नई दिल्ली, 03/10/2026
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को अंतरराष्ट्रीय नार्को-टेरर नेटवर्क के खिलाफ एक बड़ी सफलता मिली है। 1000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के ड्रग सिंडिकेट के मुख्य हैंडलर नवप्रीत सिंह उर्फ नव को तुर्किये से डिपोर्ट (प्रत्यर्पित) कर भारत ले आया गया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, नवप्रीत विदेश में बैठकर फर्जी पहचान के सहारे भारत में अपना विशाल ड्रग नेटवर्क चला रहा था। उसने ‘नवाब विर्क’ नाम की फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर तुर्किये की नागरिकता हासिल कर ली थी।
2021 में घिटोरनी से बेनकाब हुआ था 1000 करोड़ का ड्रग सिंडिकेट
इस मामले की शुरुआत साल 2021 में दिल्ली के घिटोरनी इलाके से हुई थी, जब पुलिस ने 1 किलो हेरोइन के साथ रिजवान कश्मीरी को पकड़ा था। जांच की कड़ियां आगे बढ़ीं तो फरीदाबाद से गुरप्रीत सिंह और गुरजोत सिंह की गिरफ्तारी हुई।
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इस पूरे केस में 355 किलो से अधिक हेरोइन बरामद की गई थी, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा आंकी गई।
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जांच में सामने आया कि नवप्रीत और उसके सहयोगियों ने अफगानिस्तान और पाकिस्तान से ड्राई फ्रूट्स के कारोबार की आड़ में नशीले पदार्थों की तस्करी की।
कपूरथला जेल में बनी थी नशे के कारोबार की योजना
जांच एजेंसियों के मुताबिक, आरोपी नवप्रीत सिंह और गुरप्रीत सिंह की मुलाकात पंजाब की कपूरथला जेल में हुई थी। दोनों अलग-अलग एनडीपीएस (NDPS) मामलों में बंद थे। जेल से बाहर आने के बाद दोनों ने हाथ मिलाया और नवप्रीत विदेश भागकर वहां से पूरे नेटवर्क को निर्देश देने लगा।
नार्को-टेरर और पाकिस्तानी कनेक्शन के सबूत
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विदेशी मुद्रा और संदिग्ध नंबर: नवप्रीत के पास से कई देशों की विदेशी मुद्रा (जिसमें पाकिस्तानी करेंसी भी शामिल है) और पाकिस्तान-अफगानिस्तान के कई संदिग्ध फोन नंबर मिले हैं।
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टेरर फंडिंग का एंगल: जांच एजेंसियों को सबूत मिले हैं कि ड्रग्स की बिक्री से कमाए गए पैसों का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए किया जा रहा था।
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अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क: इस मामले में अब तक 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिसमें एक अफगान नागरिक हजरत अली भी शामिल है। इससे पहले, नवप्रीत के खास गुर्गे प्रभदीप सिंह उर्फ हैरी को मई 2026 में अजरबैजान (बाकू) से प्रत्यर्पित कर भारत लाया गया था।
नार्को-कार्टेल पर केंद्र सरकार का कड़ा रुख
केन्द्रीय गृह मंत्रालय द्वारा अंतरराष्ट्रीय नार्को-कार्टेल को खत्म करने के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत यह एक बड़ी कामयाबी मानी जा रही है। तुर्किये से नवप्रीत की डिपोर्टेशन के बाद अब भारतीय एजेंसियां उससे पूछताछ कर यह पता लगा रही हैं कि भारत में इस सिंडिकेट के तार किन-किन सफेदपोशों या हवाला ऑपरेटरों से जुड़े हैं।

