यमुनानगरः, 23/01/2026
जम्मू कश्मीर के डोडा में हुए सड़क हादसे में 10 जवानों की मौत हुई थी. इसमें 30 साल के सुधीर नरवाल जो यमुनानगर जिले के शेरपुर गांव का रहने वाला था उसकी भी मौत हो गई है. उसके मौत की खबर आते ही परिवार में सन्नाटा छा गया है. सुधीर नरवाल तीन भाई बहनों में सबसे छोटा और इकलौता भाई था. आगामी 27 जनवरी को उसे घर लौटना था. इससे पहले 22 जनवरी को उसके शहादत की जानकारी घर आ गई. घटना की जानकारी मिलते ही मां का रो-रो कर बुरा हाल है, वहीं पत्नी बेसुध हालत में है.
साल 2016 में ज्वाइन किया था आर्मीः साल 2016 में आर्मी ज्वाइन करने वाले सुधीर नरवाल शुरू से ही आर्मी में जाने की दिलचस्पी रखते थे. रोजाना अपने गांव से करीब 20 किलोमीटर जगाधरी के तेजली खेल परिसर में प्रैक्टिस करने के लिए जाते थे. लगन को देखकर न सिर्फ परिवार तारीफ करता था बल्कि पूरे गांव को उन पर नाज था. लेकिन इस सड़क हादसे से पूरे गांव का माहौल गमगीन हो गया है.
सुधीर की मां का रो-रोकर बुरा हाल है तो पत्नी बेसुध हालत में है. मां हर किसी को कह रही है कि अपने बेटे को कभी आर्मी में मत भेजना. हर किसी से गुहार लगा रही है कि सुधीर को मेरे पास लेकर आओ. 12वीं पास करने के बाद सुधीर सांगवान ने आर्मी ज्वाइन की थी और कॉलेज की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी थी. कुछ दिन बाद उनके पिता हरपाल का निधन हो गया था.
भाई बहनों में सबसे छोटा और इकलौता चिराग था. बहन कविता शादी के बाद न्यूजीलैंड चली गई है और दूसरी बहन कुलविंदर की भी शादी हो गई है. सुधीर नरवाल का 4 साल का लड़का आयांश है. पत्नी रूबी एक प्राइवेट नौकरी करती है. सुधीर की मौत के बाद घर में मातम पसरा हुआ है. हर कोई परिवार को दिलासा दे रहा है.
सुधीर नरवाल के रिश्ते के छोटे भाई सुमित ने बताया कि “15 जनवरी को ही मेरी उनसे बात हुई थी. वह बहुत ही होनहार और लगनशील था. वह 27 आर्म्ड में नायक के पद पर आर्मी में सेवाएं दे रहा था.” परिवार के ही दूसरे सदस्य सुरेश पाल ने बताया कि “सुधीर सांगवान तीन-चार महीने में घर आता था. वह पिछली बार दिवाली की छुट्टी मनाने के लिए घर आया था और 12 नवंबर की शादी अटेंड कर लौट गया था. अब उसे 27 जनवरी को घर आना था. परिवार के लोग बेहद खुश थे लेकिन उनकी मौत की खबर ने माहौल को पूरी तरह से सुनसान कर दिया है.
फिलहाल मौसम खराब होने की वजह से सुधीर की बॉडी को घर ले आने में दिक्कत आ रही है तो दूसरी तरफ उसकी बहन न्यूजीलैंड है. उसे पहुंचने में भी देर लगेगी. लेकिन सुधीर की मौत ने न सिर्फ इस परिवार को सदमा दिया बल्कि देश का एक लाल कम हो गया है.
