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चंडीगढ़, 15 सितंबर 2026
हरियाणा में एक तरफ विपक्ष लगातार मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पर “डमी सीएम”, “दिल्ली से चलने वाले सीएम” और पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल की छाया से बाहर न निकल पाने के आरोप लगा रहा है, वहीं दूसरी तरफ सीएम सैनी अपने फैसलों और कार्यशैली से इन आरोपों का करारा जवाब दे रहे हैं। हाल के दिनों में राज्य में ऐसे कई बड़े विवाद उभरे, जिनका समाधान मंत्री और प्रशासनिक अधिकारी नहीं निकाल सके। लेकिन जैसे ही ये मामले मुख्यमंत्री के दरबार में पहुंचे, सीधे संवाद के जरिए उनका तुरंत समाधान हो गया।
37 दिन लंबी सफाई कर्मचारियों की हड़ताल खत्म
प्रदेश की नगरपालिका सफाई यूनियनों और फायर ब्रिगेड कर्मचारियों की 6 अगस्त से चल रही हड़ताल के कारण कई शहरों की सफाई व्यवस्था चरमरा गई थी। शहरी विकास मंत्री विपुल गोयल और सामाजिक न्याय मंत्री कृष्ण बेदी ने लगातार वार्ता की और सख्ती बरतते हुए नोटिस भी थमाए, लेकिन समाधान नहीं निकला। 11 सितंबर को 37वें दिन मुख्यमंत्री आवास पर हुई बैठक में सीएम सैनी की मध्यस्थता से कर्मचारियों की मांगें मान ली गईं, जिसके बाद यूनियनों ने हड़ताल समाप्त करने का ऐलान किया।
हिसार का जीवन कुंडू हत्याकांड मामला
4 अगस्त को हुए हिसार के डेयरी संचालक जीवन कुंडू हत्याकांड को लेकर संघर्ष समिति और प्रशासन के बीच दो हफ्तों से गतिरोध बना हुआ था। 15 अगस्त को सीएम के कार्यक्रम में हंगामे के बावजूद स्थानीय स्तर पर मामला नहीं सुलझ सका। 17 अगस्त को मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद पीड़ित परिवार को आर्थिक और अन्य जरूरी मदद पर सहमति बनी और गतिरोध समाप्त हुआ।
गुरुद्वारा श्री पंजोखरा साहिब विवाद का पटाक्षेप
7 अगस्त को अंबाला के गुरुद्वारा पंजोखरा साहिब में हिंसक झड़प के बाद 13 अगस्त को सिख संगत ने हाईवे जाम कर दिया था। पुलिस के लाठीचार्ज और आंसू गैस छोड़ने के बाद स्थिति और तनावपूर्ण हो गई थी। 19 अगस्त को हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रतिनिधिमंडल ने सीएम आवास पर बैठक की। मुख्यमंत्री की पहल पर युवाओं पर दर्ज एफआईआर रद्द करने, रिहाई और माफीनामे के साथ विवाद पूरी तरह शांत हुआ।
बीरू बाल्मीकि हत्याकांड और एनकाउंटर विवाद
करनाल के बीरू बाल्मीकि हत्याकांड के बाद एनकाउंटर को लेकर रोड समाज में भारी नाराजगी थी। यह स्थानीय तनाव सरकार के लिए राजनीतिक चुनौती बन रहा था। मुख्यमंत्री ने मामले की जांच तुरंत क्राइम ब्रांच को सौंपी और सीधे बातचीत कर इस संवेदनशील मुद्दे को सुलझाया।
क्या कहते हैं राजनीतिक जानकार?
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धीरेंद्र अवस्थी (राजनीतिक विश्लेषक): “सीएम सैनी बड़े विवादों का समाधान सीएम आवास पर करके यह संदेश देने में कामयाब रहे हैं कि वे डमी सीएम नहीं हैं। हालांकि, पूर्व सीएम मनोहर लाल का प्रभाव अब भी फैसलों के पीछे दिखता है, लेकिन बड़े मुद्दों पर खुद पहल करना विपक्ष के दावों को कमजोर करता है।”
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प्रो. गुरमीत सिंह (वरिष्ठ पत्रकार): “पूर्व सीएम मनोहर लाल उनके राजनीतिक गुरु रहे हैं, इसलिए उनका मार्गदर्शन होना स्वाभाविक है। लेकिन हालिया दौर में जिस तरह सीएम ने खुद आगे बढ़कर बड़े संकटों को टाला है, उससे साफ है कि वे अपनी स्वतंत्र पहचान बना रहे हैं।”
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राजेश मोदगिल (वरिष्ठ पत्रकार): “सीएम सैनी का जनता से सीधा संपर्क और विवादों को सुलझाने की क्षमता उन्हें राजनीति का एक मंझा हुआ खिलाड़ी साबित कर रही है। वे अपनी कार्यशैली से विपक्ष के नैरेटिव को लगातार ध्वस्त कर रहे हैं।”
