Chandigarh drugs hotspot
चंडीगढ़, 12 सितंबर 2026
चंडीगढ़ शहर को नशामुक्त बनाने की मुहिम तेज करते हुए प्रशासक गुलाबचंद कटारिया ने चंडीगढ़ पुलिस को नशे के कारोबार पर और सख्ती से कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं. पुलिस अधिकारियों के साथ शुक्रवार को हुई समीक्षा बैठक में प्रशासक गुलाबचंद कटारिया ने साफ कहा कि नशे की सप्लाई और बिक्री रोकना पुलिस की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए. बैठक में शहर के 58 संवेदनशील स्थानों को नशे के हॉटस्पॉट के रूप में चिन्हित किए जाने की जानकारी भी दी गई.
चंडीगढ़ पुलिस मुख्यालय में आयोजित बैठक में प्रशासक गुलाबचंद कटारिया के अलावा राज्यपाल के अतिरिक्त मुख्य सचिव विवेक प्रताप सिंह, गृह सचिव मंदीप सिंह बराड़, डीजीपी डॉ. सागर प्रीत हुड्डा और आईजीपी पुष्पेंद्र कुमार मौजूद रहे. इसके साथ ही सभी एसएसपी, एसपी, डीएसपी और थाना प्रभारियों ने भी बैठक में हिस्सा लिया. अधिकारियों ने नशे के खिलाफ अब तक की कार्रवाई और आगे की रणनीति पर चर्चा की.
बैठक में पुलिस अधिकारियों ने बताया कि शहर में नशे की बिक्री और इस्तेमाल से जुड़े 58 स्थानों को हॉटस्पॉट के रूप में चिन्हित किया गया है. इन इलाकों में लगातार निगरानी रखी जा रही है और संदिग्ध गतिविधियों पर पुलिस की नजर है. बैठक में यह भी बताया गया कि नशे की सप्लाई से जुड़े कुछ नए स्रोतों की पहचान की गई है. कई आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी है, जबकि कुछ आरोपी एनडीपीएस एक्ट के तहत न्यायिक हिरासत में हैं.
प्रशासक गुलाबचंद कटारिया ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि, “केवल नशा बेचने वाले पेडलर को पकड़ना पर्याप्त नहीं है. यह पता लगाना जरूरी है कि नशे की सप्लाई कहां से हो रही है और इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं. पूरे नेटवर्क की पहचान कर सप्लायर और अन्य आरोपियों तक पहुंचे. साथ ही पुलिस स्टेशनों के बीट सिस्टम को मजबूत करने और संवेदनशील इलाकों में पुलिस की मौजूदगी बढ़ाएं.”
कटारिया ने नशे के मामलों में पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारी भी तय करने के संकेत दिए. उन्होंने कहा कि, “यदि किसी इलाके में पुलिस की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जानी चाहिए. नशे के खिलाफ कार्रवाई में किसी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी संवेदनशील क्षेत्रों में पैदल गश्त बढ़ाएं और अचानक निरीक्षण करें.”
बैठक में डीजीपी डॉ. सागर प्रीत हुड्डा ने एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स को और मजबूत करने की जरूरत बताई. उन्होंने कहा कि, “नशे के बदलते नेटवर्क से निपटने के लिए टीम में अधिक पुलिसकर्मियों के साथ साइबर और कानूनी विशेषज्ञों को भी जोड़ा जाना चाहिए. अनुभवी अधिकारियों की मदद से नशा तस्करों के नेटवर्क और उनके संपर्कों तक पहुंचने की रणनीति तैयार की जा रही है.”
बैठक में मेडिकल स्टोरों की निगरानी बढ़ाने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया. प्रशासक ने निर्देश दिए कि नियंत्रित या नशे की आदत पैदा करने वाली दवाओं की बिक्री पर विशेष नजर रखी जाए. बिना उचित प्रिस्क्रिप्शन ऐसी दवाएं बेची जा रही हैं या नहीं, इसकी निगरानी के लिए संबंधित एजेंसियों को सतर्क रहने को कहा गया.
पुलिस आम लोगों से भी नशे के खिलाफ अभियान में सहयोग लेने की तैयारी कर रही है. डीजीपी ने बताया कि एनडीपीएस कानून के तहत गोपनीय और त्वरित सूचना प्रणाली विकसित की जा रही है. इसके जरिए लोग नशा बेचने वालों और संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी पुलिस तक पहुंचा सकेंगे. पुलिस का उद्देश्य लोगों को अपनी आंख और कान के रूप में जोड़कर जमीनी स्तर पर सूचना तंत्र को मजबूत करना है.
प्रशासक कटारिया ने कहा कि, “केवल गिरफ्तारियां और पुलिस कार्रवाई करके चंडीगढ़ को पूरी तरह नशामुक्त नहीं बनाया जा सकता. नशे के खिलाफ लड़ाई में लगातार निगरानी के साथ परिवार, समाज और संबंधित एजेंसियों का सहयोग भी जरूरी है. नशे की लत से जूझ रहे लोगों के पुनर्वास पर भी ध्यान देने और सभी एजेंसियों को मिलकर लगातार काम करने की जरूरत है.”
