बाबा बकाला साहिब (Patarkar Desk): केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान आज रक्षा बंधन के मौके पर भारतीय जनता पार्टी की तरफ से आयोजित कॉन्फ्रेंस में गरिमापूर्ण तरीके से पहुंचे। इस मौके पर बोलते हुए उन्होंने गुरुओं के महान इतिहास, बेमिसाल कुर्बानियों और मानवता के लिए दी गई शिक्षाओं को बड़ी श्रद्धा और सम्मान के साथ याद किया। चौहान ने कहा कि आज बाबा बकाला साहिब की इस पवित्र धरती पर आकर उनका जीवन धन्य हो गया है।
शिवराज सिंह चौहान ने ‘भारत के प्रतीक’, नौवें गुरु, श्री गुरु तेग बहादुर जी की तपस्थली पर जाकर अपनी श्रद्धा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह वह अद्भुत और ऐतिहासिक जगह है जहां नौवें गुरु ने 26 साल, 9 महीने और 13 दिन तक तपस्या की थी। इतिहास के सुनहरे पन्नों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि यह वही पवित्र धरती है जहां माखन शाह लुबाना ने सच्चे गुरु की पहचान की थी ।
अपने संबोधन के दौरान, केंद्रीय मंत्री ने पहले से लेकर दसवें गुरु तक के गुरुओं के महान योगदान का विस्तार से जिक्र किया। उन्होंने कहा कि गुरु नानक देव जी द्वारा दिया गया उपदेश उस महान भारतीय चेतना की पुनस्र्थापना थी जो बताती है कि सृष्टि अनेक हो सकती है, लेकिन उसका रचयिता एक है। श्री गुरु अंगद देव जी ने ज्ञान को जन-जन की भाषा बनाकर आम लोगों के लिए सुलभ बनाया। श्री गुरु रामदास जी ने भक्ति को शहरों और पवित्र तालाबों की पवित्रता प्रदान की। श्री गुरु अर्जन देव जी ने पवित्र गुरबाणी का संकलन कर उसे अमर वाणी दी और सत्य की रक्षा के लिए अपनी महान शहादत दी। श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी ने ‘मीरी और पीरी’ का संदेश देकर दुनिया को सिखाया कि संत की साधना में शक्ति होनी चाहिए और शक्ति के भीतर साधना होनी चाहिए। श्री गुरु हर राय जी ने शक्ति को दया के साथ जोड़ने का महान कार्य किया। श्री गुरु हरकिशन जी ने बचपन में निस्वार्थ सेवा का ऐसा उदाहरण पेश किया कि उनकी आयु कम होने पर भी उनके आदर्श बहुत ऊंचे थे। श्री गुरु तेग बहादुर जी ने त्याग को तपस्या और तपस्या को शक्ति बनाया और धर्म व संस्कृति की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। इसके साथ ही उन्होंने श्री गुरु गोबिंद सिंह जी और साहिबजादों की शहादत को भी याद किया।
