किसान आंदोलन 2.0: मनरेगा की बहाली को लेकर दिल्ली में जुटा SKM, 26 नवंबर से राज्यस्तरीय आंदोलन का बड़ा ऐलान
नई दिल्ली, 26 सितंबर 2026
देश में कृषि और ग्रामीण रोजगार संकट को लेकर किसान संगठनों और खेतिहर मजदूरों के संघों ने एकजुट होकर एक बार फिर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। दिल्ली में आयोजित संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) और ग्रामीण मजदूर यूनियनों की समन्वय बैठक में ‘मनरेगा (MGNREGA)’ को फिर से पूरी तरह लागू करने और मजबूत करने की मांग को लेकर राष्ट्रव्यापी आंदोलन तेज करने का फैसला किया गया है। बैठक में किसान नेताओं ने दावा किया कि नए लागू हुए ‘विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम’ (VB-G RAM G Act) के कारण ग्रामीण रोजगार के अवसरों में भारी गिरावट आई है। इसके साथ ही 26 नवंबर से पूरे देश में राज्यस्तरीय आंदोलनों की घोषणा की गई है।
काम के दिनों में 9.56 करोड़ पर्सन-डे की भारी कमी
ग्रामीण विकास मंत्रालय के डैशबोर्ड डेटा का हवाला देते हुए SKM समन्वय परिषद के सदस्य पी. कृष्ण प्रसाद ने बताया कि मनरेगा के आंकड़ों में भारी गिरावट दर्ज की गई है:
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जुलाई-अगस्त 2025: मनरेगा के तहत 29.77 करोड़ पर्सन-डे (Person-days) काम मिला था।
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जुलाई-अगस्त 2026: नए अधिनियम के तहत यह आंकड़ा घटकर मात्र 20.21 करोड़ पर्सन-डे रह गया।
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गिरावट: दो महीनों में रोजगार के दिनों में 9.56 करोड़ पर्सन-डे (28.51% की कमी) दर्ज की गई।
किसान नेताओं का कहना है कि जहां मनरेगा में हर ग्रामीण परिवार को 100 दिन के काम की कानूनी गारंटी थी (जिसमें औसतन 45 से 52 दिन का काम ही मिल पाता था), वहीं नए बदलावों से ग्रामीण मजदूरों के हाथ से बचा-खुचा रोजगार भी छिन रहा है।
सूखे के संकट के बीच रोजगार का एकमात्र सहारा मनरेगा
बैठक में इस बात पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई कि महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, तमिलनाडु और दक्षिण भारत के कई राज्य भीषण सूखे की चपेट में हैं। संकट के इस समय में मनरेगा ग्रामीण परिवारों के जीवनयापन का सबसे बड़ा सहारा है, जिससे देश के 9 करोड़ से अधिक लाभार्थी सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं।
SKM के सदस्य अविक साहा ने स्पष्ट किया कि कृषि संकट केवल किसानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर खेतिहर मजदूरों पर भी पड़ रहा है। इसी समझ के साथ दोनों वर्ग अब एक मंच पर आकर साझे आंदोलन की रणनीति तैयार कर रहे हैं।
किसान संगठनों की मुख्य मांगें:
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मनरेगा की पूर्ण बहाली: मनरेगा को पुनः लागू किया जाए और पर्याप्त वित्तीय बजट आबंटित किया जाए।
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MSP की कानूनी गारंटी: C2+50% (लागत का डेढ़ गुना) फॉर्मूले पर सभी फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानूनी और पक्की खरीद की गारंटी का कानून।
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कर्ज माफी: देश के सभी किसानों का कृषि कर्ज पूरी तरह माफ किया जाए।
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पीड़ित परिवारों को मुआवजा: आत्महत्या करने वाले किसानों और दिहाड़ी मजदूरों के परिवारों को ₹25 लाख का मुआवजा दिया जाए।
