विकसित भारत 2047: 'सिर्फ केंद्र के बजट से नहीं चलेगा काम'
नई दिल्ली, 20 सितंबर 2026
केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि साल 2047 तक ‘विकसित भारत’ के सपने को अकेले केंद्र के दम पर पूरा नहीं किया जा सकता। नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री और राज्यों के वित्त मंत्रियों के बीच हुई एक अहम बैठक में राज्यों को सलाह दी गई कि वे अपने बजट, इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च और राजस्व (Revenue) में बढ़ोतरी करें। आर्थिक मामलों की सचिव अनुराधा ठाकुर ने बैठक में स्पष्ट किया कि असली चुनौती यह नहीं है कि राज्यों के पास अभी कितना पैसा है, बल्कि यह है कि कौन सा राज्य अपने यहां कितना ज्यादा से ज्यादा निवेश (Investment) आकर्षित कर सकता है।
किन क्षेत्रों पर फोकस करने को कहा गया?
बैठक में राज्यों को मुख्य रूप से 4 बातों पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी गई:
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हाउसिंग सेक्टर (आवास):
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अभी राज्यों की जीडीपी (GSDP) में हाउसिंग फाइनेंस की हिस्सेदारी 2.5% है।
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राज्यों से कहा गया है कि अगले 5 सालों में इसे बढ़ाकर 3% तक ले जाएं। हाउसिंग सेक्टर से निर्माण, शहरीकरण और निजी निवेश को सीधा बढ़ावा मिलता है।
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मैन्युफैक्चरिंग और औद्योगिक लागत में कमी:
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भारत में जमीन और वित्तीय व्यवस्था (लॉजिस्टिक्स व फाइनेंस) की लागत मलेशिया, वियतनाम और इंडोनेशिया जैसे देशों से अधिक है।
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राज्यों को निर्देश दिए गए हैं कि वे औद्योगिक बिजली की दरें, जमीन की कीमत और माल ढोने का खर्च कम करें ताकि विदेशी कंपनियां यहां निवेश करें।
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कारोबार आसान बनाना:
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जमीन अधिग्रहण, सड़क कनेक्टिविटी, बिजली आपूर्ति और कारोबारी नियमों को बेहद सरल बनाने को कहा गया है।
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इन नए सेक्टर्स में निवेश पर जोर:
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राज्यों को सलाह दी गई है कि वे निजी निवेशकों को रिन्यूएबल एनर्जी (अक्षय ऊर्जा), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) व डाटा सेंटर, टूरिज्म (पर्यटन), क्रिटिकल मिनरल्स और एग्री-वैल्यू चेन में निवेश के लिए आकर्षित करें।
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राजस्व जुटाने में राज्यों का प्रदर्शन (नीति आयोग की रिपोर्ट)
नीति आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, राजस्व (कमाई) जुटाने के मामले में सभी राज्यों का प्रदर्शन एक समान नहीं है:
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कमजोर प्रदर्शन वाले राज्य: बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश
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बेहतर प्रदर्शन वाले राज्य: ओडिशा, तेलंगाना, महाराष्ट्र, गोवा और छत्तीसगढ़।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि राज्यों को अपने कर्ज और सीमित संसाधनों को देखते हुए अपने पुराने वित्तीय मॉडल में बदलाव करना होगा, तभी 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाया जा सकेगा।
