न्यूज डेस्क, 30/12/2025
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की चेयरपर्सन खालिदा जिया का लंबी बीमारी के बाद मंगलवार सुबह निधन हो गया. वह 80 साल की थीं. उनके डॉक्टरों के मुताबिक खालिदा जिया उम्र से जुड़ी कई बीमारियों से जूझ रही थीं, जिनमें लिवर का एडवांस्ड सिरोसिस, आर्थराइटिस, डायबिटीज और छाती और दिल से जुड़ी दिक्कतें शामिल थी. बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी ने उनके निधन की पुष्टि की है.
बीएनपी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयरल करते हुए लिखा कि कुछ समय पहले ही डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित किया. जानकारी के मुताबिक मंगलवार सुबह 6 बजे के करीब उन्होंने आखिरी सांस ली. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक खालिदा जिया का 23 नवंबर से ढाका के एवरकेयर हॉस्पिटल में इलाज चल रहा था और 11 दिसंबर को उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था. इस महीने की शुरुआत में उनकी बीमारियों के एडवांस मेडिकल ट्रीटमेंट के लिए लंदन भेजा गया था.
उनके बेटे तारिक रहमान 17 साल का देश निकाला खत्म करके अपनी बीमार मां से मिलने हाल ही में बांग्लादेश पहुंचे हैं. बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के फेसबुक पेज पर एक पोस्ट में कहा गया, ‘खालिदा जिया का निधन सुबह करीब 6:00 बजे फज्र की नमाज के तुरंत बाद हुआ.’ बीएनपी पार्टी ने आगे कहा, ‘हम उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं और सभी से उनकी दिवंगत आत्मा के लिए प्रार्थना करने को कहते हैं.’
खालिदा जिया कौन थीं ?
खालिदा जिया का जन्म 15 अगस्त, 1945 को पूर्वी बंगाल, भारत के दिनाजपुर (अब बांग्लादेश में) में हुआ था. खालिदा जिया लंबे समय तक बांग्लादेश की राजनीति में रहीं. इस दौरान वह जेल में भी रहीं. वह बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री थीं.
उन्होंने 1991-96 और 2001 से 2006 तक प्रधानमंत्री का पदभार संभाला. उनकी शादी जिया उर-रहमान से हुई थी. उनके दो बेटे तारिक रहमान (60) और अराफात रहमान हैं. तारिक रहमान बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के कार्यकारी अध्यक्ष हैं और अगले वर्ष होने वाले चुनाव में प्रधानमंत्री पद के प्रमुख दावेदार के रूप में उभरे हैं.
जिया उर रहमान बांग्लादेश की आजादी की लड़ाई में एक बड़े लीडर थे. बांग्लादेश उस समय पाकिस्तान का हिस्सा था. जिया उर-रहमान 1977 में बांग्लादेश के राष्ट्रपति बने. हालाँकि, उनके राष्ट्रपति रहते 1981 में हत्या कर दी गई थी. जियाउर-रहमान ने 1978 में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) बनाई थी. फिर 1979 के चुनाव में उनकी पार्टी ने बंपर जीत हासिल की. इसके बाद वह देश के पहले निर्वाचित राष्ट्रपति बने.
बांग्लादेश की राजनीतिक में अहम समय
उनका निधन एक अहम राजनीतिक मोड़ पर हुई है, जब बांग्लादेश फरवरी 2026 में होने वाले राष्ट्रीय चुनावों की तैयारी कर रहा है और पिछले साल जुलाई में हुए विद्रोह के बाद राजनीतिक तनाव बढ़ गया है. उनके बेटे और बीएनपी नेता तारिक रहमान भी हाल ही में कई सालों के देश निकाला के बाद बांग्लादेश लौटे हैं.
रहमान 2007-08 में गिरफ्तार होने के बाद देश छोड़कर चले गए थे और बाद में रिहा होने के बाद लंदन में बस गए थे. पिछले साल शेख हसीना की सरकार हटने के बाद, उन्हें अवामी लीग के समय में दर्ज कई मामलों में बरी कर दिया गया. इससे उनकी वापसी का रास्ता साफ हो गया.
तारिक रहमान पिछले हफ़्ते बांग्लादेश पहुँचे और एयरपोर्ट के पास पार्टी नेताओं और समर्थकों की एक बड़ी भीड़ ने उनका स्वागत किया. इसे आने वाले चुनावों से पहले एक बड़े राजनीतिक कार्यक्रम के तौर पर देखा जा रहा था. देश पहुँचने के बाद, तारिक एवरकेयर हॉस्पिटल में उनकी माँ से भी मिले. खालिदा जिया के अंतिम संस्कार की तैयारियों और आधिकारिक कार्यक्रमों के बारे में और जानकारी का इंतजार है.
