पटियाला, 17/10/2026
पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) ने वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए की गई अपनी नवीन पहलों के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता हासिल की है। मिशन क्लीन पटियाला और पटियाला के एक श्मशानघाट में वायु प्रदूषण नियंत्रण उपकरण (एपीसीडी) की स्थापना को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी), 2026 के तहत जारी किए गए ‘सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों’ के संकलन में शामिल किया गया है। इसके अतिरिक्त, मंडी गोबिंदगढ़ का गैस आधारित श्मशानघाट और गोबिंदगढ़ का बायो-मीथेनेशन प्लांट भी पंजाब की सर्वोत्तम पहलों में शामिल हैं। यह मान्यता वायु प्रदूषण के विभिन्न स्रोतों से निपटने के लिए पंजाब द्वारा किए जा रहे प्रयासों को उजागर करती है। इनमें जनभागीदारी, प्रौद्योगिकी आधारित समाधान और टिकाऊ अपशिष्ट प्रबंधन शामिल हैं। ये पहलें दर्शाती हैं कि स्थानीय स्तर पर की गई कार्रवाई, संस्थागत सहयोग और व्यावहारिक समाधान देश में स्वच्छ वायु के व्यापक लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
मिशन क्लीन पटियाला: स्वच्छ वातावरण को जन आंदोलन बनाना
पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जिला प्रशासन और नगर निगम, पटियाला के सहयोग से शुरू किए गए तथा सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ साइंस, टेक्नोलॉजी एंड पॉलिसी (सीएसटीईपी) के सहयोग से परिकल्पित मिशन क्लीन पटियाला ने शैक्षणिक संस्थानों, सरकारी विभागों, संगठनों और नागरिकों को शहरी स्वच्छता में सुधार लाने तथा पर्यावरण संरक्षण में सामुदायिक भागीदारी को मजबूत करने के लिए एकजुट किया है।
नियमित सड़क सफाई अभियानों के माध्यम से यह पहल जमा हुए कचरे को हटाने, खुले में कचरा जलाने पर रोक लगाने और जिम्मेदार अपशिष्ट प्रबंधन को प्रोत्साहित करने पर ध्यान केंद्रित करती है। विद्यार्थियों, सरकारी एजेंसियों और स्थानीय समुदायों को साथ जोड़कर यह अभियान स्वच्छता को किसी एक अवसर तक सीमित रखने के बजाय इसे नागरिकों की निरंतर आदत बनाने का प्रयास करता है।
यह पहल ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और वायु गुणवत्ता के बीच संबंध को भी मजबूत करती है। कचरे के जमाव और खुले में कचरा जलाने पर रोक लगाने से पार्टिकुलेट मैटर तथा अन्य हानिकारक प्रदूषकों के उत्सर्जन को कम करने में मदद मिल सकती है।
स्वच्छ पारंपरिक अंतिम संस्कार के लिए प्रौद्योगिकी
पटियाला के एक पारंपरिक लकड़ी आधारित श्मशानघाट में वायु प्रदूषण नियंत्रण उपकरण की स्थापना धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का सम्मान करते हुए हवा में फैलने वाले कणीय प्रदूषण को कम करने का प्रयास है। राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) के तहत पायलट परियोजना के रूप में लागू की गई यह पहल पारंपरिक अंतिम संस्कार के दौरान उत्पन्न होने वाले कणीय प्रदूषण को कम करने के लिए तैयार की गई है।
यह पहल दर्शाती है कि प्रौद्योगिकी आधारित समाधान मौजूदा परंपराओं के साथ तालमेल बनाकर, समुदाय की धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं की अनदेखी किए बिना, स्वच्छ वायु के लक्ष्य में योगदान दे सकते हैं।
गोबिंदगढ़ में स्वच्छ अंतिम संस्कार और जैविक कचरा प्रबंधन
मंडी गोबिंदगढ़ में गैस आधारित श्मशानघाटों को शामिल किया जाना पारंपरिक लकड़ी आधारित अंतिम संस्कार पर निर्भरता कम करने और इससे जुड़े प्रदूषण को घटाने की दिशा में एक वैकल्पिक दृष्टिकोण को दर्शाता है। गोबिंदगढ़ का बायो-मीथेनेशन प्लांट टिकाऊ शहरी पर्यावरण प्रबंधन का एक उदाहरण है। यह जैविक कचरे का प्रसंस्करण करके बायोगैस के उत्पादन में मदद करता है। इससे उपयुक्त कचरे को पारंपरिक निपटान विधियों से हटाकर संसाधनों के पुनः उपयोग को बढ़ावा दिया जाता है। प्रभावी कचरा पृथक्करण और प्लांट के सुचारू संचालन से ऐसी सुविधाएं बेहतर अपशिष्ट प्रबंधन तथा पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करने में योगदान दे सकती हैं।
ये सभी पहलें मिलकर दर्शाती हैं कि वायु प्रदूषण से निपटने के लिए विभिन्न स्तरों पर काम करने की आवश्यकता है। इसमें स्वच्छ प्रौद्योगिकी, अपशिष्ट प्रबंधन, जनभागीदारी और प्रदूषण को उसके स्रोत पर ही रोकने जैसे कदम शामिल हैं। ये पहलें प्रौद्योगिकी आधारित समाधानों को मौजूदा परंपराओं के साथ जोड़कर स्वच्छ वायु के लिए काम करने का एक मॉडल प्रस्तुत करती हैं। इनके प्रदर्शन के मूल्यांकन और स्थानीय आवश्यकताओं के आधार पर इन्हें अन्य शहरों में भी अपनाया जा सकता है।
स्वच्छ वायु के राष्ट्रीय मिशन में पंजाब का योगदान
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) के ‘सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों’ के संकलन में इन पहलों को शामिल किया जाना स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप समाधान विकसित करने के महत्व को उजागर करता है। ये पहलें देश के अन्य हिस्सों में भी पर्यावरण संरक्षण के लिए मार्गदर्शन प्रदान कर सकती हैं। यह मान्यता प्रौद्योगिकी आधारित हस्तक्षेपों को जनभागीदारी और निरंतर कार्रवाई के साथ जोड़ने के महत्व को भी दर्शाती है।
पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की चेयरपर्सन रीना गुप्ता ने कहा, “पंजाब की स्वच्छ वायु संबंधी पहलों को राष्ट्रीय स्तर पर मिली मान्यता हमारे इस विश्वास को और मजबूत करती है कि टिकाऊ पर्यावरणीय बदलाव वैज्ञानिक समाधानों और जनभागीदारी को एक साथ लाने से ही संभव हैं। मिशन क्लीन पटियाला के माध्यम से स्वच्छता को साझा नागरिक जिम्मेदारी बनाने से लेकर पारंपरिक श्मशानघाटों में प्रदूषण नियंत्रण प्रौद्योगिकी के उपयोग तक, हमारा ध्यान प्रदूषण को उसके स्रोत पर ही रोकने और ऐसे मॉडल विकसित करने पर है, जिन्हें पूरे पंजाब में लागू किया जा सके। हमारा लक्ष्य ‘रंगला पंजाब’ के सपने को साकार करना है—एक ऐसा पंजाब, जिसकी पहचान स्वच्छ वायु, स्वस्थ समुदायों और टिकाऊ विकास से हो। हम नवाचार, सहयोग और पर्यावरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धताओं को लोगों के जीवन में वास्तविक सुधारों में बदलने के लिए निरंतर काम करते रहेंगे।”
