Delhi High Court's observation: Satya Niketan incident not an ordinary accident, but the result of negligence.
दिल्ली,16 September 2016
सत्य निकेतन हॉस्टल हादसे पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, कहा- यह सामान्य दुर्घटना नहीं
दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को सत्य निकेतन में हॉस्टल की इमारत गिरने के मामले की सुनवाई करते हुए घटना को सामान्य हादसा मानने से इनकार किया। चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने कहा कि छोटे शहरों से अपने करियर के सपने लेकर दिल्ली आए चार छात्रों की उम्मीदें कुछ लोगों की कथित लापरवाही और आपराधिक रवैये के कारण खत्म हो गईं।
यह हादसा दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास सत्य निकेतन इलाके में हुआ था। यहां छात्रों के लिए पांच मंजिला पेइंग-गेस्ट हॉस्टल संचालित किया जा रहा था। 6 सितंबर को इमारत में मरम्मत का काम चल रहा था, इसी दौरान पूरी बिल्डिंग ढह गई। मलबे में दबने से सात लोगों की मौत हुई थी, जबकि कई अन्य घायल हुए थे।
सुनवाई के दौरान एडीशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने अदालत को बताया कि घटना के बाद प्रशासन की ओर से कई कदम उठाए गए हैं। इनमें छात्रों के लिए हॉस्टल सुविधाएं विकसित करने से जुड़े प्रयास भी शामिल हैं।
दिल्ली में हॉस्टल की कमी पर भी उठे सवाल
सुनवाई के दौरान राजधानी में छात्रों के लिए पर्याप्त और सुरक्षित हॉस्टल सुविधाओं की उपलब्धता का मुद्दा भी सामने आया। अदालत की टिप्पणियों के बीच यह सवाल अहम हो गया है कि दिल्ली जैसे शहर में शिक्षा और करियर के लिए आने वाले छात्रों को सुरक्षित और उचित आवास उपलब्ध कराने के लिए क्या पर्याप्त व्यवस्था है।
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने अदालत को बताया कि सत्य निकेतन हादसे के बाद अधिकारियों की ओर से कई कदम उठाए गए हैं। इनमें छात्रों के लिए हॉस्टल से जुड़ी सुविधाएं विकसित करने के लिए जमीन की पहचान करना और उसे अन्य उपयोग से अलग रखना भी शामिल है।
सुनवाई के दौरान बेंच ने दिल्ली में हॉस्टल की कमी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि यह कोई नई समस्या नहीं है। अदालत ने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों से छात्र पढ़ाई और बेहतर अवसरों की तलाश में दिल्ली आते हैं। ऐसे में उनके लिए पर्याप्त और सुरक्षित आवास की व्यवस्था जरूरी है।
PIL में स्वतंत्र जांच और मुआवजे की मांग
हाईकोर्ट सत्य निकेतन हॉस्टल हादसे की स्वतंत्र जांच की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई कर रहा है। यह याचिका आकर्षक दानवीर राठी की ओर से दायर की गई है। याचिका में दिल्ली के सभी पेइंग-गेस्ट आवासों की जांच कराने की मांग की गई है।
याचिका में हादसे के पीड़ितों और उनके परिवारों के लिए उचित मुआवजा देने के साथ-साथ पुनर्वास योजना तैयार करने की मांग भी की गई है। अदालत ने कहा कि इस PIL पर 25 सितंबर को एक अन्य याचिका के साथ सुनवाई की जाएगी।
7 सितंबर को भी सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठे थे
इससे पहले 7 सितंबर को हाईकोर्ट ने सत्य निकेतन हादसे की उच्चस्तरीय MCD जांच के आदेश दिए थे। अदालत ने कहा था कि सरकार अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती। कोर्ट ने इस घटना को केवल दुर्भाग्यपूर्ण घटना मानने के बजाय छात्रों के लिए हॉस्टल और पर्याप्त आवास सुविधाओं से जुड़ी गंभीर चिंता के रूप में देखा था।
अदालत ने दिल्ली यूनिवर्सिटी और सरकार द्वारा संचालित हॉस्टलों की स्थिति पर भी चिंता जताई थी। साथ ही छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और पेइंग-गेस्ट आवासों को नियंत्रित करने के लिए MCD समेत संबंधित अधिकारियों की ओर से उठाए गए कदमों पर भी सवाल किए गए थे।
