गाँव में ढिलवां (दक्षिण) सहित छह पंचायतें हैं, लेकिन बच्चों और युवाओं के लिए एक बड़े स्टेडियम की सुविधा उपलब्ध नहीं है। उनकी पंचायत में स्थित एक मैदान, जिसे मूल रूप से बच्चों के खेलने के लिए बनाया गया था, अनचाहे पेड़-पौधे और झाड़ियों से भर गया है, इसके कारण यह मैदान खेलकूद और मनोरंजक गतिविधियों के लिए अनुपयुक्त हो गया है। सरपंच ने गाँव में खाली पड़े एक अन्य प्लॉट की ओर भी ध्यान दिलाया, जहाँ जंगली घास और झाड़ियाँ उग आई हैं। उन्होंने इस स्थान की सफाई करवाकर वहाँ पार्क विकसित करने का प्रस्ताव रखा, ताकि गाँववासी इस जगह का दोबारा उपयोग कर सकें।
मामले पर संज्ञान लेते हुए, डिप्टी कमिश्नर हरप्रीत सिंह ने तुरंत ज़िला विकास एवं पंचायत अधिकारी (डीडीपीओ) को निर्देश दिए कि ढिलवां दखण में दोनों स्थानों की सफाई सुनिश्चित की जाए और वहाँ खेल मैदान तथा पार्क विकसित किए जाएँ। इस प्रस्तावित पहल का उद्देश्य केवल सख्त कार्रवाई के माध्यम से ही नहीं, बल्कि गाँव के बुनियादी ढाँचे में सुधार करके भी नशे की समस्या से निपटना है। उपेक्षित सार्वजनिक स्थानों को दोबारा उपयोग में लाने से नशे के सेवन जैसी अवैध गतिविधियों के लिए उपलब्ध अवसरों को कम करने में मदद मिल सकती है और वहीं, खेलकूद और मनोरंजन की सुविधाएँ विकसित होने से युवाओं को खेलों तथा रचनात्मक सामुदायिक गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।
‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ के तहत, पंजाब सरकार नशे के ख़िलाफ़ बहुआयामी रणनीति अपना रही है, इसमें नशा तस्करों के ख़िलाफ़ कार्रवाई के साथ-साथ नशे की रोकथाम, नशामुक्ति, रिहैबिलिटेशन और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देने पर भी ज़ोर दिया जा रहा है। यह पहल स्थानीय समस्याओं की पहचान करने और उनके समाधान के लिए निवासियों को एकजुट करने में गाँवों तथा पंचायतों की भागीदारी के महत्त्व को उजागर करती है। ढिलवां में प्रस्तावित यह पहल दर्शाती है कि पंचायत स्तर पर प्रशासनिक प्रयास किस प्रकार इस व्यापक मुहिम में योगदान दे सकते हैं।
प्रशासन के निर्देशों से दोनों स्थानों को पुनः विकसित करने का रास्ता साफ होने की उम्मीद है। खेल मैदान बच्चों को बाहरी गतिविधियों के लिए एक समर्पित स्थान उपलब्ध करवाएगा, जबकि प्रस्तावित पार्क गाँववासियों के लिए एक साझा सार्वजनिक स्थल के रूप में विकसित हो सकेगा। यह पहल नशे के ख़िलाफ़ अभियान में पंचायतों की महत्त्वपूर्ण भूमिका को भी उजागर करती है; पंचायतें संवेदनशील स्थानों की पहचान करने, उन्हें प्रशासन के ध्यान में लाने और व्यावहारिक समाधान सुझाने में अहम योगदान दे सकती हैं। उपेक्षित भूमि को खेलकूद और सामुदायिक उपयोग के स्थानों में बदलकर गाँव का उद्देश्य अपने आसपास के वातावरण को अधिक सुरक्षित बनाना और युवाओं को नशे से दूर रखने के स्थानीय प्रयासों को मज़बूत करना है।
