कोटा, 14/01/2026
हाड़ौती संभाग और उससे लगता हुआ मध्य प्रदेश राज्य चावल उत्पादन के मामले में काफी अग्रणी है. कोटा संभाग की मंडियों में बड़ी संख्या में धान की फसल भी आती है. संभाग में मिल चावल की प्रोसेसिंग करती है, जिसके बाद ये एक्सपोर्ट होते हैं. ज्यादातर खाड़ी देशों में चावल एक्सपोर्ट होता है. वर्तमान में अमेरिका और ईरान के रिश्तों में खटास आ गई है और युद्ध जैसे हालात बनने लगे हैं. ईरान में अंदरूनी विरोध भी हो रहा है. इसके चलते चावल एक्सपोर्टर और मिलर्स पर संकट के बादल छाए हुए हैं. हाड़ौती संभाग के मिलर और एक्सपोर्टर में अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है.
दूसरी तरफ एक्सपोर्ट हो रहे चावल के दाम में 5 रुपए प्रति किलो की बड़ी गिरावट आई है. एक्सपोर्टर नीलेश पटेल का कहना है कि चावल के दाम में 5 रुपए की गिरावट हुई है. जहां पहले 70 रुपए के आसपास एक्सपोर्ट में चावल बिक रहा था, अब यह 65 रुपए के आसपास रह गया है. इंडस्ट्रियल एरिया में विपिन इंडस्ट्रीज राइस मिल का संचालन करने वाले मनोज जैन का कहना है कि हमारा तैयार माल यहां से नहीं जा रहा है. भामाशाह कृषि उपज मंडी में धान के बड़े व्यापारी प्रकाश चंद जैन पालीवाल का कहना है कि ईरान का मामला बिगड़ता है तो भविष्य में मंदी के चांस ज्यादा लग रहे हैं. वर्तमान में किसान, व्यापारी, मिलर्स से लेकर एक्सपोर्टर तक को नुकसान होने लगा है.
पालीवाल का कहना है कि किसानों ने 80 फीसदी तक माल मंडी में बेच दिया है, अब केवल 20 फीसदी माल किसानों के पास बचा है. हालांकि, मिलर ने अभी पूरा माल नहीं खरीदा है. उन्होंने अभी केवल जून व जुलाई तक का ही माल खरीदा है, जबकि मिल अगस्त-सितंबर तक चलती है, जिसमें धान को प्रक्रिया कर सेला चावल का रूप दिया जाता है. ऐसे में मिलर भी अभी आगे सौदे नहीं होने के चलते माल खरीदने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं. इसी के चलते बीते 15 दिन से बाजार स्टेबल स्थिति में चल रहा है. धान के भाव जस के तस बने हैं, जबकि इस समय दाम बढ़ने जैसी स्थिति थी.
इंडस्ट्रियल एरिया में विपिन इंडस्ट्रीज राइस मिल का संचालन करने वाले मनोज जैन का कहना है कि वर्तमान में बाजार की विकट स्थिति है, लगभग सभी मिलर्स असमंजस की स्थिति में हैं. पहले से चावल के सौदे कर रखे थे, लेकिन एक्सपोर्ट नहीं हो रहा है. तैयार माल यहां से जा नहीं रहा है. दूसरी तरफ मुंद्रा पोर्ट पर बड़े-बड़े एक्सपोर्टर्स का माल भी विदेश नहीं जा पा रहा है. माल की लोडिंग नहीं हो रही है और हमारे पहले किए हुए सौदे भी होल्ड पर चले गए हैं. दूसरी तरफ भुगतान की भी काफी समस्या चल रही है. एक्सपोर्टर को भी विदेश से पैसा नहीं मिल पा रहा है.
एक्सपोर्टर नीलेश पटेल का कहना है कि चावल एक्सपोर्ट ईरान और अमेरिका के तनाव पर ही वर्तमान में निर्भर हो गया है. युद्ध जैसे हालात बन जाते हैं तो मार्केट और क्रैश हो सकता है. हालात सामान्य हो जाते हैं तो चावल के दामों में तेजी आ जाएगी, क्योंकि डिमांड बढ़ेगी. युद्ध जैसे हालातों के बनने से ही दामों में 5 रुपए प्रति किलो की गिरावट आ गई है. पहले जहां पर 70 रुपए प्रति किलो में सेला चावल एक्सपोर्ट हो रहा था, वर्तमान में दाम 65 रह गया है. यह सब कुछ अमेरिका का ईरान में इंटरफेयर करने से ही हालात बने हैं. दूसरी तरफ अंदरूनी संघर्ष भी वहां पर चल रही है. इसके चलते माल भी एक्सपोर्टर डंप नहीं करना चाह रहा है.
प्रकाश चंद पालीवाल का कहना है कि 10 से 12 लाख टन माल खाड़ी देशों में सप्लाई होता है. युद्ध का इस पर काफी असर पड़ेगा, क्योंकि नई सप्लाई नहीं है. रमजान 18 फरवरी को शुरू हो रहे हैं. ऐसे में रमजान के पहले का सौदा खाड़ी देशों के इम्पोर्ट्स के साथ हुआ था. उसके लिए शिपमेंट 20 जनवरी को जाना है और उसी को लेकर वर्तमान में सप्लाई और सौदे भारत में हो रहे हैं. यहां मंडी में धान के भाव 15 दिन से स्टेबल हैं. इसके पहले 1 रुपए किलो की ही तेजी थी और बीते 2 महीने से लगभग ज्यादा अंतर भाव में नहीं आया है. यह शिपमेंट की वजह से ही तेजी थी. अब मुंद्रा पोर्ट से 20 जनवरी को लास्ट शिफ्टमेंट जानी है. उसके बाद सभी सौदे होंगे.
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच विवाद बढ़ गया था, जिसके बाद अफगानिस्तान नया स्टेशन भारत के चावल निर्यात के लिए खुला है. अफगानिस्तान में करीब 50 हजार टन चावल भेजा गया है और यह मांग आगे बढ़ भी सकती है. इसी से भारत को थोड़ी राहत धान व चावल में मिली है. इससे धान उत्पादक किसानों को भी फायदा हुआ है. भारत से 12 लाख टन के आसपास चावल खाड़ी देशों में निर्यात किया जाता है. इनमें रियाद, दुबई, दमाम, जैद्दा, ईरान, इराक और अन्य गल्फ कंट्री शामिल हैं. हाड़ौती सबसे ज्यादा बासमती चावल एक्सपोर्ट करता है.
एक्सपोर्टर नीलेश पटेल के अनुसार 6 से 8 लाख टन चावल का निर्यात हाड़ौती से होता है. ईरान भी बड़ी संख्या में चावल मंगवाता है. मंडी व्यापारी प्रकाशन पालीवाल का कहना है कि एक बार ईरान अमेरिका के बीच युद्ध छिड़ जाता है तो आसपास के देश भी परेशानी में आ जाएंगे. इसके बाद चावल का निर्यात ठप जैसा ही हो जाएगा. इस अनिश्चितता के चलते ही वर्तमान में मिलर्स और एक्सपोर्टर ज्यादा इंटरेस्ट धान खरीदने में नहीं ले रहे हैं. दोनों देशों के बीच चल रहे तनाव पर नजर बनाए हुए हैं. तनाव का अगर समाधान होता है तो व्यापार अच्छा रह सकता है नहीं तो मार्केट और नीचे जा सकता है.
राइस मिल मालिक मनोज जैन का कहना है कि हमारे लिए पहला सवाल है कि मंडी से माल खरीदें या नहीं. दूसरी तरफ राइस मिल प्लांट को चलाएं या फिर नहीं चलाएं. लेबर का क्या करना चाहिए? मिलर्स के सामने समस्या बनी हुई है कि स्टॉक लगातार बढ़ता जा रहा है. वह वर्तमान में धान से सेला चावल बनाने के प्रोसेस को नहीं रोक सकते हैं. दूसरी तरफ अगर वह रोक देते हैं और उसके बाद अचानक से डिमांड बढ़ जाती है तो भी समस्या हो सकती है. उनके पास वर्तमान में कच्चा माल है, जिसको प्रोसेस करके रखना ही होगा.
मंडी में शुरुआत में दाम काफी कम थे. ऐसे में शुरुआत में किसानों को कम दाम पर ही माल अपना बेचना पड़ा, लेकिन इसके बाद दाम बढ़ गए थे. मंडी में आए करीब 50 फीसदी माल के किसानों को ठीक-ठाक दाम मिला है, जबकि अब अनिश्चितता का दौर है. अभी किसानों का 20 फीसदी माल मंडी में आना शेष है, जिसको लेकर भी आशंका खड़ी हो रही है.
