UPL की क्लोजिंग सेरेमनी में बुलाए जाने के बाद से ही विभिन्न स्थानीय संगठनों में नाराजगी थी। दरअसल, इससे पहले देहरादून के DAV कॉलेज में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मासूम शर्मा पर मंच से अभद्र भाषा और गालियों का प्रयोग करने का आरोप लगा था। उस समय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी मौजूद थे (हालांकि वह घटना से कुछ मिनट पहले निकल चुके थे)। पुराने विवाद को देखते हुए UKD और अन्य संगठनों ने क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड (CAU) से मासूम शर्मा का शो रद्द करने की मांग की थी। संगठनों का तर्क था कि जिस कलाकार का शहर में विवादित इतिहास रहा हो, उसे इतने बड़े मंच पर आमंत्रित करना अनुचित है। CAU कार्यालय पर भी विरोध दर्ज कराया गया था, लेकिन आयोजकों के न मानने पर गुरुवार को हंगामा बढ़ गया।
स्टेडियम के बाहर जोरदार हंगामा, पुलिस ने लिया एक्शन
फाइनल मैच और सेरेमनी के दौरान UKD नेता लूसन टोडरिया और प्रमिला रावत की अगुवाई में दर्जनों कार्यकर्ता स्टेडियम के बाहर पहुंचे और मासूम शर्मा के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा। सुरक्षाकर्मियों ने प्रदर्शन कर रहे कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर पुलिस वाहन से मौके से हटाया।
मुख्यमंत्री के पोस्टरों पर भी बवाल
प्रदर्शन के दौरान आयोजन स्थल पर मुख्यमंत्री के नाम और तस्वीरों वाले पोस्टर लगे देखकर माहौल और गरमा गया। पूरी जानकारी के अभाव में प्रदर्शनकारियों ने सरकार और मुख्यमंत्री के खिलाफ भी नारेबाजी की, जिससे सोशल मीडिया पर भी तीखी बहस छिड़ गई। हालांकि, मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि मुख्यमंत्री धामी UPL की क्लोजिंग सेरेमनी में शामिल नहीं होंगे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उनका विरोध मासूम शर्मा को लेकर था, लेकिन स्टेडियम परिसर में लगे सरकारी पोस्टरों के कारण स्थिति भ्रमित करने वाली बन गई।
