haryana police
पंचकूला, 15 सितंबर 2026
हरियाणा में संगठित अपराध और सक्रिय अपराधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए हरियाणा पुलिस ने ‘आरजेएसएफ’ (Rohtak-Jhajjar-Sonepat-Faridabad) पैटर्न को पूरे प्रदेश में मजबूती से लागू कर दिया है। इस इंटेलिजेंस-आधारित और डेटा-संचालित मॉडल के तहत अपराधियों का सत्यापन, उनकी वर्तमान स्थिति और आपराधिक नेटवर्क की ट्रैकिंग की जा रही है।
पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, 1 फरवरी से 25 अगस्त के बीच प्रदेशभर में 45,207 सक्रिय अपराधियों का डेटाबेस तैयार किया गया है। इनमें से 26,026 अपराधियों (57.57%) का सत्यापन पूरा किया जा चुका है।
सत्यापन में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े
साप्ताहिक आधार पर चल रही इस सत्यापन प्रक्रिया के दौरान अपराधियों की वास्तविक स्थिति का पता चला है:
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मौके पर मिले: 7,425 अपराधी अपने दर्ज पतों पर ही मिले।
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जेल में बंद: 1,612 अपराधी वर्तमान में जेल में पाए गए।
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मृत्यु दर्ज: 375 अपराधियों की मृत्यु हो चुकी है।
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शेष की जांच जारी: प्राथमिकता के आधार पर बाकी 19,137 अपराधियों की गतिविधियों की जांच की जा रही है।
डिजिटल निगरानी मजबूत: 6,762 का FRS डेटा अपलोड
तकनीकी निगरानी को धार देने के लिए अब तक 6,762 अपराधियों का ‘फेस रिकग्निशन सिस्टम’ (FRS) डेटा सिस्टम में अपलोड किया जा चुका है। इससे संदिग्ध गतिविधियों या ठिकाने बदलते ही तकनीक की मदद से अपराधियों की तुरंत पहचान संभव हो सकेगी।
इन जिलों में 100% तक हुआ सत्यापन
आरजेएसएफ मॉडल की शुरुआत रोहतक, झज्जर, सोनीपत और फरीदाबाद से हुई थी। एडीजीपी (कानून एवं व्यवस्था) संजय कुमार ने बताया कि इन चार जिलों में मिली सफलता के बाद ही इसे पूरे राज्य में लागू किया गया है।
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100% सत्यापन: रोहतक, झज्जर और फरीदाबाद।
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शीर्ष प्रदर्शन वाले अन्य जिले: हिसार (99.11%), सोनीपत (93.13%) और सिरसा (81.97%)।
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प्रगतिशील जिले: कैथल (68.43%), जींद (62.82%) और फतेहाबाद (57.49%)।
“डेटा-आधारित पुलिसिंग ही अपराध नियंत्रण का आधार” – DGP अजय सिंघल
हरियाणा के पुलिस महानिदेशक (DGP) अजय सिंघल ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पुलिसिंग को इंटेलिजेंस-बेस्ड, आधुनिक तकनीक से लैस और डेटा-संचालित बनाया जाए।
“पुलिस का लक्ष्य केवल अपराधियों का रिकॉर्ड रखना नहीं, बल्कि उपलब्ध डेटा का उपयोग कर अपराध को होने से पहले रोकना है। हर अपराधी की वर्तमान स्थिति और आपराधिक संपर्कों की सही जानकारी होना ही प्रभावी पुलिसिंग की पहली शर्त है।”— अजय सिंघल, DGP हरियाणा
अंतर-जिला समन्वय होगा मजबूत
चूंकि अपराधी किसी एक जिले की सीमा तक सीमित नहीं रहते, इसलिए इस केंद्रीय डेटाबेस की मदद से एक जिले की पुलिस दूसरे जिले के साथ रीयल-टाइम जानकारी साझा कर सकेगी। इससे न केवल नए युवाओं को आपराधिक गिरोहों में शामिल होने से रोका जा सकेगा, बल्कि अंतर-जिला अपराधों पर भी समय रहते कार्रवाई की जा सकेगी।
