Junior National Athletics Championships
पानीपत,02/11/2026
हरियाणा के पानीपत जिले के गांव बबैल के 16 वर्षीय एथलीट शौर्य ग्रोवर ने अपनी शानदार प्रतिभा और मेहनत के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का नाम रोशन किया है। चेन्नई में आयोजित 41वीं जूनियर नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप-2026 में शौर्य ने 600 मीटर दौड़ और मेडली रिले में दो स्वर्ण पदक जीतकर बड़ी उपलब्धि हासिल की। इस दौरान उन्होंने 600 मीटर दौड़ में नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी कायम किया।
600 मीटर दौड़ में बनाया नया रिकॉर्ड
शौर्य ने 600 मीटर दौड़ को महज 1 मिनट 17.63 सेकंड में पूरा कर पिछला रिकॉर्ड तोड़ दिया। इससे पहले यह रिकॉर्ड 1 मिनट 18.48 सेकंड का था। वहीं, मेडली रिले में हरियाणा की टीम ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए वर्ष 2017 से चले आ रहे सात साल पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। इस प्रतियोगिता में देश के करीब 21 राज्यों की टीमों ने हिस्सा लिया था।
रोजाना तीन सत्रों में करते हैं अभ्यास
शौर्य ने बताया कि वह पिछले चार से पांच वर्षों से लगातार एथलेटिक्स का अभ्यास कर रहे हैं। वह प्रतिदिन सुबह, दोपहर और शाम तीन सत्रों में ट्रेनिंग करते हैं। उनकी इस सफलता में परिवार का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। मां, चाचा और परिवार के अन्य सदस्यों ने हमेशा उनका हौसला बढ़ाया है। अब उनका लक्ष्य एशिया और विश्व स्तर की प्रतियोगिताओं में भारत के लिए पदक जीतना है। अगले वर्ष वह अंडर-18 आयु वर्ग में प्रवेश करेंगे।
बचपन में पिता का उठ गया था साया
शौर्य के चाचा गुरमीत ने बताया कि जब शौर्य महज दो-तीन साल का था, तभी उसके पिता का निधन हो गया था। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद परिजनों ने उसकी खेल प्रतिभा को आगे बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। दो स्वर्ण पदक जीतने की खबर गांव पहुंचते ही खुशी का माहौल बन गया। ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़ों के साथ शौर्य का भव्य स्वागत किया।
31 हजार रुपये से किया सम्मानित
शौर्य की उपलब्धि पर एक दवा कंपनी ने उन्हें 31 हजार रुपये का नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया। कंपनी ने भविष्य में उनकी डाइट और खेल संबंधी जरूरतों में सहयोग देने का भरोसा भी दिया। शौर्य के मुताबिक, फिलहाल उन्हें सरकार की ओर से कोई आर्थिक सहायता नहीं मिली है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करना लक्ष्य
आर्थिक चुनौतियों के बीच अपनी मेहनत और लगन से दो स्वर्ण पदक जीतने वाले शौर्य का अगला लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत के लिए पदक हासिल करना है। उनकी सफलता ने साबित कर दिया है कि प्रतिभा और दृढ़ संकल्प के दम पर छोटे गांवों से भी बड़े खिलाड़ी उभर सकते हैं।
