नई दिल्ली, 03/11/2026
भारत निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी मतदाता का नाम विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान प्रकाशित ड्राफ्ट मतदाता सूची में नहीं है, तो उसे अंतिम मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए फॉर्म-6 जमा करना होगा। यह नियम उन मतदाताओं पर भी लागू होगा, जिनका नाम पहले मतदाता सूची में दर्ज रह चुका है।
चुनाव आयोग ने मंगलवार को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEO) को पत्र लिखकर इस संबंध में स्थिति स्पष्ट की। आयोग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र मतदाता तकनीकी या कानूनी भ्रम के कारण मतदान के अधिकार से वंचित न रहे।
आयोग के मुताबिक, कुछ मतदाता फॉर्म-6 जमा करने से इसलिए हिचकिचा रहे हैं क्योंकि इसमें घोषणा करनी होती है कि उनका नाम पहली बार मतदाता सूची में शामिल किया जा रहा है। उन्हें आशंका है कि पहले से पंजीकृत होने के बावजूद ऐसा फॉर्म भरना गलत घोषणा माना जा सकता है और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत कार्रवाई हो सकती है।
इस पर चुनाव आयोग ने साफ किया कि फॉर्म-6 में दी जाने वाली घोषणा 1 अगस्त 2022 से लागू है। यदि किसी पात्र मतदाता का नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं है, तो वह SIR प्रक्रिया के दौरान या उसके बाद फॉर्म-6 के माध्यम से दोबारा नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकता है। केवल पहले से मतदाता के रूप में पंजीकृत होने के आधार पर इसे गलत घोषणा नहीं माना जाएगा।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि संबंधित मतदाता किसी अन्य संसदीय या विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में पहले से पंजीकृत नहीं है और उसकी घोषणा सही है, तो ERO केवल पुराने पंजीकरण के आधार पर उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं करेगा। मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को इस स्पष्टीकरण का स्थानीय भाषाओं और उपलब्ध मीडिया माध्यमों से व्यापक प्रचार करने के निर्देश दिए गए हैं।
