Balbir Sidhu
मोहाली, 1/10/2026
वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पंजाब के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू ने आज केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा पंजाब दौरे के दौरान राज्य से 31 दिसंबर 2029 तक नशा खत्म करने के किए गए दावे को राजनीतिक पाखंड करार देते हुए भाजपा को राज्य में नशा तस्करों को संरक्षण देने के लिए समान रूप से जिम्मेदार बताया है।
सिद्धू ने कहा कि अमित शाह का यह दावा पूरी तरह खोखला है, क्योंकि पंजाब पर ‘चिट्टे’ का कलंक लगाने वाली और नशा माफिया को संरक्षण देने वाली पिछली बादल सरकार थी, जिसमें भाजपा स्वयं भी गठबंधन की भागीदार थी। उन्होंने कहा कि राज्य के हजारों युवाओं को नशे की दलदल में धकेलकर मौत के मुंह में पहुंचाने के पाप में भाजपा भी बराबर की हिस्सेदार रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा द्वारा आज नशा-मुक्त पंजाब बनाने की बातें करना उसके दोहरे मापदंड को साबित करता है।
सिद्धू ने अमित शाह से सवाल किया कि पंजाब आकर नशे की बात करने वाले गृह मंत्री ने देश में महंगाई और आम परिवारों पर बढ़ते आर्थिक दबाव के बारे में क्यों नहीं बोला? अगस्त 2026 में भारत की खुदरा महंगाई 4.82 प्रतिशत रही, जबकि खाद्य महंगाई 5.95 प्रतिशत दर्ज की गई। उन्होंने कहा कि जनता की रसोई का बजट लगातार बढ़ रहा है। ऐसे महत्वपूर्ण मुद्दों को क्यों नजरअंदाज किया जा रहा है?
उन्होंने आगे कहा कि शेयर बाजार में आई गिरावट और निवेशकों की चिंता के बारे में भी केंद्र सरकार को जवाब देना चाहिए। सितंबर 2026 में निफ्टी 50 में 6.1 प्रतिशत और सेंसेक्स में 5.8 प्रतिशत की मासिक गिरावट दर्ज की गई तथा विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय इक्विटीज से लगभग 2.7 बिलियन डॉलर निकाले गए। सिद्धू ने सवाल किया कि जब देश की अर्थव्यवस्था से जुड़े ये मुद्दे लोगों की चिंता का कारण बन रहे हैं, तो पंजाब की धरती पर इन पर चर्चा क्यों नहीं हुई? किसानी के मुद्दे पर सिद्धू ने कहा कि पंजाब के किसानों को तीन कृषि कानूनों का संघर्ष आज भी याद है। केंद्र सरकार ने नवंबर 2021 में तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का ऐलान किया और बाद में संसद ने उन्हें निरस्त कर दिया था। उन्होंने कहा कि अमित शाह को पंजाब आकर किसानों की लंबे समय से चली आ रही मांगों, MSP की कानूनी गारंटी और किसानों से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी स्पष्ट जवाब देना चाहिए था।
सिद्धू ने कहा कि पंजाब के किसानों ने देश की खाद्य सुरक्षा में बड़ा योगदान दिया है और पंजाब की जवानी, किसानों तथा आम लोगों से जुड़े मुद्दों को केवल चुनावी भाषणों तक सीमित नहीं किया जा सकता। सिद्धू ने कहा कि पंजाब आने वाले केंद्रीय नेताओं को राज्य के लोगों के सवालों के जवाब देने होंगे—नशे, महंगाई, किसानी, MSP, रोजगार और पंजाब के आर्थिक हितों के बारे में। उन्होंने कहा कि पंजाब के लोग केवल नारे नहीं, बल्कि ठोस नीति, जवाबदेही और जमीनी कार्रवाई की उम्मीद रखते हैं।
सिद्धू ने गृह मंत्री से सीधा सवाल करते हुए पूछा कि यदि भाजपा के पास नशा खत्म करने का कोई जादुई फॉर्मूला है, तो वह अपनी सरकारों वाले राज्यों, खासकर गोवा और गुजरात में नशे के कारोबार पर लगाम लगाने में क्यों नाकाम रही है? उन्होंने कहा कि गोवा आज ड्रग टूरिज्म का केंद्र बन चुका है और गुजरात के समुद्री बंदरगाह नशा तस्करी के प्रमुख केंद्र बन गए हैं। सिद्धू ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार सीमा पार से आने वाले नशे को रोकने में भी पूरी तरह विफल साबित हुई है। BSF और केंद्रीय एजेंसियों के होते हुए भी अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के जरिए नशा देश में आ रहा है। उन्होंने कहा कि अब गुजरात के समुद्री पोर्ट देश में नशा तस्करी का सबसे बड़ा माध्यम और प्राथमिक स्रोत बन चुके हैं, जहां से बड़े स्तर पर नशे की खेपें आ रही हैं।
उन्होंने आगे कहा कि केंद्र सरकार अपनी नाक के नीचे हो रही इस तस्करी को रोकने में पूरी तरह असमर्थ रही है। कांग्रेस नेता ने कहा कि यह बेहद अफसोसजनक है कि अमित शाह ने पंजाब की धरती पर आकर राज्य के ज्वलंत मुद्दों और सिख समुदाय की लंबे समय से चली आ रही मांगों, जैसे बंदी सिंहों की रिहाई, पर एक शब्द भी नहीं बोला। उन्होंने कहा कि उनका पंजाब दौरा केवल राजनीतिक रोटियां सेंकने तक सीमित रहा। उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब के लोग अब भाजपा के इन खोखले वादों और जुमलों के बहकावे में नहीं आएंगे और युवाओं को बर्बाद करने वालों को मुंहतोड़ जवाब देंगे।
