west bengal
पश्चिम बंगाल, 30 जून 2026
पश्चिम बंगाल विधानसभा ने राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी के तहत समुदायों के आरक्षण से जुड़े तृणमूल कांग्रेस सरकार के 2012 के अधिनियम में संशोधन करने वाले दो विधेयक सोमवार को पारित कर दिए। पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग (अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अलावा) (सेवाओं और पदों में रिक्तियों का आरक्षण) (संशोधन) विधेयक, 2026 और पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग आयोग (संशोधन) विधेयक, 2026 के तहत कलकत्ता उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप आरक्षण ढांचे को 17 फीसदी से घटाकर सात प्रतिशत करते हुए 66 समुदायों को ओबीसी श्रेणी के तहत आरक्षण प्रदान किया गया है। ये विधेयक विपक्ष के नेता ऋताब्रता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस के कुछ बागी विधायकों के सदन से वॉक आउट करने के बीच पारित किए गए। कुल 186 विधायकों ने दोनों विधेयक के पक्ष में मतदान किया, जबकि 17 ने इनके विरोध में वोट दिया।
विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस ने इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) के विधायक नौशाद सिद्दीकी के अनुरोध पर मत विभाजन का आदेश दिया। सिद्दीकी और तृणमूल कांग्रेस के बागी विधायक बिश्वनाथ दास ने पिछड़े वर्गों के लिए सामाजिक न्याय के उल्लंघन का हवाला देते हुए दोनों विधेयक का विरोध किया और उन्हें प्रवर समिति के पास भेजने का आग्रह किया। पश्चिम बंगाल के पिछड़ा वर्ग विकास मंत्री गौरीशंकर घोष ने दोनों विधेयक को पेश करते हुए कहा कि सरकार उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार काम कर रही है और संशोधनों के पीछे कोई राजनीतिक मकसद नहीं है। घोष ने सदन से कहा कि हमने बिना किसी क्षेत्रीय सर्वेक्षण के पहले शामिल किए गए 113 समुदायों को हटा दिया है, जबकि 66 उप-समुदायों को बरकरार रखा है, जिन्हें विभिन्न सर्वेक्षणों के बाद शामिल किया गया था। उन्होंने कहा कि पिछड़ा वर्ग आयोग जांच करेगा और अगर उसे लगता है कि किसी समुदाय को शामिल किया जाना चाहिए, तो वह राज्य सरकार के विचारार्थ सिफारिशें दे सकता है। पिछली सरकार ने आयोग को दरकिनार कर दिया था, इसलिए उच्च न्यायालय ने इस प्रक्रिया को रद्द कर दिया।

