(Patarkar Desk),पंचकूला-हरियाणा के विभिन्न सरकारी विभागों और संस्थानों से जुड़े करीब 504 करोड़ रुपये के IDFC First Bank घोटाले में तीन IAS अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। पूर्व IAS अधिकारी डॉ. साकेत कुमार, विनीत गर्ग और मोहम्मद शाइन के खिलाफ CBI ने जांच के दौरान महत्वपूर्ण सबूत जुटाने का दावा किया है। ऐसे में तीनों की गिरफ्तारी की संभावना जताई जा रही है।
CBI के अनुसार, अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने निर्धारित सरकारी नियमों की अनदेखी करते हुए IDFC First Bank में सरकारी खातों को खुलवाने और तय सीमा से अधिक धनराशि जमा कराने में भूमिका निभाई। मामला चंडीगढ़ के सेक्टर-32 स्थित बैंक शाखा से भी जुड़ा है।
50 करोड़ की सीमा के बावजूद जमा हुई अधिक रकम
सरकारी धन को किसी एक बैंक में केंद्रित करने के लिए वित्त विभाग ने 50 करोड़ रुपये की सीमा निर्धारित की थी। आरोप है कि इसके बावजूद IDFC First Bank के खातों में इससे कहीं अधिक सरकारी राशि जमा कराई गई।
इस मामले में IAS अधिकारी प्रदीप कुमार, राम कुमार सिंह और पंकज अग्रवाल पहले से जेल में हैं।
हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि जिन अधिकारियों को CBI ने जांच के दौरान गिरफ्तार नहीं किया और बाद में उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल हुई, उन्हें अदालत से जमानत मिलने की संभावना अपेक्षाकृत अधिक हो सकती है।
विनीत गर्ग पर क्या है आरोप?
CBI की जांच के मुताबिक, पूर्व IAS अधिकारी विनीत गर्ग की भूमिका हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) के IDFC First Bank में खाते खुलवाने से जुड़ी रही।
जांच एजेंसी का आरोप है कि वित्त विभाग की 50 करोड़ रुपये की निर्धारित सीमा के बावजूद विनीत गर्ग ने तत्कालीन अधिकारी प्रदीप कुमार के साथ मिलकर बैंक में सरकारी धनराशि केंद्रित करना जारी रखा।
मोहम्मद शाइन की भूमिका भी जांच के घेरे में
CBI ने IAS अधिकारी मोहम्मद शाइन की भूमिका को भी जांच में शामिल किया है। एजेंसी के अनुसार, हरियाणा पावर जेनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPGCL) के प्रबंध निदेशक रहते हुए उनके कार्यकाल में IDFC First Bank में 50 करोड़ रुपये जमा कराने में कथित भूमिका रही।
अब CBI की जांच में सामने आए साक्ष्यों के आधार पर इन अधिकारियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की संभावना बढ़ गई है।
