नई दिल्ली, 08/10/2026
भारत में दिवाली से लेकर क्रिसमस तक के त्योहारी सीजन और साल के अंत की खरीदारी को देखते हुए लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग, स्टोरेज और डिलीवरी जैसे क्षेत्रों में फ्रंटलाइन वर्कर्स की मांग में जबरदस्त इजाफा होने की उम्मीद है। ग्लोबल जॉब साइट ‘इंडीड’ (Indeed) की ‘फेस्टिव सीजन आउटलुक 2026’ रिपोर्ट के मुताबिक, बढ़ती उपभोक्ता मांग के कारण कंपनियां अपनी सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए बड़े पैमाने पर भर्तियां कर रही हैं।
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डिलीवरी और लास्ट-माइल डिलीवरी एग्जीक्यूटिव (29%): ऑनलाइन और ऑफलाइन ऑर्डर की समय पर डिलीवरी के लिए इनकी सबसे अधिक मांग है।
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वेयरहाउस एसोसिएट, पिकर और पैकर (29%): ऑर्डर प्रोसेसिंग और वेयरहाउस में सामान के रखरखाव की रीढ़ माने जाने वाले पदों पर भारी मांग है।
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प्रोडक्शन, असेंबली और पैकेजिंग (27%): सप्लाई चेन के शुरुआती चरण में उत्पादों के निर्माण और पैकेजिंग के लिए मांग।
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ड्राइवर और ट्रांसपोर्ट रोल्स (24%): फैक्ट्रियों, गोदामों और रिटेल स्टोर्स के बीच सामान की निर्बाध आवाजाही के लिए चालकों की जरूरत।
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ऑर्डर फुलफिलमेंट और इन्वेंट्री मैनेजमेंट (23%): स्टॉक ट्रैकिंग और सप्लाई चेन के सुचारू संचालन के लिए भर्ती।
टेक-साक्षरता और काम की शर्तें बन रहीं निर्णायक
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डिजिटल दक्षता की मांग: रिपोर्ट के अनुसार, 64% वर्कर स्मार्टफोन-आधारित वर्क ऐप्स चला सकते हैं, जबकि 42% वेयरहाउस व डिलीवरी सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करने में सक्षम हैं। हालांकि, विशिष्ट सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल में अभी भी स्किल गैप बना हुआ है।
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वेतन और ओवरटाइम की उम्मीदें: 67% सीजनल वर्कर सामान्य दिनों की तुलना में कम से कम 6% से 20% तक अधिक वेतन (प्रीमियम) की उम्मीद कर रहे हैं। 74% लोग अतिरिक्त भुगतान पर ओवरटाइम और 61% सुरक्षित परिवहन मिलने पर नाइट शिफ्ट में काम करने को तैयार हैं।
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स्थाई रोजगार को तरजीह: 71% उम्मीदवार ऐसे मौकों को प्राथमिकता दे रहे हैं जो त्योहारी सीजन के बाद भी स्थाई नौकरी में तब्दील हो सकें।
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मुख्य चिंताएं: 32% वर्कर वेतन में देरी, 25% लिखित कॉन्ट्रैक्ट न मिलने और 23% विज्ञापित शर्तों से अलग काम की स्थितियों को लेकर चिंतित हैं।
एचआर और कानूनी सलाहकार अजय शर्मा के अनुसार, “टेक्नोलॉजी ने ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया को आसान बनाया है, लेकिन सिर्फ डिजिटल टूल्स से कर्मचारियों की कमी दूर नहीं होगी। कंपनियों को सीजनल अट्रिशन (छंटनी/नौकरी छोड़ना) रोकने के लिए पारदर्शी शेड्यूलिंग, नाइट शिफ्ट सुरक्षा और समय पर भुगतान जैसे टिकाऊ प्रबंधन पर ध्यान देना होगा।”
(नोट: यह सर्वेक्षण ‘इंडीड’ के लिए ‘वैल्यूवॉक्स’ द्वारा देश भर के 1,277 नियोक्ताओं और 2,569 नौकरी तलाशने वालों के बीच किया गया।)
