न्यूज डेस्क, 04/03/2026
मॉस्को: मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में जारी भारी तनाव और ईरान पर अमेरिका व इजरायल के हमलों के बाद हॉर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से दुनिया भर में ऊर्जा संकट गहरा गया है. इस भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच रूस ने दावा किया है कि भारत ने रूसी कच्चे तेल के आयात को बढ़ाने में “नई दिलचस्पी” दिखाई है.
रूसी उप-प्रधानमंत्री का बड़ा बयान
रूस के उप-प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने मॉस्को में एक कार्यक्रम के दौरान ‘रोसिया 1’ टीवी चैनल से बातचीत में कहा, “हमें भारत से फिर से रूसी तेल की खरीद बढ़ाने के संकेत मिल रहे हैं.” नोवाक, जो रूस के ऊर्जा क्षेत्र के प्रमुख रणनीतिकार माने जाते हैं, का यह बयान तब आया है जब भारत ने हाल के महीनों में अमेरिकी दबाव और अन्य कारणों से रूसी तेल के आयात में थोड़ी कमी की थी.
होर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व और संकट
हॉर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ‘ऑयल चोकपॉइंट’ है. वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा (20%) और प्राकृतिक गैस (LNG) का एक बड़ा हिस्सा इसी संकीर्ण रास्ते से होकर गुजरता है. ईरान द्वारा जवाबी कार्रवाई में इस रास्ते को बाधित किए जाने के बाद खाड़ी देशों (सऊदी अरब, यूएई, इराक और कुवैत) से होने वाली तेल की आपूर्ति पूरी तरह ठप होने की कगार पर है.
भारत पर प्रभाव और रूस की रणनीति
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का 85% से अधिक आयात करता है. खाड़ी देशों से आपूर्ति रुकने का मतलब है कि भारत को तत्काल वैकल्पिक बाजार की जरूरत है. ऐसे में रूस एक विश्वसनीय विकल्प बनकर उभरा है. हालांकि, रूसी मीडिया (NTV) के अनुसार, इस संकट का फायदा उठाकर रूस उन “भारी छूटों” (discounts) को कम कर सकता है, जो वह अब तक भारत जैसे एशियाई खरीदारों को दे रहा था.
यूरोप का बदलता रुख
नोवाक ने यह भी संकेत दिया कि ऊर्जा संकट इतना गहरा सकता है कि यूरोपीय संघ (EU), जिसने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं, अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए रूसी तेल और गैस पर लगाए गए प्रतिबंधों में ढील देने पर विचार कर सकता है.
यदि हॉर्मुज स्ट्रेट लंबे समय तक बंद रहता है, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं. भारत के लिए चुनौती न केवल आपूर्ति सुनिश्चित करना है, बल्कि महंगे तेल के कारण घरेलू स्तर पर पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और महंगाई को नियंत्रित करना भी होगा.
