तिरुवनंतपुरम, 5/10/2026
केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने राज्य के लोक निर्माण विभाग (PWD) के पूर्व सचिव एवं वर्तमान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सतर्कता (विजिलेंस) जांच के आदेश दिए हैं। यह जांच केरल स्टेट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट (KSTP) के तहत PWD सचिव के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान लगे गंभीर भ्रष्टाचार और उत्पीड़न के आरोपों से संबंधित है। यह प्रशासनिक और राजनीतिक फैसला ऐसे समय में आया है जब देश के विपक्षी दलों द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज किए जा रहे हैं।
दो दशक पुराना सुसाइड केस और रिश्वतखोरी के आरोप
विवाद की मुख्य जड़ वर्ष 2006 का एक मामला है, जब मलेशियाई कंसोर्टियम पाटी-बेल (PATI-BEL) के प्रोजेक्ट मैनेजर ली सी बीन (मलेशियाई नागरिक) ने आत्महत्या कर ली थी। पाटी-बेल को तिरुवनंतपुरम से अंगमाली तक मेन सेंट्रल रोड के पुनर्निर्माण का कॉन्ट्रैक्ट दिया गया था।
-
सुसाइड नोट के खुलासे: मृतक के सुसाइड नोट में PWD के अधिकारियों पर जानबूझकर काम में देरी करने, भारी रिश्वत मांगने और मानसिक रूप से परेशान करने के सीधे आरोप लगाए गए थे।
-
नामजदगी: इस नोट में उस समय PWD सचिव के पद पर तैनात ज्ञानेश कुमार का नाम भी शामिल था।
KSTP परियोजना: बजट और मुख्य बिंदु
2002 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ए.के. एंटनी की सरकार और PWD मंत्री डॉ. एम. के. मुनीर के विजन के तहत शुरू की गई KSTP योजना का मुख्य उद्देश्य केरल के सड़क नेटवर्क को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप अपग्रेड करना था
-
कुल बजट: 336 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग ₹1,612 करोड़), जिसमें वर्ल्ड बैंक का ₹1,224 करोड़ का ऋण और राज्य सरकार का ₹388 करोड़ का अंशदान शामिल था।
-
सड़क नेटवर्क विकास:
-
फेज 1: 254.80 किमी प्रमुख कॉरिडोर (जैसे थायक्कड़-कोट्टरक्करा, अलपुझा-चंगनास्सेरी, मुवत्तुपुझा-अंगामाली) और 100 किमी अंतर्देशीय जलमार्ग का विकास।
-
फेज 2: 367 किमी स्टेट हाईवे (जैसे कासरगोड-कन्हांगड, थालास्सेरी-वलवुपारा) का चौड़ीकरण।
-
परिणाम: परियोजना के पूर्ण होने से राज्य में सड़क दुर्घटनाओं में 20% की कमी और यात्रा के समय में 20% से अधिक की बचत दर्ज की गई थी।
-
प्रशासनिक राय एवं कानूनी प्रक्रिया
ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल को लेकर प्रशासनिक गलियारों में अलग-अलग राय है। अर्बन प्लानिंग एक्सपर्ट और त्रिवेंद्रम रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (TRDCL) के पूर्व एमडी अनिल कुमार पंडाला ने उन्हें एक “बेहतरीन और सक्रिय PWD सचिव” बताते हुए कहा कि उन्होंने तिरुवनंतपुरम में भूमि अधिग्रहण की जटिल बाधाओं को दूर करने में अहम भूमिका निभाई थी। दूसरी ओर, सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (VACB) के पूर्व अधिकारियों के अनुसार
-
केवल राजनीतिक बयानों के आधार पर प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं की जा सकती; इसके लिए राज्य सरकार द्वारा बाकायदा लिखित ‘गवर्नमेंट ऑर्डर’ (GO) जारी होना अनिवार्य है।
-
चूंकि यह मामला वित्तीय अनियमितताओं के साथ-साथ आत्महत्या के उकसावे से भी जुड़ा है, इसलिए जांच के दायरे और संभावित आपराधिक धाराओं को सरकारी आदेश में स्पष्ट रूप से रेखांकित किया जाएगा।
