starlink elon musk
नई दिल्ली, 09/10/2026
अमेरिकी उद्योगपति और स्पेसएक्स (SpaceX) के प्रमुख एलोन मस्क तथा भारत सरकार के बीच स्टारलिंक (Starlink) की सैटकॉम सेवाओं को लेकर विवाद और गहरा गया है. मस्क ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर तीखा रुख अपनाते हुए भारत में लाइसेंस प्रक्रिया में हो रही देरी पर सवाल उठाए. मस्क ने पूछा, “क्या अंबानी भारत के असली बॉस हैं?” उन्होंने आगे लिखा कि 165 से अधिक देशों में लाइसेंस प्राप्त करने और भारत सरकार के सभी नियमों का पूर्ण पालन करने के बाद भी स्टारलिंक को पिछले पांच वर्षों से अंतिम मंजूरी नहीं मिल सकी है.
यह टिप्पणी दूरसंचार मंत्रालय के उस बयान के बाद आई है, जिसमें सरकार ने स्टारलिंक की सेवाओं को जानबूझकर रोके जाने के आरोपों को खारिज किया था. सरकार ने स्पष्ट किया था कि किसी भी विदेशी या घरेलू सैटेलाइट संचार सेवा प्रदाता के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा जांच और नियमों का कड़ाई से अनुपालन अनिवार्य शर्त है.
विवाद का कारण और वर्तमान स्थिति
स्पेसएक्स की सैटेलाइट ब्रॉडबैंड शाखा ‘स्टारलिंक’ भारतीय बाजार में प्रवेश के लिए लंबे समय से प्रयास कर रही है. कंपनी को जून 2025 में जीएमपीसीएस (GMPCS) लाइसेंस और जुलाई 2025 में भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) से प्रारंभिक मंजूरी प्राप्त हो चुकी है.
कंपनी ने भारतीय नियामक दिशा-निर्देशों के अनुरूप देश में 20 गेटवे साइट्स स्थापित की हैं और सैकड़ों एंटेना का बुनियादी ढांचा तैयार किया है. स्पेसएक्स में स्टारलिंक बिजनेस ऑपरेशंस की उपाध्यक्ष लॉरेन ड्रायर के अनुसार, भारतीय उपयोगकर्ताओं का डेटा देश की सीमाओं के भीतर ही सुरक्षित रखने के लिए विशेष कंट्रोल मैकेनिज्म भी विकसित किए गए हैं. हालांकि, अंतिम व्यावसायिक परिचालन शुरू करने के लिए सुरक्षा मूल्यांकन (Security Assessment), एफडीआई (FDI) मंजूरी और स्पेक्ट्रम आवंटन की प्रक्रियाएं अभी लंबित हैं.
सरकार का रुख
दूरसंचार मंत्रालय ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि केवल स्टारलिंक ही नहीं, बल्कि भारती समूह समर्थित यूटेलसैट वनवेब (Eutelsat OneWeb) और रिलायंस जियो की जियो सैटकॉम (Jio Satcom) सहित तीनों लाइसेंस धारकों की सुरक्षा समीक्षा जारी है. इंडिया मोबाइल कांग्रेस के दौरान संचार राज्य मंत्री चंद्रशेखर पेम्मासानी ने कहा:
“दूरसंचार विभाग ने सभी सैटकॉम कंपनियों को अंतरिम स्पेक्ट्रम और लाइसेंस जारी कर दिए हैं. वर्तमान में यह फाइल गृह मंत्रालय (MHA) के पास सुरक्षा मंजूरी के लिए लंबित है. गृह मंत्रालय से अनुमति मिलते ही आगे की प्रक्रिया पूरी होगी. यह व्यवस्था किसी एक विशेष कंपनी के लिए नहीं, बल्कि सभी पर समान रूप से लागू होती है.”
मस्क ने हालिया पोस्ट्स में मणिपुर हिंसा के दौरान स्टारलिंक का उपयोग किए जाने संबंधी खबरों का भी खंडन किया. उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत क्षेत्र के ऊपर स्टारलिंक की सैटेलाइट बीम्स बंद थीं, जिससे वहां इसके इस्तेमाल की कोई संभावना ही नहीं थी. मस्क ने जोर देकर कहा कि स्टारलिंक भारत के ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में किफायती व उच्च गति इंटरनेट सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है.
उद्योग जगत की प्रतिक्रिया
भारत का दूरसंचार बाजार मुख्य रूप से रिलायंस जियो, भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया के पास है. सैटेलाइट ब्रॉडबैंड क्षेत्र भविष्य में एक बड़ा व्यावसायिक अवसर माना जा रहा है.
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सुनील भारती मित्तल (अध्यक्ष, भारती एयरटेल): मस्क के एकाधिकार संबंधी दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए सुनील मित्तल ने कहा कि उनकी अपनी सैटेलाइट कंपनी ‘वनवेब’ भी सरकार की अंतिम सुरक्षा और नियामक मंजूरियों की प्रतीक्षा कर रही है.
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आकाश अंबानी (प्रबंध निदेशक, जियो प्लेटफॉर्म्स): मस्क द्वारा लगाए गए आरोपों पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए आकाश अंबानी ने कहा कि उन्होंने अभी तक मस्क के बयानों को देखा नहीं है.
फिलहाल, मामले की चाबी गृह मंत्रालय के पास है. सुरक्षा समीक्षा पूरी होने और हरी झंडी मिलने के बाद ही भारत में वाणिज्यिक सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं की शुरुआत संभव हो सकेगी.
