नई दिल्ली, 05/10/2026
जीएसटी परिषद (GST Council) अपनी आगामी बैठक में कारोबारियों और करदाताओं के लिए कर अनुपालन (Tax Compliance) को आसान बनाने के उद्देश्य से व्यापक ‘जीएसटी 2.0’ प्रक्रियागत सुधारों पर विचार कर सकती है। इन प्रस्तावों का मुख्य उद्देश्य पंजीकरण और रिटर्न दाखिल करने को सुलभ बनाना, मुकदमों को कम करना तथा राज्यों के बीच माल की आवाजाही को अधिक सुचारू बनाना है।
1. छोटे ई-कॉमर्स विक्रेताओं को मिलेगी बड़ी राहत
प्रस्ताव के अनुसार, छोटे ई-कॉमर्स विक्रेताओं को उन राज्यों में मंच (Platform) के गोदामों को अपने पंजीकृत व्यावसायिक स्थल के रूप में दर्शाने की अनुमति दी जा सकती है, जहां उनका अपना कोई भौतिक कार्यालय नहीं है।
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विक्रेता की किसी एक राज्य में वास्तविक उपस्थिति अनिवार्य होगी, जहां भौतिक सत्यापन और प्रमाणीकरण पूरा किया जाएगा।
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इसके बाद अन्य राज्यों में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म की सहमति से बिना किसी कर अधिकारी के अतिरिक्त हस्तक्षेप के पंजीकरण मिल सकेगा।
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इस कदम से देश के लगभग 9.5 लाख छोटे विक्रेताओं को बिना हर राज्य में दफ्तर खोले पूरे राष्ट्रीय बाजार तक पहुंच हासिल होगी।
2. निर्दोष खरीदारों के इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) की सुरक्षा
जीएसटी परिषद वास्तविक खरीदारों के इनपुट टैक्स क्रेडिट की रक्षा के लिए एक पारदर्शी नीति पर विचार कर रही है। यदि किसी आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) के पिछले विक्रेता ने कर भुगतान में चूक (Tax Default) की है, तब भी वैध बिल रखने वाले खरीदार का ITC सुरक्षित रहेगा। वसूली की कार्रवाई खरीदार के बजाय चूक करने वाले विक्रेता के खिलाफ की जाएगी।
3. 10,000 रुपये तक के छोटे मामलों में टैक्स नोटिस पर रोक
प्रशासनिक बोझ और मुकदमों की संख्या घटाने के लिए 10,000 रुपये से कम की कर मांग वाले मामलों में जीएसटी नोटिस जारी करने पर रोक लगाने का प्रस्ताव है।
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यह सीमा लंबित मामलों पर भी लागू हो सकती है।
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10,000 रुपये से अधिक की मांग वाले मामलों में भी औपचारिक नोटिस भेजने से पहले करदाता को सूचना देकर जवाब देने का अवसर दिया जाएगा।
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यदि कोई करदाता मुकदमा लड़ने के बजाय विवाद निपटाता है, तो भुगतान की गई राशि को जुर्माने के बजाय ‘प्रभार’ (Charge) कहा जाएगा।
4. जीएसटी पंजीकरण प्रक्रिया का सरलीकरण
जीएसटी पंजीकरण प्रणाली को अधिक सुव्यवस्थित किया जा रहा है ताकि आवेदन पहली बार में ही सही तरीके से पूरा हो सके:
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प्रणाली प्रत्येक चरण में आवेदकों का मार्गदर्शन करेगी और केवल प्रासंगिक खंड ही दिखाएगी।
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आवश्यक दस्तावेजों की उपयुक्त सूची उपलब्ध कराई जाएगी।
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कई राज्यों में एक साथ पंजीकरण के लिए आवेदन करने की सुविधा होगी और व्यवसाय के स्थान के आधार पर संबंधित कर कार्यालय का स्वचालित निर्धारण होगा।
5. पारगमन जांच और लॉजिस्टिक्स में ढील
सीमाओं पर मालवाहक वाहनों को बार-बार रोके जाने की समस्या से निपटने के लिए खुफिया सूचना आधारित जांच व्यवस्था लागू की जा सकती है।
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वाहनों को केवल वरिष्ठ अधिकारी की पूर्व अनुमति से ही रोका जा सकेगा।
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आमतौर पर जांच केवल वही राज्य कर सकेगा जहां से माल रवाना हुआ है। इससे पारगमन समय और माल ढुलाई लागत में कमी आएगी।
6. गिरफ्तारी के नियमों में सुधार और आपराधिक सीमा में बढ़ोतरी
कारोबारियों को बड़ी राहत देते हुए जीएसटी परिषद कर अधिकारियों से सीधे गिरफ्तारी का अधिकार वापस लेने और किसी भी गिरफ्तारी के लिए अदालत की मंजूरी अनिवार्य करने पर विचार कर सकती है।
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अभियोजन (Prosecution) शुरू करने की मौद्रिक सीमा को 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव है।
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वर्गीकरण, मूल्यांकन या ITC से जुड़े सामान्य व्याख्यात्मक विवादों को आपराधिक कार्रवाई के दायरे से बाहर रखा जाएगा।
