न्यूज डेस्क, 22/02/2026
आजकल बहुत से लोग शरीर के दर्द और मांसपेशियों में ऐंठन से राहत पाने के लिए कपिंग थेरेपी करवाते हैं. यह कोई मॉडर्न इलाज नहीं है, बल्कि एक पुरानी प्रैक्टिस है जिसका इस्तेमाल पुराने मिस्र और चीन में हजारों सालों से किया जा रहा है. इसका इस्तेमाल आम तौर पर ज्यादा मेहनत करने या ज्यादा देर तक बैठने से होने वाले पीठ और गर्दन के दर्द के इलाज के लिए किया जाता है. इस इलाज का आधार स्किन पर खास कप लगाना है, जिससे एक तरह का प्रेशर (सक्शन) बनता है.
इससे मसल्स का टेंशन कम करने और ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाने में मदद मिलती है. आजकल बहुत से लोग दर्द और थकान दूर करने के लिए इस तरीके का इस्तेमाल करते हैं. हालांकि, यह समझना जरूरी है कि यह तरीका किसके लिए फायदेमंद है और किसके लिए नुकसानदायक. महाराष्ट्र के मालेगांव से संबंध रखने वाले कपिंग स्पेशलिस्ट डॉक्टर आबिद का क्या है कहना जानिए…
कप थेरेपी क्या है ?
कपिंग थेरेपी अल्टरनेटिव मेडिसिन का एक पुराना तरीका है जिसमें थेरेपिस्ट कुछ मिनट के लिए आपकी स्किन पर खास कप लगाकर सक्शन बनाता है. लोग इसे कई वजहों से करवाते हैं, जैसे दर्द और सूजन से राहत पाने के लिए, आराम और डीप-टिशू मसाज के तौर पर. यह इलाज का एक और तरीका है. इस तरीके में, स्किन पर कांच, बांस या सिलिकॉन के कप रखे जाते हैं, जिससे अंदर की हवा निकलती है और वैक्यूम बनता है. यह प्रेशर स्किन को थोड़ा ऊपर की ओर खींचता है, जिससे मसल्स में खून का बहाव बढ़ता है और शरीर का दर्द कम होता है. कपिंग मुख्य रूप से दो तरह की होती है.
पहला तरीका है ड्राई कपिंग– इस तरीके में, कप के अंदर गर्मी या एक छोटे पंप का इस्तेमाल करके प्रेशर बनाया जाता है.
दूसरा तरीका है वेट कपिंग– इस तरीके में, कप लगाने से पहले स्किन पर बहुत छोटे चीरे लगाए जाते हैं. जब प्रेशर डाला जाता है, तो उस जगह से थोड़ा खून निकलता है. माना जाता है कि इससे खून से टॉक्सिन निकालने में मदद मिलती है.आजकल, ज्यादातर क्लीनिक में “ड्राई कपिंग” सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है. स्टडीज से पता चलता है कि कपिंग थेरेपी के शरीर के लिए कई फायदे हैं. 2018 की एक स्टडी के मुताबिक, यह शरीर के खास हिस्सों में दर्द और पूरे शरीर में फैलने वाले दर्द को कम करने में मदद करती है.
किन लोगों के लिए कपपिंग थेरेपी फायदेमंद है?
कपिंग थेरेपी उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो कंप्यूटर पर लंबे समय तक काम करते हैं. यह लंबे समय तक काम करने से होने वाले गर्दन के दर्द, पीठ के दर्द और कंधे के तनाव से आसानी से राहत देती है.
NIH स्टडीज से पता चलता है कि जिस जगह कप लगाया जाता है, वहां ब्लड फ्लो बढ़ने से टिशूज तेजी से ठीक होते हैं. इससे सूजन कम करने में भी मदद मिलती है.
यह ट्रीटमेंट उन लोगों के लिए एक अच्छा ऑप्शन है जिन्हें बार-बार सिरदर्द होता है, (खासकर माइग्रेन से पीड़ित लोगों के लिए)
एथलीट्स के लिए यह फायदेमंद है, क्योंकि इंटेंस ट्रेनिंग के बाद मसल्स की थकान दूर करने में यह थेरेपी मदद करता है.
यह थेरेपी उन लोगों के लिए भी फायदेमंद है जिन्हें सांस की दिक्कतें हैं, जैसे एलर्जी, अस्थमा, या सर्दी-जुकाम.
लंबी बीमारियां: आर्थराइटिस, फाइब्रोमायल्जिया, और माइग्रेन वाले लोगों के लिए फायदेमंद है.
किसे इससे बचना चाहिए?
ब्लीडिंग डिसऑर्डर वाले लोगों को इससे बचना चाहिए
खून पतला करने वाली दवाएं लेने वाले लोग यह थेरेपी नहीं करवाना चाहिए
अगर स्किन बहुत नाजुक है या घाव हैं तो इसका इस्तेमाल न करें.
प्रेग्नेंट महिलाओं को अपने डॉक्टर से पूछे बिना इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए
जर्नल ऑफ ट्रेडिशनल एंड कॉम्प्लिमेंट्री मेडिसिन में 2015 में छपी एक रिपोर्ट में बताया गया है कि यह मुंहासों, हर्पीज जोस्टर और दर्द मैनेजमेंट में मदद कर सकती है. लेकिन रिसर्चर्स ने कहा कि उन्होंने जिन स्टडीज को रिव्यू किया, उनमें से कई एकतरफा हो सकती हैं और बेहतर स्टडीज की जरूरत है.
