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मुंबई, 24/10/2026
भारतीय शेयर बाजार के लिए यह कारोबारी सप्ताह निराशाजनक रहा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के चलते घरेलू शेयर बाजार पर भारी दबाव देखने को मिला। सप्ताह के दौरान सेंसेक्स और निफ्टी में लगातार चार कारोबारी सत्रों में गिरावट दर्ज की गई। वहीं, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में जोरदार बिकवाली ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी।
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, मौजूदा मैक्रोइकॉनॉमिक परिस्थितियां भारतीय शेयर बाजार के लिए चुनौतीपूर्ण बनी हुई हैं। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से देश के आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। यही वजह है कि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी को बाजार के लिए एक प्रमुख जोखिम माना जा रहा है।
निफ्टी और सेंसेक्स में बड़ी गिरावट
छुट्टियों के कारण कम कारोबारी सत्रों वाले इस सप्ताह में बाजार की धारणा कमजोर बनी रही। प्रमुख सूचकांकों में लगातार गिरावट से निवेशकों को नुकसान उठाना पड़ा।
निफ्टी 50 में 2.4% की गिरावट
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक निफ्टी 50 इस सप्ताह करीब 2.4 प्रतिशत गिर गया। लगातार बिकवाली के कारण इसके अल्पकालिक तकनीकी संकेत कमजोर हुए हैं। बाजार विश्लेषकों के अनुसार, 22,800 से 23,000 के स्तर पर निफ्टी को महत्वपूर्ण प्रतिरोध का सामना करना पड़ सकता है। बाजार की आगे की दिशा तय करने में वैश्विक संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों की भूमिका अहम रहने की संभावना है।
सेंसेक्स करीब 2.2% फिसला
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स भी सप्ताह के दौरान करीब 2.2 प्रतिशत टूट गया। बाजार में जारी कमजोरी के बीच 72,500 से 72,600 का स्तर तत्काल सपोर्ट जोन के रूप में देखा जा रहा है। इस स्तर के आसपास बाजार की चाल पर निवेशकों और विश्लेषकों की नजर बनी रह सकती है।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में ज्यादा बिकवाली
इस सप्ताह बाजार में गिरावट का सबसे ज्यादा दबाव मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर देखने को मिला। अनिश्चित वैश्विक माहौल के बीच निवेशकों ने छोटे और मझोले कंपनियों के शेयरों में मुनाफावसूली और बिकवाली को प्राथमिकता दी। इससे इन शेयरों में गिरावट और तेज हो गई।
विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में अनिश्चितता बढ़ने पर निवेशक जोखिम वाले शेयरों में अपनी हिस्सेदारी कम कर सकते हैं। इसका असर विशेष रूप से मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों पर दिखाई देता है।
आगे कैसी रह सकती है बाजार की चाल?
आने वाले कारोबारी सत्रों में कच्चे तेल की कीमतें, वैश्विक बाजारों के संकेत और घरेलू आर्थिक परिस्थितियां निवेशकों की रणनीति को प्रभावित कर सकती हैं। निफ्टी और सेंसेक्स के अहम सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तरों पर भी बाजार की नजर रहेगी।
हालांकि, बाजार के अगले रुख को लेकर निश्चित अनुमान लगाना मुश्किल है। ऐसे माहौल में निवेशकों के लिए जल्दबाजी में फैसले लेने के बजाय अपनी जोखिम उठाने की क्षमता और निवेश की अवधि को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है।
