चंडीगढ़, 02/12/2025
मोबाइल फोन या लैंडलाइन फोन तो आप सभी ने देखे होंगे लेकिन क्या आपने कभी हिटलर के ज़माने का फोन देखा है, शायद नहीं, ऐसे में अगर आपको ये फोन अपनी आंखों से देखना है तो सीधे चले जाइए चंडीगढ़ में चल रहे क्राफ्ट मेले में जहां पर राजस्थान के रहने वाले विनय शर्मा पोलैंड से खरीदे गए हिटलर के जमाने के 5 किलो के फोन को लेकर पहुंचे हैं.
चंडीगढ़ में क्राफ्ट मेला
चंडीगढ़ के कला भवन में 28 नवंबर से क्राफ्ट मेला लगा है जो 7 दिसंबर तक चलेगा. इस क्राफ्ट मेले में जहां अलग-अलग राज्यों से आए कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं राजस्थान के दौसा के लालसोट के रहने वाले विनय शर्मा ने यहां पर एक ख़ास प्रदर्शनी लगाई है, जो सभी का ध्यान अपनी ओर खींच रही है. विनय शर्मा कॉल फ्रॉम द पास्ट (Call from the Past) की थीम के साथ यहां पर अपने साथ लाई गई एंटीक चीज़ों को लोगों को दिखा रहे हैं. दरअसल विनय शर्मा को पुरानी चीजें ज़मा करने का शौक है. अगर आप 90’s की जेनरेशन के हैं तो यहां आने पर उनकी एंटीक चीज़ों को देखकर आपके अतीत की यादें ताज़ा हो जाएंगी.
हिटलर के ज़माने का फोन
विनय शर्मा के पास 100 से ज्यादा पुराने फोन मौजूद हैं. वे जर्मनी, पोलैंड, इजिप्ट समेत कई देशों से पुराने समय में इस्तेमाल होने वाले फोन भी लेकर आए हैं जिन्हें उन्होंने अपने एंटीक कलेक्शन में शामिल कर रखा है और अब इस प्रदर्शनी के जरिए लोगों को दिखा रहे हैं. लेकिन इनमें सबसे ख़ास है हिटलर के जमाने में इस्तेमाल होने वाला 5 किलो का फोन जिसे वे पोलैंड से खरीदकर लेकर आए हैं. इसे उन्होंने बहुत ही प्यार से संजोकर रखा है. उनके मुताबिक इस फोन को हिटलर के जमाने के दौरान इस्तेमाल किया गया है और जब वे पोलैंड के दौरे पर गए थे, तब उन्होंने इस ख़ास 5 किलो के फोन को खरीदा था जिसे वे अब इंडिया संभालकर लाने के बाद सभी को दिखा रहे हैं. विनय शर्मा ने बताया कि पोलैंड में उन्हें जो फोन के बारे में जानकारी मिली, उसके मुताबिक हिटलर ने नाज़ी सेना को ये फोन डिस्ट्रीब्यूट किए थे. फोन में बैटरी लगी हुई है और उसमें दिए गए हैंडल को घुमाकर चार्ज किया जाता था. फिर गले में डालकर मैसेज दिया करते थे. फोन पर एक नॉब है जिसके जरिए फिर मैसेज दिया जाता था. उस समय कम्युनिकेशन के इतने साधन नहीं थे, तब इस तरह की डिवाइस बनाना अपने आप में अनोखा है. वे इसे भावी पीढ़ियों को दिखाना चाहते थे.
टेलिफोन बूथ भी लेकर पहुंचे
एक जमाने में कहीं दूर बैठे किसी शख्स से बात करने के लिए इस्तेमाल होने वाला टेलिफोन बूथ शायद ही आपको याद हो. आज के दौर में जहां पलक झपकते ही मोबाइल फोन के जरिए बातचीत हो जाती हो लेकिन 90 के दशक में ऐसा नहीं था. तब घर पर लैंडलाइन फोन ना होने की सूरत में लोगों को टेलिफोन बूथ जाना होता था और लंबी-लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता था. तब कहीं जाकर लोकल, एसटीडी या आईएसडी कॉल हो पाती थी जो काफी महंगी भी थी. लेकिन अगर आपको मोबाइल फोन की जगह वो पुराना दौर याद करना हो तो विनय शर्मा ने इसका भी इंतज़ाम कर रखा है. वे पूरा का पूरा टेलिफोन बूथ लेकर यहां पहुंचे हैं जिसके अंदर जाने पर गारंटी है कि आपकी पुरानी सारी यादें ताज़ा हो जाएंगी
अतीत बोलता है, अतीत गाता है
टेलिफोन बूथ के बारे में बताते हुए विनय शर्मा ने कहा कि पहले के दौर में टेलिफोन बूथ के अंदर बैठकर लोग बात किया करते थे. टेलिफोन बूथ में ग्लास लगा होता था जिससे आवाज़ बाहर नहीं आती थी. पहले बातें भी गोपनीय होती थी. वे खुद एंगेजमेंट होने के बाद टेलिफोन बूथ के जरिए ही अपनी होने वाली पत्नी से बात किया करते थे. ये स्मृतियां बहुत महत्वपूर्ण है. उस समय लोग ढूंढते रहते थे कि कहां पर टेलिफोन का बूथ मिलेगा. टेलिफोन बूथ तब एक महत्वपूर्ण चीज़ थी लेकिन लोगों से इसे फेंक दिया. मैंने सोचा कि क्यों ना इसे इज्जत बख्शूं और इसे मैं अपने स्टूडियो में ले आया. मेरा स्टूडियो अतीत राग के नाम से है, जहां सिर्फ अतीत बोलता है, अतीत गाता है, अतीत गुनगुनाता है, पूरे अतीत की चीजें मैंने समेट कर रखी हैं यहां पर.
कॉल फ्रॉम द पास्ट
अपनी थीम कॉल फ्रॉम द पास्ट के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि ये टाइटल मैंने इसलिए दिया है क्योंकि पास्ट (अतीत) हमसे बातें करना चाहता है और हम इसे इग्नोर कर रहे हैं. वो चाहता है कि मेरे महत्व को समझा जाए. अगर हम अतीत का महत्व समझेंगे तो हम बुजुर्गों का भी महत्व समझेंगे, क्योंकि उनसे जुड़ी हुई चीजें हैं. मैंने अपने घर में एक कोना बनाया है जहां पर मैंने अपने पिताजी, दादाजी से जुड़ी कोई ना कोई चीज़ जैसे चश्मा, पेन रखी हुई है. हमें आज के दौर में अपने परदादा का नाम याद नहीं है. मैं चाहता हूं कि सभी अपने अतीत को जरूर याद रखें. मैं चाहता हूं कि कोई भी शख्स उस सुखमय समय को ना भूलें जो आपके माता-पिता ने आपको दिया है, आपके दादा ने आपको दिया है. आज हम इन सब बातों को इग्नोर कर रहे हैं. हम कहते हैं कि आपको कुछ पता नहीं है, जबकि ये सारी चीजें उन्होंने ही तो दी है हमें, जो हम आज देख रहे हैं और खुश हो रहे हैं. आज हम अतीत को संभालकर रखें, सुनहरे भविष्य के लिए.
बचपन से पुरानी चीजें जमा करने का शौक
उन्होंने बताया कि उन्हें बचपन से ही पुरानी चीजें जमा करने का शौक है. सबसे पहले उन्होंने रेडियो जमा करना शुरू किया. उनके पास 300 रेडियो है, वॉल वाले जो रेयर है. पुरानी घड़ियां, कैमरे समेत कई चीजें हैं. बचपन से लेकर अभी तक की सारी चीजें मैंने जमा कर रखी है.
कौन था एडॉल्फ हिटलर ?
एडॉल्फ हिटलर को एक जर्मन तानाशाह के रूप में जाना जाता है. वे 1920 के दशक में नाज़ी पार्टी (नेशनल सोशलिस्ट जर्मन वर्कर्स पार्टी) के प्रमुख नेता बने थे, जो यहूदी-विरोधी विचारों और जर्मन राष्ट्रवाद पर केंद्रित थी. 1933 में उन्हें जर्मनी का चांसलर बनाया गया था, जिसके बाद उन्होंने तेजी से एक तानाशाही शासन की स्थापना की थी. इसके बाद उन्होंने खुद को “फ़्यूहरर” (नेता) घोषित कर दिया. उन्होंने आक्रामक नीति अपनाते हुए 1 सितंबर 1939 को पोलैंड पर अटैक किया जिसके साथ सेकेंड वर्ल्ड वॉर शुरू हो गया था. उनके शासन के दौरान यहूदियों और बाकी अल्पसंख्यकों का बड़े पैमाने पर नरसंहार किया गया, जिसे होलोकॉस्ट के नाम से जाना जाता है
