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ओडिशा, 28/04/2026
केंदुझार जिले से 27 अप्रैल 2026 को एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है. यह घटना साल 2016 के ‘दाना मांझी’ कांड की याद दिलाती है, जहां एक शख्स को एंबुलेंस के अभाव में अपनी पत्नी का शव कंधे पर ढोना पड़ा था. इस बार बेबसी की वजह अस्पताल की एम्बुलेंस नहीं, बल्कि बैंकिंग नियमों की पेचीदगी बनी.
क्या है पूरा मामला?
पटना थाना अंतर्गत दियनाली गांव के रहने वाले जीतू मुंडा की बहन, कलारा मुंडा की दो महीने पहले मृत्यु हो गई थी. उसके बैंक खाते में 19,300 रुपये जमा थे. सोमवार को जब जीतू अपनी बहन के पैसे निकालने बैंक पहुंचा, तो अधिकारियों ने उससे मृत्यु प्रमाण पत्र और नॉमिनी (उत्तराधिकारी) का सबूत मांगा.
गुस्से में उठाया खौफनाक कदम
चूंकि उसके पास कोई सबूत नहीं था, वह वहां से लौट गया और श्मशान घाट (मसानी) चला गया. उसने वहां जमीन के नीचे दबे अपनी बहन के शव के अवशेषों को खोदकर निकाला और उन्हें अपने कंधे पर लादकर फिर से बैंक पहुंच गया. इस वजह से बैंक परिसर में भगदड़ की स्थिति पैदा हो गई. बाद में बैंक अधिकारियों और पुलिस के समझाने के बाद जीतू मुंडा घर लौट गया.
शव को लादकर बैंक पहुंचने की घटना की चर्चा तेजी से फैलने लगी. मामला तूल पकड़ता देख बैंक अधिकारियों ने इस बात की जांच शुरू की कि ऐसी घटना क्यों और किन हालात में हुई? बैंक अधिकारियों के अनुसार, जीतू मुंडा अनपढ़ है और वह नियमों को समझ नहीं पाया.
क्या कहते हैं अधिकारी
ओडिशा ग्रामीण बैंक के केंदुझार जिला प्रबंधक सत्यव्रत नंदा ने कहा, “कल (सोमवार) जीतू मुंडा नाम का एक व्यक्ति नशे की हालत में बैंक आया और अपनी मृत बहन के खाते में जमा पैसों की मांग करने लगा. बैंक अधिकारी सुशांत कुमार सेठी ने उससे जरूरी दस्तावेज मांगे. बैंक अधिकारी ने उसे जो कुछ भी बताया, उसे वह कुछ समझ नहीं पाया. दो घंटे बाद, जीतू मुंडा अपनी बहन का कंकाल खोदकर निकाल लाया और बैंक पहुंच गया. इस घटना के बाद हमने पुलिस को सूचना दी. पुलिस बैंक आई और उसने उसे समझाया-बुझाया. हमने इस घटना पर दुख जताया है. हम उसकी मृत बहन के बैंक खाते में जमा पैसे जल्द से जल्द वापस दिलाने के इंतजाम कर रहे हैं.”
इस घटना के बाबत मल्लीपाशी ओडिशा ग्रामीण बैंक के शाखा प्रबंधक सुशांत कुमार सेठी ने कहा, “कल जीतू मुंडा नाम का एक व्यक्ति अपनी मृत बहन के बैंक खाते से पैसे निकालने आया था. लेकिन हमने उससे अपनी मृत बहन के नॉमिनी (नामांकित व्यक्ति) और मृत्यु प्रमाण पत्र लाने को कहा. यह सुनकर वह गुस्सा हो गया और वापस चला गया, और दो घंटे बाद अपनी बहन का कंकाल लेकर बैंक पहुंच गया. हमने इस बारे में पुलिस को सूचित किया.” थाना प्रभारी किरण प्रसाद साहू ने बताया, “बैंक से सूचना मिलने पर मैं बैंक पहुंचा. चूंकि जीतू एक अनपढ़ व्यक्ति है, उसे बैंक के नियमों के अनुसार नॉमिनी या उत्तराधिकारी के बारे में कोई जानकारी नहीं थी. किसी मृत व्यक्ति के खाते से पैसे कैसे निकाले जाते हैं? बैंक कर्मचारियों द्वारा यह समझाने के बावजूद वह समझ नहीं पाया. इसी कारण ऐसी घटना घटी है.”
पटना के प्रखंड विकास अधिकारी मानस दंडपत ने कहा, “आज मुझे इस बारे में पता चला है. मैं यह जानने की कोशिश करूंगा कि समस्या के समाधान के लिए क्या किया जा सकता है.”
