नई दिल्ली, 18/12/2025
गृह मंत्रालय ने हाल ही में मणिपुर के बिष्णुपुर में हुई हिंसा को लेकर राज्य के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला से रिपोर्ट मांगी है. बिष्णुपुर जिले के तोरबंग और फौगाकचाओ इखाई (Phougakchao Ikhai) इलाके में 16 दिसंबर मंगलवार शाम को अज्ञात हथियारबंद हमलावरों ने अपने घरों में लौटे नागरिकों पर गोलियां चलाईं, जो दो वर्षों तक राहत शिविर में रहने के बाद वापस आए थे. जबकि फरवरी में राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद से हिंसा में कमी आई थी.
पत्रकार पोस्ट से बात करते हुए प्रसिद्ध सुरक्षा विशेषज्ञ और सिक्किम के पूर्व पुलिस महानिदेशक (Ex-DGP) अविनाश मोहनानी ने कहा, “हां, गृह मंत्रालय निश्चित रूप से मणिपुर के राज्यपाल से घटना पर रिपोर्ट मांग सकता है क्योंकि राज्यपाल अभी राज्य के संरक्षक हैं.”
इस मुद्दे पर औपचारिक शिकायत दर्ज कराने के लिए, इनर मणिपुर लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस सांसद बिमोल अकोइजाम (Bimol Akoijam) वर्तमान संसद सत्र में यह मुद्दा उठाने के अलावा नई दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह से भी मिलेंगे. अकोइजाम ने कहा, “मैं मणिपुर में हुई हिंसा की घटना को संसद में उठाऊंगा. विस्थापित लोगों पर हमला दिखाता है कि हथियारबंद समूहों को रोकने में नाकामी मिली है.”
उन्होंने कहा कि हाल ही में अपने घरों में लौटे विस्थापित लोगों पर फिर से एक साथ हमला किया गया, जो बहुत परेशान करने वाली बात है. अकोइजाम ने कहा, “यह बताता है कि हथियारबंद तत्वों को निहत्था करने का काम ठीक से नहीं किया गया है, और सरकार को उचित कार्रवाई करनी चाहिए.”
इस बीच, मणिपुर पुलिस ने मंगलवार रात तोरबंग में कुकी सशस्त्र समूहों द्वारा की गई अंधाधुंध फायरिंग के सिलसिले में FIR दर्ज की है. मणिपुर पुलिस ने कहा, “इलाके में और उसके आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है, और संयुक्त सुरक्षा बल लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए गहन तलाशी अभियान और इलाके पर नियंत्रण कर रहे हैं. संबंधित DIG और अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने घटना वाली जगह का दौरा किया और मौजूदा स्थिति का जायजा लिया.”
पुलिस के मुताबिक, इलाके में बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान के दौरान एक लंबी दूरी की इम्प्रोवाइज्ड पंपी (हाथ से बने मोर्टार/बम), चार मध्यम दूरी की इम्प्रोवाइज्ड पंपी, एक मध्यम दूरी की बैरल-ब्लास्टेड इम्प्रोवाइज्ड पंपी, लगभग 3 किलोग्राम का एक IED, एक सिंगल बैरल हथियार और अलग-अलग कैलिबर के 17 खाली खोखे भी बरामद किए गए.
बिष्णुपुर जिले के तोरबंग और फौगाकचाओ इखाई में कम से कम 97 परिवारों के 389 सदस्यों को उनके घर लौटा दिया गया, जिनमें 187 पुरुष और 202 महिलाएं शामिल हैं. यह इलाका मैतेई-बहुल क्षेत्र है जो कुकी-जो बहुल चुराचांदपुर जिले की सीमा से लगता है.
फौगाकचाओ इखाई 3 मई, 2023 को भड़की जातीय हिंसा के दौरान हिंसा के मुख्य केंद्रों में से एक था. उस हिंसा में 260 से ज्यादा लोगों की जान चली गई थी और पूरे राज्य में अनुमानित 62,000 लोग विस्थापित हुए थे.
सरकार के भरोसे के बावजूद, मैतेई और कुकी-जो दोनों समुदायों के अधिकांश विस्थापित परिवार मणिपुर में बने राहत शिविरों में रह रहे हैं. राज्य प्रशासन ने तीन-चरणों वाली पुनर्वास योजना की घोषणा की है, जिसका लक्ष्य इस साल दिसंबर तक इस प्रक्रिया को पूरा करना है.
COCOMI ने की कार्रवाई की मांग
कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑन मणिपुर इंटीग्रिटी (COCOMI) ने गुरुवार को मणिपुर के DGP राजीव सिंह को लिखे एक पत्र में, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की. COCOMI के संयोजक खुराईजम अथौबा ने कहा, “यह हमला इस क्षेत्र में लगातार हो रही सशस्त्र हिंसा का हिस्सा था, जो लगातार सुरक्षा में नाकामियों और बिना किसी डर के संचालित होने वाले सशस्त्र समूहों को खत्म करने में असमर्थता को दिखाता है. हमले के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करें, उन्हें गिरफ्तार करें और उन पर मुकदमा चलाएं.”
कुकी-जो काउंसिल की प्रतिक्रिया
कुकी-जो काउंसिल ने “तोरबंग बफर जोन” में हुई घटना पर गहरी चिंता जताई है. कुकी-जो काउंसिल के सूचना और प्रचार सचिव गिन्जा वुअलजोंग (Ginza Vualzong) ने कहा, “यह याद रखना चाहिए कि 3 मई, 2023 की हिंसा तोरबंग, चुराचांदपुर में शुरू हुई थी – यह एक बहुत ही संवेदनशील इलाका है जहां कभी कुकी-जो और मैतेई दोनों समुदाय रहते थे. तोरबंग इलाके में ही इस संघर्ष की पहली हत्या भी हुई थी, जब पादरी सेखोहओ किपगेन को दिन दहाड़े बेरहमी से पीट-पीटकर मार डाला गया था.”
बिष्णुपुर के डिप्टी कमिश्नर को जिम्मेदारी लेनी चाहिए
उन्होंने कहा कि बिष्णुपुर के डिप्टी कमिश्नर का तोरबंग बफर जोन में मैतेई समुदाय के विस्थापित लोगों के पुनर्वास को हरी झंडी दिखाने का फैसला बहुत ही गैर-जिम्मेदाराना और भड़काऊ है. गिंजा ने कहा, “बिष्णुपुर के डिप्टी कमिश्नर को जिम्मेदारी लेनी चाहिए और इस संवेदनशील इलाके में पुनर्वास को वापस लेना चाहिए ताकि आगे तनाव न बढ़े.”
गृह मंत्रालय और कुकी समूहों के बीच हुई थी बैठक
हाल ही में नई दिल्ली में गृह मंत्रालय और कुकी-जो समूहों के प्रतिनिधियों के बीच सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस (SoO) फ्रेमवर्क के तहत दूसरे दौर की बातचीत हुई थी. इसमें मणिपुर सरकार के अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया और SoO समूहों द्वारा उठाई गई मांगों पर चर्चा की गई. SoO के एक प्रवक्ता ने कहा, “चर्चा कुकी-जो समुदाय के लोगों के लिए विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेश की मांग पर केंद्रित थी.”
कुकी-जो समूहों में कुकी नेशनल ऑर्गनाइजेशन (KNO) और यूनाइटेड पीपल्स फ्रंट (UPF) शामिल हैं.
