न्यूज डेस्क, 27/06/2026
भारतीय घरेलू उद्योगों को विदेशी बाजार के नुकसानदेह मुकाबले से बचाने के लिए सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है. केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय की शाखा डीजीटीआर (DGTR) ने चीन, जापान और रूस से भारत आ रहे सस्ते स्टील के खिलाफ डंपिंग रोधी जांच शुरू कर दी है. भारतीय कंपनियों की शिकायत के बाद सरकार ने यह कदम उठाया है.
घरेलू कंपनियों का दावा है कि ये तीनों देश अपने स्टील को वास्तविक लागत से बहुत कम कीमत पर भारत में बेच रहे हैं. इस प्रक्रिया को व्यापार की भाषा में ‘डंपिंग’ कहा जाता है. इसके कारण भारतीय कंपनियों के व्यापार को भारी नुकसान पहुंच रहा है और बाजार का संतुलन बिगड़ रहा है.
किन उत्पादों पर होगी जांच?
इस जांच के दायरे में ‘हॉट-रोल्ड फ्लैट प्रोडक्ट्स’ को रखा गया है. यह मुख्य रूप से अलॉय या नॉन-अलॉय स्टील से बने उत्पाद होते हैं, जिनकी मोटाई 25 मिलीमीटर और चौड़ाई 2100 मिलीमीटर तक होती है. इस जांच से स्टेनलेस स्टील को बाहर रखा गया है.
यह स्टील भारतीय उद्योगों की रीढ़ माना जाता है. इसका इस्तेमाल नीचे दिए गए मुख्य क्षेत्रों में होता है:
ऑटोमोबाइल: कार, बाइक और व्यावसायिक वाहनों के निर्माण में.
इंफ्रास्ट्रक्चर: निर्माण कार्य, पुल और भारी इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स में.
ऊर्जा क्षेत्र: तेल और गैस ले जाने वाली बड़ी पाइपलाइनों में.
भारी मशीनरी: सीमेंट, रिफाइनरी और फर्टिलाइजर फैक्ट्रियों की मशीनों में.
मेडिकल सेक्टर पर भी लिया गया एक्शन
स्टील के साथ-साथ सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र को लेकर भी एक बड़ा फैसला किया है. चीन और मलेशिया से आने वाले ‘डायलाइजर’ की भी डंपिंग जांच शुरू हो गई है. डायलाइजर एक महत्वपूर्ण मेडिकल डिवाइस है, जो किडनी के मरीजों के इलाज में कृत्रिम किडनी की तरह काम करता है. यह मरीज के खून से टॉक्सिन्स और गंदगी साफ करता है. स्थानीय निर्माताओं का कहना है कि विदेशों से आने वाले सस्ते डायलाइजर के कारण भारतीय स्वास्थ्य उत्पाद उद्योग को नुकसान हो रहा है.
आगे क्या होगा?
डीजीटीआर की शुरुआती जांच में यह पाया गया है कि विदेशी सामानों की कीमतें भारतीय बाजार के मुकाबले असामान्य रूप से बहुत कम हैं. यदि अंतिम जांच में भी यह साबित हो जाता है कि इस सस्ते आयात से देश के निर्माताओं को गंभीर आर्थिक चोट पहुंच रही है, तो सरकार इन उत्पादों पर भारी ‘एंटी-डंपिंग ड्यूटी’ (विशेष आयात शुल्क) लगा देगी. इस शुल्क के लगने से विदेशी सामान महंगे हो जाएंगे और भारतीय कंपनियों को बाजार में बराबरी का मौका मिलेगा.
