बेंगलुरु, 03/11/2026
नकली जीवन रक्षक दवाओं के निर्माण, रीपैकेजिंग और बिक्री से जुड़े कथित रैकेट के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने बेंगलुरु में पांच ठिकानों पर छापेमारी कर आरोपी वीरेश कुमार के बैंक खातों में जमा करीब 9 लाख रुपये फ्रीज कर दिए हैं। इस दौरान कई डिजिटल उपकरण, आपत्तिजनक दस्तावेज और अन्य महत्वपूर्ण सबूत भी जब्त किए गए। ED ने यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत दर्ज मामले में की है। एजेंसी का उद्देश्य कथित नकली दवाओं के कारोबार से हुई अवैध कमाई और उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन का पता लगाना है।
ED के मुताबिक, जांच में आर. प्रशांत को इस कथित रैकेट का मुख्य संचालक पाया गया है। आरोप है कि वह बिदादी के पास एक फार्महाउस में घटिया गुणवत्ता वाली दवाओं की रीपैकेजिंग करवाता था। ये दवाएं विभिन्न राज्यों से कम कीमत पर खरीदी जाती थीं। इसके बाद उन्हें नई बोतलों में भरकर महंगी दवाओं, जैसे फाइजर के एंटीबायोटिक्स ‘ज़ाविसेफ़्टा’ और ‘एम्बलेवियो’ के नकली लेबल के साथ बाजार में बेचा जाता था।
जांच एजेंसी के अनुसार, शुरुआत में इन दवाओं की आपूर्ति ‘डीएम फार्मास्युटिकल्स’ के माध्यम से की गई। बाद में इन्हें ‘कृपा हेल्थकेयर’ को सप्लाई किया गया। आरोप है कि वहां नकली दवाओं को असली दवाओं के साथ मिलाकर विभिन्न मेडिकल स्टोर और अस्पतालों तक पहुंचाया गया। यह मामला 18 अगस्त को सामने आया था, जब खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण विभाग के अधिकारियों ने बेंगलुरु दक्षिण जिले के बिदादी और दोद्देरी इलाकों में फार्महाउसों तथा अनधिकृत पैकेजिंग यूनिट्स पर छापेमारी की थी। उस दौरान नामी दवा कंपनियों के लेबल लगी नकली दवाएं और पैकेजिंग सामग्री बरामद हुई थी। जब्त सामग्री की अनुमानित कीमत 4.5 करोड़ से 5 करोड़ रुपये के बीच बताई गई थी।
प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ था कि गंभीर बीमारियों के इलाज और अस्पतालों की इंटेंसिव केयर यूनिट (ICU) में इस्तेमाल होने वाली महंगी जीवन रक्षक दवाओं के नकली संस्करण तैयार किए जा रहे थे। आरोप है कि इन्हें बाजार और अस्पतालों में करीब 50 प्रतिशत तक की छूट पर बेचा जा रहा था। इसी कथित अवैध कारोबार से अर्जित धन को इधर-उधर ट्रांसफर करने के आरोपों के बाद ED ने अलग से मनी लॉन्ड्रिंग जांच शुरू की। एजेंसी अब जब्त दस्तावेजों और डिजिटल सबूतों के आधार पर नेटवर्क से जुड़े लोगों तथा वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही है।
