supreme court
नई दिल्ली, 09/10/2026
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते यौन अपराधों पर कड़ा संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस और प्रशासन को सुरक्षा व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त करने के लिए कई कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं. अदालत ने शैक्षणिक संस्थानों के आसपास पुलिस गश्त (पेट्रोलिंग) बढ़ाने, सार्वजनिक व ऐप-आधारित कैब चालकों की सख्त पृष्ठभूमि जांच, वाहनों की रियल-टाइम ट्रैकिंग व एसओएस प्रणाली की निगरानी और अवैध रूप से चल रही शराब की दुकानों पर तुरंत कार्रवाई करने का आदेश दिया है. हाल के दिनों में सामने आईं बलात्कार की घटनाओं के बाद उच्चतम न्यायालय ने इस मामले में स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लिया था. सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने कोर्ट को अवगत कराया कि सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं की सुरक्षा और छेड़छाड़ रोकने के लिए जिला स्तर पर विशेष ‘शिष्टाचार स्क्वॉड’ (एंटी-ईव-टीजिंग स्क्वॉड) का गठन किया गया है.
कागजी आदेशों से परे दिखे व्यावहारिक असर: शीर्ष अदालत
जस्टिस जे. बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने दिल्ली पुलिस के वर्तमान सुरक्षा ढांचे और निवारक पुलिसिंग पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की. पीठ ने कहा कि किसी सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता कागजी आदेशों की संख्या से नहीं, बल्कि ज़मीन पर पुलिस की मौजूदगी, समय पर हस्तक्षेप और आम नागरिकों में सुरक्षा की भावना से तय होती है. जस्टिस जे. बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने अपने आदेश में कहा:
“मौजूदा प्रोटोकॉल और दिशा-निर्देशों के बावजूद ऐसी घटनाओं का बार-बार दोहराया जाना गंभीर चिंता पैदा करता है. इससे यह सवाल उठता है कि क्या इन निर्देशों को आवश्यक निरंतरता, उचित पर्यवेक्षण और जवाबदेही के साथ धरातल पर लागू किया भी जा रहा है या नहीं.”
सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख दिशा-निर्देश
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संवेदनशील क्षेत्रों और शैक्षणिक संस्थानों में पेट्रोलिंग: पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCT) दिल्ली में स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय और कोचिंग संस्थानों के आसपास तुरंत प्रभाव से गश्त बढ़ाई जाए. साथ ही ‘वल्नरेबिलिटी मैपिंग’ (अतिसंवेदनशील क्षेत्रों की पहचान) के तहत चिह्नित हॉटस्पॉट्स पर विशेष निगरानी रखी जाए.
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चालकों और सहायकों का सख्त सत्यापन: सरकारी व निजी बसों, टैक्सियों, ऑटो-रिक्शा और ओला, उबर, रैपिडो जैसे ऐप-आधारित एग्रीगेटर्स से जुड़े चालकों एवं सहायकों की गहन पृष्ठभूमि जांच की जाए. केवल विधिवत पंजीकृत और सत्यापित व्यक्तियों को ही वाहन चलाने की अनुमति होगी.
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अवैध शराब बिक्री पर नकेल: बिना वैध लाइसेंस के चल रहे अहातों, शराब के ठेकों और ऐसे ढाबों/रेस्तरां की पहचान कर कानूनी कार्रवाई की जाए, जहाँ अवैध रूप से शराब परोसी जा रही है. बीट अधिकारियों को इस संबंध में अपने वरिष्ठ अधिकारियों को रिपोर्ट करने के निर्देश दिए गए हैं.
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कानूनी निष्पक्षता और नागरिक अधिकार: अदालत ने स्पष्ट किया कि पुलिस का हस्तक्षेप सख्त होने के साथ-साथ कानून के दायरे में, तर्कसंगत और जवाबदेह होना चाहिए. नागरिकों का विश्वास तभी बहाल हो सकता है जब वे अपराध के साथ-साथ राज्य की शक्तियों के दुरुपयोग से भी सुरक्षित महसूस करें.
आगे की कानूनी कार्यवाही
शीर्ष अदालत ने निर्देश दिया कि ‘शिष्टाचार स्क्वॉड’ के कर्मचारियों के लिए तैयार किए गए विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल को रिकॉर्ड पर रखा जाए. दिल्ली पुलिस की रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) शाखा को इस प्रशिक्षण मॉड्यूल की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करने का काम सौंपा गया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कर्मी संवेदनशील परिस्थितियों से निपटने और पीड़ितों की सहायता के लिए पूरी तरह सक्षम हैं. मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) और दिल्ली परिवहन विभाग को नोटिस जारी किया है. अदालत ने दिल्ली सरकार को इन सभी निर्देशों के अनुपालन में एक विस्तृत हलफनामा (Compliance Affidavit) दाखिल करने का निर्देश दिया है. इस मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर को तय की गई है.
