वोटर लिस्ट में नाम नहीं जुड़ा? टेंशन खत्म! ECI का बड़ा फैसला, अब घर आएंगे BLO, ऑनलाइन भी होगी सुनवाई
नई दिल्ली, 25 सितंबर 2026
भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने देश भर में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर आम जनता को बड़ी राहत दी है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू की पूर्ण पीठ ने एक बैठक में फैसला लिया है कि अब अगर किसी व्यक्ति को मैपिंग न होने या तकनीकी विसंगतियों के चलते नोटिस मिला है, तो उसे दफ्तरों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं है। अब बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) खुद ऐसे लोगों के घर-घर जाकर दस्तावेज कलेक्ट करेंगे और उन्हें ECINet पर अपलोड करेंगे।
ECI के बड़े फैसले:
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दफ्तर जाने की मजबूरी खत्म: नोटिस पाने वाले लोगों को ERO/AERO कार्यालय बुलाने की जरूरत नहीं होगी। बहुत जरूरी होने पर ही सुनवाई होगी, और प्राथमिकता ऑनलाइन सुनवाई को दी जाएगी।
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परिवार के बुजुर्ग को अधिकार: अगर वोटर खुद उपलब्ध नहीं है, तो वह परिवार के किसी भी बड़े सदस्य को अपनी तरफ से सुनवाई में शामिल होने के लिए अधिकृत कर सकता है।
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कमजोर वर्गों के लिए विशेष कैंप: जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEOs) को निर्देश दिए गए हैं कि वे रैन बसेरों, गरीब, बेघर और मजदूर वर्ग के लोगों के लिए स्पेशल हेल्प डेस्क और कैंप लगाएं।
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दिल्ली और महाराष्ट्र में बढ़ी समय-सीमा:
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दिल्ली: दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की तारीख 30 अक्टूबर और निपटान की तारीख 30 नवंबर तक बढ़ा दी गई है।
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महाराष्ट्र: दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की तारीख 12 अक्टूबर और निपटान की तारीख 10 नवंबर तक बढ़ाई गई है।
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छूट गए वोटर अभी भी जुड़वा सकते हैं नाम: बिहार, पश्चिम बंगाल समेत 20 राज्यों/UTs में SIR पूरा हो चुका है। हालांकि, जिनका नाम छूट गया है या जो नए/युवा वोटर हैं, वे निरंतर अपडेट (Continuous Update) प्रक्रिया के तहत फॉर्म भरकर संबंधित ERO के पास आवेदन कर सकते हैं।
ECINet सिस्टम की होगी समीक्षा
आयोग ने साफ किया कि आईटी सिस्टम की समीक्षा के लिए सीनियर डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर (DEC) की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र समिति बनेगी, जिसमें IIT/IIIT के एक्सपर्ट शामिल होंगे। यह समिति जांचेगी कि ECINet पोर्टल नियमों के अनुरूप काम कर रहा है या नहीं।
शीर्ष अधिकारियों के बीच मतभेद की खबरों पर सफाई
चुनाव आयोग के शीर्ष अधिकारियों के बीच आंतरिक मतभेद की खबरों पर विराम लगाते हुए आयोग ने कहा कि कैबिनेट सचिव को भेजा गया पत्र आयोग की किसी नीति से नहीं, बल्कि प्रतिनियुक्ति पर आए एक अधिकारी के कामकाज से जुड़ा मामला था। आयोग के सभी फैसले पूरी एकजुटता और सर्वसम्मति से लिए जा रहे हैं।
