नागपुर, 2 जुलाई, 2026: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि 1947 के बंटवारे के बाद पाकिस्तान से भारत आए लोगों को शरणार्थी कहना सही नहीं है। वे “संघर्ष के योद्धा” थे जो पीढ़ियों से बनाई ज़मीन, बिज़नेस और प्रॉपर्टी छोड़कर भारत आए थे।
उन्होंने कहा कि ये लोग भारत इसलिए आए ताकि वे बिना किसी डर के यहां अपने धर्म का पालन कर सकें। “हम सब भारत को एक रखने की लड़ाई हार गए, लेकिन उन्होंने अपना विश्वास नहीं छोड़ा।”
भागवत ने ये बातें बुधवार को नागपुर में सिंधु एजुकेशन सोसाइटी के 75वें स्थापना दिवस समारोह में कहीं। RSS ने 10 से 12 जुलाई तक कर्नाटक के बेलगावी में होने वाली अखिल भारतीय प्रांत प्रचारक बैठक की भी घोषणा की।
उन्होंने कहा कि शिक्षा का मकसद सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि अच्छे इंसान बनाना है। सही और गलत का फैसला सिर्फ़ किताबों से नहीं होता, बल्कि टीचरों के व्यवहार और उनके सिखाए गए मूल्यों से भी होता है।
हालात या किस्मत के आगे हार नहीं माननी चाहिए। मुश्किलों से लड़ने वाले ही आगे बढ़ते हैं, जबकि चुनौतियों से भागने वाले जल्दी हार मान लेते हैं। RSS के सौ साल पूरे होने के जश्न के तहत, भागवत शुक्रवार को अपने प्रचारकों की ज़िंदगी पर 100 वीडियो रिलीज़ करेंगे।
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