सोनीपत, 24/02/2026
इंग्लिश में एक कहावत है कि “एज इज़ जस्ट ए नंबर” यानि कि उम्र एक संख्या मात्र है और इंसान अगर कुछ करने की ठान लें तो किसी भी उम्र में अपने सपने को हकीकत में तब्दील कर सकता है. ऐसा ही कुछ कर दिखाया है हरियाणा के सोनीपत के रहने वाले 51 वर्षीय संजय उर्फ काला पहलवान ने जो कि इन दिनों सिक्स पैक वाले ताऊ के नाम से सुर्खियां बटोर रहे हैं.
सिक्स पैक वाले ताऊ
सोनीपत के जठेड़ी गांव के 51 वर्षीय संजय उर्फ काला पहलवान रोजाना 25 किलोमीटर की दौड़ लगाने के साथ-साथ 800 सपाटे भी लगाते हैं. साथ ही वे भरे हुए एलपीजी सिलेंडर और पुराने पत्थर की ओखली उठाकर और पानी से भरी बाल्टियों को भारी-भरकम मूसल में टांगकर भी एक्सरसाइज करते हैं. उन्होंने इस उम्र में भी सिक्स पैक बना रखा है. संजय अपनी फिटनेस को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके हैं.
घी नहीं तो सरसों का तेल सही
संजय को बचपन से ही पहलवान बनने का शौक था. एक साल तक उन्होंने पहलवानी भी की, लेकिन घर की आर्थिक स्थिति ठीक ना होने के कारण उन्हें अखाड़े को अलविदा कहना पड़ा. लेकिन अखाड़ा छोड़ने के बाद भी उन्होंने अपनी प्रैक्टिस लगातार जारी रखी. पहलवान जहां देसी घी पीते थे तो संजय अपने घर की आर्थिक स्थिति खराब होने के चलते सरसों का तेल पीकर काम चलाया और आज 51 वर्ष की उम्र में भी युवाओं के लिए एक मिसाल बन चुके हैं.
बेटा पहलवानी करता है
उन्होंने अपने घर के बारे में बताते हुए कहा कि साल 2006 में उनकी शादी हुई थी और आज उनकी दो बेटियां और एक बेटा है. बेटियां पढ़ाई कर रही हैं, जबकि बेटा पहलवानी कर रहा है. उनके पिता का साल 2010 में ही निधन हो चुका है और मां उनके साथ रहती हैं.
मुनक्का, बादाम और मौसमी का जूस पीते हैं
संजय ने बताया कि ” जो इंसान मेहनत नहीं करता, उसे हॉस्पिटल का सहारा लेना पड़ता है. इसलिए सभी को अपना शरीर स्वस्थ रखने के लिए मेहनत करने के साथ-साथ अपनी दिनचर्या भी ठीक करनी चाहिए. वे अपने घर की देसी जिम में एक्सरसाइज़ करने के साथ-साथ रोज़ मुनक्का, बादाम और मौसमी का जूस पीते हैं. साथ ही बादाम खाते हैं.”
ताऊ ने बताया अपना डेली रूटीन
उन्होंने अपना रूटीन बताते हुए कहा कि ” वे रोज तड़के 3 बजे उठ जाते हैं. उठते ही सबसे पहले रात में भिगोए गए 20 से 25 मुनक्कों का रस पीते हैं. इसके बाद वे सुबह की सैर पर निकल जाते हैं. सैर से लौटने के बाद वे स्टेडियम जाते हैं जहां पर वे 20 से 25 किलोमीटर की दौड़ लगाते हैं. दौड़ हो जाने के बाद वे मौसमी का जूस पीते हैं जिसे पीकर वे एनर्जेटिक महसूस करते हैं. वे कहते हैं कि दूध से कहीं ज्यादा जरूरी जूस है. इसके बाद स्टेडियम के ट्रैक पर ईंटें रखकर वे 800 सपाटे मारते हैं. इसके बाद घर पर भिगोए गए 65-70 बादाम का जूस वे पीते हैं. दूध कभी-कभार वे पीते हैं. साथ ही रोटी-दाल-सब्जी खाते हैं. जब बीमारी के बारे में उनसे पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इसकी नौबत नहीं आई और उन्हें अपना ब्लड ग्रुप तक नहीं पता है.
नशे से दूर रहने की सलाह
संजय ने बताया कि “दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में वे 42 किलोमीटर की दौड़ 4 घंटे में पूरी कर चुके हैं जिसके लिए उन्हें मेडल भी मिला है. उनका सपना है कि वे 100 किलोमीटर की दौड़ में शामिल हो और जल्द ही इस सपने को भी पूरा करेंगे जिसके लिए वे जी-तोड़ मेहनत कर रहे हैं. उन्होंने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि वे नशे से दूर रहें और हेल्दी रहें.”
