glasgow games 2026
ग्लास्गो, 3 अप्रैल 2026
ग्लास्गो में 11 दिनों तक चले कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की रविवार को समाप्ति हो गई. इन गेम्स में भारत के खिलाड़ियों ने कुल 39 मेडल के साथ ओवरऑल मेडल स्टैंडिंग में चौथा स्थान हासिल किया. बता दें, नई बॉक्सिंग चैंपियन बनी जैस्मिन लैम्बोरिया को क्लोजिंग सेरेमनी के लिए देश का फ्लैग-बेयरर बनाया गया.
जानकारी के मुताबिक अगले कॉमनवेल्थ गेम्स (2030) का शताब्दी संस्करण बनाया जाएगा, जिसकी मेजबानी भारत को सौंपी गई है. कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 गुजरात के अहमदाबाद में आयोजित की जाएगी. क्लोजिंग सेरेमनी के दौरान कॉमनवेल्थ गेम्स के आधिकारिक ध्वज और बैटन भारत को सौंपे गए हैं. इस दौरान भारत की तरफ से ओलंपिक गोल्ड मेडल विजेता नीरज चोपड़ा, भारतीय ओलंपिक संग की अध्यक्ष पीटी उषा और गुजरात के डिप्टी सीएम हर्ष सिंघवी मौजूद रहे.
भारत ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 122 खिलाड़ियों के ग्रुप से 13 गोल्ड, 17 सिल्वर और नौ ब्रॉन्ज मेडल जीते. यह चार साल पहले बर्मिंघम में मिली चौथी जगह की बराबरी है, जबकि इस बार उसने एक बहुत छोटे प्रोग्राम में हिस्सा लिया था, जिसमें कई ऐसे खेल शामिल नहीं थे जिनमें देश पारंपरिक रूप से मेडल जीतता है. भारत के मेडल की संख्या 2022 में बर्मिंघम में जीते गए 61 मेडल से कम थी, लेकिन हालात कुछ और ही कहानी बताते हैं. उनमें से तीस मेडल ऐसे खेलों में आए थे, जिन्हें ग्लासगो प्रोग्राम से हटा दिया गया था.
चार साल पहले 210 की तुलना में सिर्फ 122 एथलीट के साथ, भारत फिर भी अपना चौथा स्थान बनाए रखने में कामयाब रहा, जबकि मेडल कन्वर्जन रेट और भी बेहतर रहा, जिसमें 38 एथलीट मेडल के साथ घर लौटे. लंबी दूरी के रनर गुलवीर सिंह दो मेडल जीतने वाले अकेले भारतीय थे. ऑस्ट्रेलिया ने 70 गोल्ड मेडल समेत कुल 171 मेडल जीतकर गेम्स में अपना दबदबा बनाया, जबकि इंग्लैंड 110 मेडल के साथ दूसरे और कनाडा 62 मेडल के साथ तीसरे नंबर पर रहा. भारत 39 मेडल के साथ मेजबान स्कॉटलैंड के बराबर रहा, लेकिन ज्यादा गोल्ड मेडल जीतने की वजह से चौथे नंबर पर रहा.
2030 कॉमनवेल्थ गेम्स अहमदाबाद में होंगे, जिससे ऑस्ट्रेलिया के बाद भारत दूसरा ऐसा देश बन जाएगा जिसने एक से ज़्यादा बार इस मल्टी-स्पोर्ट इवेंट की मेजबानी की है. भारत ने इससे पहले 2010 में नई दिल्ली में ये गेम्स होस्ट किए थे. क्लोजिंग सेरेमनी स्कॉटलैंड की रिच कल्चरल हेरिटेज के सेलिब्रेशन के साथ शुरू हुई, जिसके बाद भारत की कल्चरल डायवर्सिटी और सदियों पुरानी परंपराओं का एक रंगीन शोकेस हुआ.
