Livelihood crisis for tandoor operators in Chandigarh.
चंडीगढ़,16सितंबर 2026
चंडीगढ़ में तंदूर पर रोक से कारोबारियों का पुश्तैनी रोजगार प्रभावित हुआ है. कारोबारियों ने प्रशासन से वैकल्पिक स्थान और काम शुरू कराने की मांग
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद चंडीगढ़ में जमीन पर तंदूर लगाने का काम बंद होने से इस कारोबार से जुड़े परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है. लंबे समय से तंदूर के जरिए परिवार चलाने वाले 18 कारोबारियों का कहना है कि वे अदालत के आदेश का पालन करना चाहते हैं, लेकिन प्रशासन उनके लिए रोजगार का वैकल्पिक रास्ता निकाले| तंदूर कारोबारियों के मुताबिक उनका यह काम कई पीढ़ियों से चला आ रहा है. जमीन पर तंदूर लगाकर वे रोटी और अन्य खाद्य सामग्री तैयार करते थे. शादी-ब्याह, समारोह और अन्य आयोजनों के दौरान भी उनके काम की मांग रहती थी. कारोबार बंद होने से नियमित आमदनी का प्रमुख जरिया प्रभावित हुआ है| कारोबारियों का कहना है कि तंदूर बंद होने के बाद घर का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है. कई लोगों ने कारोबार के लिए तंदूर और अन्य सामान में निवेश किया था, जो अब इस्तेमाल नहीं हो पा रहा. उनका कहना है कि अचानक काम रुकने से आर्थिक नुकसान भी हुआ है और परिवार की जिम्मेदारियां पहले की तरह बनी हुई हैं.
निर्धारित जगह देने की मांग: तंदूर एसोसिएशन के सदस्य ने कहा कि, “हमारी प्रशासन से मांग की है कि यदि मौजूदा नियमों के तहत जमीन पर तंदूर लगाने की अनुमति संभव नहीं है तो हमारे लिए निर्धारित स्थान उपलब्ध कराया जाए. इससे अदालत के आदेश का पालन भी होगा और वर्षों से इस काम से जुड़े परिवारों को रोजगार भी मिल सकेगा. हम किसी नियम की अनदेखी नहीं करना चाहते. हमारी मांग सिर्फ इतनी है कि प्रशासन ऐसा व्यावहारिक रास्ता निकाले, जिससे अदालत के आदेश का पालन करते हुए हमारा रोजगार भी चल सके. प्रशासन को हमारी स्थिति पर विचार करना चाहिए.”
