नई दिल्ली, 27/02/2026
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में छात्रसंघ की ओर से गुरुवार को शिक्षा मंत्रालय तक निकाले गए मार्च के बाद विवाद गहरा गया है. छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन (AISA) और जेएनयू छात्रसंघ (JNUSU) ने आरोप लगाया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने बल प्रयोग किया और बाद में 14 छात्रों को गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तार छात्रों में तीन जेएनयू छात्रसंघ पदाधिकारियों में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, संयुक्त सचिव, पूर्व अध्यक्ष और AISA की अखिल भारतीय अध्यक्ष भी शामिल हैं. जिसे लेकर जेएनयू परिसर में वसंत कुंज थाना तक छात्रों ने मार्च निकाला और रिहाई की मांग की.
मार्च क्यों निकाला गया
छात्रसंघ का कहना है कि 26 फरवरी को लॉग मार्च कई मांगों को लेकर बुलाया गया था. इनमें छात्रसंघ के नेतृत्व में रोहित एक्ट के साथ यूजीसी के नियम लागू करने, जातिवादी बयान पर जेएनयू वीसी को माफी मांगने व इस्तीफा देने और सरकारी संस्थानों के लिए फंडिंग मजबूत करने को लेकर मांग शामिल थी. छात्रों का कहना है कि यह मुद्दे विश्वविद्यालय में समान अवसर और सामाजिक न्याय से जुड़े हैं. उनका आरोप है कि प्रशासन उनकी बात सुनने के बजाय दमन की नीति अपना रहा है.
पुलिस कार्रवाई पर आरोप
AISA और जेएनयू छात्रसंघ का दावा है कि सैकड़ों छात्रों के शांतिपूर्ण जुटान के बावजूद दिल्ली पुलिस ने बल प्रयोग किया. कई छात्रों को चोटें आईं और कुछ को 14 घंटे से अधिक समय तक थाने में रखा गया. छात्रसंघ अध्यक्ष अदिति मिश्रा, संयुक्त सचिव दानिश अली, उपाध्यक्ष के गोपिका और AISA की अध्यक्ष नेहा सहित कई छात्रों को हिरासत में लिया गया.
छात्रों की मांग
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने कई मांगें दोहराईं, जिनमें रोहित एक्ट के अनुरूप नियम लागू किए जाएं, जेएनयू के कुलपति माफी मांगें और इस्तीफा दें, सार्वजनिक संस्थानों की फंडिंग मजबूत की जाए, नई शिक्षा नीति (NEP) को वापस लिया जाए और जेएनयू में शुरू हुए सिद्धांत फाउंडेशन और NEP के तहत शुरू किए गए पाठ्यक्रमों की समीक्षा की जाए.
जेएनयू में इस घटना के बाद माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है. छात्र संगठन देशभर के विद्यार्थियों और लोकतंत्र समर्थक नागरिकों से समर्थन की अपील कर रहे हैं. उनका कहना है कि यह सिर्फ जेएनयू का मुद्दा नहीं, बल्कि देशभर के सार्वजनिक विश्वविद्यालयों और छात्रों के अधिकारों से जुड़ा सवाल है.
