न्यूज डेस्क, 08/04/2026
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और भू-राजनीतिक अस्थिरता के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था को सुरक्षा कवच देने के लिए केंद्र सरकार एक बड़े राहत पैकेज पर विचार कर रही है. आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, सरकार लगभग 2.5 लाख करोड़ रुपये की एक नई ‘क्रेडिट गारंटी योजना’ लाने की योजना बना रही है. इस योजना का मुख्य उद्देश्य उन सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) की सहायता करना है, जो चल रहे अमेरिका-इरान संघर्ष के कारण तरलता (Liquidity) की समस्या और परिचालन बाधाओं का सामना कर रहे हैं.
योजना का स्वरूप और मुख्य प्रावधान
प्रस्तावित योजना के तहत, संकट से प्रभावित व्यवसायों को दिए जाने वाले ऋण पर सरकार लगभग 90 प्रतिशत तक की क्रेडिट गारंटी प्रदान करेगी. यह गारंटी अधिकतम 100 करोड़ रुपये तक के ऋणों पर लागू होगी. यदि कोई कर्जदार मौजूदा संघर्ष की परिस्थितियों के कारण ऋण चुकाने में असमर्थ रहता है, तो ऋणदाताओं (बैंकों और वित्तीय संस्थानों) को सरकार की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी, ‘नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी’ (NCGTC) के माध्यम से सुरक्षा प्रदान की जाएगी.
लॉकडाउन के दौरान लाखों व्यवसायों को डूबने से बचाया था
इस महत्वाकांक्षी योजना को लागू करने के लिए सरकार को लगभग 17,000 करोड़ से 18,000 करोड़ रुपये का प्रावधान करना पड़ सकता है. जानकारों का मानना है कि यह पहल कोविड-19 महामारी के दौरान शुरू की गई ‘इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम’ (ECLGS) की तर्ज पर होगी, जिसने लॉकडाउन के दौरान लाखों व्यवसायों को डूबने से बचाया था.
ईसीएलजीएस की सफलता से प्रेरणा
मई 2020 में आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत शुरू की गई ECLGS ने भारतीय अर्थव्यवस्था को स्थिर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. उस समय सरकार ने पात्र व्यवसायों को 100 प्रतिशत गारंटी प्रदान की थी, जिससे बैंकों के लिए बिना किसी अतिरिक्त जोखिम के ऋण देना आसान हो गया था. वर्तमान योजना में भी ब्याज दरों को सीमित (Cap) रखने और बिना किसी प्रोसेसिंग शुल्क या कोलैटरल (जमानत) के ऋण उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है, ताकि व्यवसायों पर वित्तीय बोझ कम हो सके.
महंगाई और आपूर्ति श्रृंखला पर प्रहार
पश्चिम एशिया में तनाव के कारण कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में भारी उछाल आया है. 28 फरवरी को सैन्य संघर्ष शुरू होने के बाद से कच्चे तेल की कीमतें लगभग 50 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं. इसे देखते हुए सरकार ने पहले ही पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क (Excise Duty) में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है. इसके अतिरिक्त, महत्वपूर्ण पेट्रोकेमिकल उत्पादों के आयात पर सीमा शुल्क माफ कर दिया गया है ताकि घरेलू बाजार में आपूर्ति बनी रहे.
MSME क्षेत्र को कार्यशील पूंजी प्रदान करेगी
यह क्रेडिट गारंटी योजना न केवल MSME क्षेत्र को कार्यशील पूंजी प्रदान करेगी, बल्कि विमानन (Aviation) और लॉजिस्टिक्स जैसे उन क्षेत्रों को भी राहत देगी जो ईंधन की बढ़ती कीमतों और बाधित समुद्री मार्गों से जूझ रहे हैं. सरकार का यह कदम भारतीय उद्यमियों के मनोबल को बढ़ाने और वैश्विक संकट के बीच आर्थिक विकास की गति को बनाए रखने की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है.
