नई दिल्ली, 29/04/2026
आम आदमी पार्टी का महात्मा गांधी की समाधी ‘राजघाट’ से पुराना नाता रहा है. पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल जब-जब मुसीबत में फंसे या खुशी का माहौल हुआ तो उन्होंने राजघाट जाकर महात्मा गांधी को नमन जरूर किया है. एक बार फिर केजरीवाल सत्याग्रह की तैयारी कर आज राजघाट पहुंचे और बापू को श्रद्धांजलि दी. इतना ही नहीं केजरीवाल ने गांधीवादी सिद्धांतों के अनुसार शांतिपूर्ण विरोध जारी रखने का संकल्प लिया.
सत्याग्रह की राह पर केजरीवाल
अरविंद केजरीवाल के बयान से साफ है कि आम आदमी पार्टी आने वाले दिनों में किसी बड़े आंदोलन या सत्याग्रह की तैयारी में है. पार्टी का कहना है कि यह पत्र उन कानूनी व प्रशासनिक चुनौतियों से जुड़ा हो सकता है, जिनका सामना वर्तमान में पार्टी नेतृत्व कर रहा है. राजघाट पर केजरीवाल की उपस्थिति ने एक बार फिर यह संदेश देने की कोशिश की है कि वे गांधीवादी मूल्यों व सत्य की लड़ाई को आगे बढ़ाएंगे.
कब-कब बापू की शरण में राजघाट पहुंचे केजरीवाल
केजरीवाल के राजनीतिक सफर में राजघाट हमेशा एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा है. संकट का समय हो या जीत का जश्न वे अक्सर गांधी जी का आशीर्वाद लेने पहुंचते रहे हैं.
आंदोलन की शुरुआत (2011-12)
इंडिया अगेंस्ट करप्शन के दिनों में अन्ना हजारे के साथ केजरीवाल कई बार राजघाट पहुंचे थे. राजनीति में कदम रखने से पहले उन्होंने यहीं शुचिता की कसम खाई थी.
शपथ ग्रहण समारोह (2013, 2015, 2020)
दिल्ली का मुख्यमंत्री बनने से पहले व शपथ लेने के बाद केजरीवाल की परंपरा रही है कि वे राजघाट जाकर महात्मा गांधी को पुष्पांजलि अर्पित करते हैं.
सीबीआई व ईडी पूछताछ से पहले
आबकारी नीति मामले में जब भी उन्हें या मनीष सिसोदिया को जांच एजेंसियों ने समन किया, पूछताछ के लिए जाने से पहले उन्होंने राजघाट जाकर शांति व शक्ति की प्रार्थना की.
जेल से रिहाई के बाद (सितंबर 2024)
तिहाड़ जेल से अंतरिम जमानत व फिर नियमित जमानत मिलने के बाद भी केजरीवाल राजघाट पहुंचे थे. जमानत को उन्होंने ‘सत्य की जीत’ करार दिया था.
दरअसल, हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच केजरीवाल का यह दौरा काफी अहम माना जा रहा है. राजघाट पर बापू की समाधि पर नमन करने के बाद मीडिया से बातचीत में केजरीवाल ने न्यायपालिका के प्रति अपना सम्मान व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि आज हम जो आजाद घूम रहे हैं, वह देश की न्यायप्रणाली की वजह से ही संभव हो पाया है. इसी न्यायप्रणाली ने हमें जमानत दी और आरोपों से मुक्त होने की राह दिखाई. हमें देश की अदालतों पर पूरा भरोसा है.
केजरीवाल ने कहा, ”जज साहिबा को एक पत्र लिखा है. कुछ ऐसी परिस्थितियां पैदा हुई हैं, जिनकी वजह से हमें सत्याग्रह का रास्ता चुनना पड़ रहा है. मैंने जज साहिबा को जो चिट्ठी लिखी है, उसमें पूरी स्थिति बयां कर दी है. चूंकि यह मामला बेहद संवेदनशील है, इसलिए मैं अभी मीडिया के सामने इस पर अधिक विस्तार से कुछ नहीं कह सकता.”
बता दें कि अरविंद केजरीवाल की यह यात्रा न सिर्फ उनके आध्यात्मिक विश्वास को दर्शाती है, बल्कि आने वाले चुनावी व कानूनी संघर्षों के लिए एक ‘नैतिक मोर्चा’ तैयार करने की कोशिश भी मानी जा रही है. अब सबकी नजरें उस संवेदनशील चिट्ठी पर टिकी हैं, जो जज को केजरीवाल ने लिखा है. केजरीवाल के साथ राजघाट पर दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, पार्टी के कई विधायक, पार्षद व दर्जनों कार्यकर्ता मौजूद रहे.
