देश भर की नगर पालिकाओं को अवैध इस्तेमाल पर सीलिंग का निर्देश
नई दिल्ली, 23 सितंबर 2026
देश भर की रिहायशी कॉलोनियों में अवैध रूप से चल रही व्यावसायिक (कमर्शियल) गतिविधियों पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। मंगलवार को शीर्ष अदालत ने सभी नगर निगमों और स्थानीय निकायों को निर्देश दिया कि वे रिहायशी संपत्तियों के गैर-कानूनी कमर्शियल इस्तेमाल के खिलाफ कार्रवाई को प्राथमिकता दें और उल्लंघन पाए जाने पर ऐसी संपत्तियों को तुरंत सील करें।
‘पिक एंड चूज’ की नीति पर कोर्ट की सख्त चेतावनी
जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि नगर निकायों को बिना किसी भेदभाव के निष्पक्ष कार्रवाई करनी होगी। पीठ ने चेतावनी देते हुए कहा: “हम यह साफ करते हैं कि सभी संबंधित अथॉरिटी बिना किसी भेदभाव के यह काम करेंगी। अगर अधिकारियों ने ‘पिक एंड चूज’ (छंटनी करके कार्रवाई करने) का तरीका अपनाया, तो कोर्ट इस मामले पर बेहद सख्त रुख अपनाएगा।”
जजमेंट के दौरान पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन इलाकों का मास्टर प्लान में विशेष उपयोग (रेजिडेंशियल या कमर्शियल) तय नहीं है, उन पर भी ध्यान दिया जाएगा, लेकिन फिलहाल उनके खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जाएगी।
नियमों के खुलेआम उल्लंघन पर चिंता
सुप्रीम कोर्ट ने बिल्डिंग बाय-लॉज और लैंड-यूज रेगुलेशंस के बड़े पैमाने पर हो रहे उल्लंघन पर गंभीर चिंता व्यक्त की। अदालत ने कहा कि अक्सर स्वीकृत नक्शे और नियमों को दरकिनार कर निर्माण किया जाता है। इससे भी ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि निर्माण पूरा होने के बाद जिस मकसद से मंजूरी ली गई थी, उसकी जगह प्रॉपर्टी का इस्तेमाल कमर्शियल कामों के लिए होने लगता है।
असली निवासियों और पर्यावरण पर पड़ता है बुरा असर
अदालत ने कहा कि रिहायशी मकानों और जमीनों का बिना इजाजत व्यावसायिक इस्तेमाल कानून और जनहित के खिलाफ है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि इस तरह की अवैध गतिविधियों से उन आम नागरिकों को भारी परेशानी और नुकसान उठाना पड़ता है, जिन्होंने अपनी जीवन भर की कमाई लगाकर रिहायशी इलाकों में घर खरीदा है। समाज के कुछ तत्वों द्वारा किए जाने वाले इस गलत इस्तेमाल का नागरिक सुविधाओं और पर्यावरण पर भी काफी दूरगामी और नकारात्मक असर पड़ता है।
चेन्नई मामले से बढ़ा देशव्यापी जांच का दायरा
उल्लेखनीय है कि यह मामला मूल रूप से चेन्नई में अवैध निर्माण से जुड़ी एक याचिका के रूप में सामने आया था। हालांकि, मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इसका दायरा बढ़ाते हुए पूरे देश के नगर निगमों और नगर पालिकाओं में इस मुद्दे की जांच करने का फैसला किया। अदालत ने सभी स्थानीय निकायों को अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में गहन जांच करने के निर्देश दिए हैं ताकि खास तौर पर रेजिडेंशियल घोषित इलाकों में चल रही अवैध कमर्शियल गतिविधियों को चिन्हित कर उन पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
