चंडीगढ़, 11/02/2026
ग्राम न्यायालय के लिए केंद्र की ओर से किए जा रहे दबाव के खिलाफ स्पष्ट लकीर खींचते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने इसे गैर-व्यवहारिक और कानूनी समुदाय के हितों के विपरीत बताया तथा कहा कि सरकार राज्य में इस मुद्दे पर निर्णायक कदम उठाने के लिए तैयार है। मुख्यमंत्री ने इस मामले की गहन जांच के लिए कानूनी विशेषज्ञों की कमेटी गठित करने का ऐलान करते हुए कहा कि वे इसे केंद्र सरकार के समक्ष उचित स्तर पर उठाएंगे।
इस मुद्दे को संस्थागत अखंडता और लोगों के विश्वास से संबंधित बताते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि न्यायपालिका में कानून का राज और नैतिक मानदंड सर्वोच्च रहने चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार वकीलों के हितों की रक्षा के लिए कोई कसर ताकत नहीं छोड़ेगी।
म्यूनिसिपल भवन में 65 बार एसोसिएशनों के प्रतिनिधियों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पूरे राज्य के लोगों की 20 किलोमीटर के दायरे में अदालतों तक पहुंच है, जिस कारण यह संकल्प पंजाब में व्यावहारिक रूप से लागू नहीं हो सकता। वकील पहले ही केंद्र के इस कदम के खिलाफ डटे हुए हैं क्योंकि इससे राज्य सरकारों को कानूनी तौर पर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। पंजाब में इस संकल्प को बंद करने के सभी तरीके खोजे जाएंगे।”
मुख्यमंत्री ने ऐलान किया, “पंजाब सरकार इस संबंध में सभी पहलुओं की पड़ताल करने के लिए कानूनी विशेषज्ञों की एक कमेटी का गठन करेगी। मैं इस मुद्दे को केंद्र सरकार के समक्ष उचित मंचों पर भी उठाऊंगा।”
अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि राज्य सरकार वकील समुदाय के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और इस नेक कार्य के लिए कोई कसर ताकत नहीं छोड़ी जाएगी। बार एसोसिएशनों के योगदान को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “बार एसोसिएशनों ने देश में कानूनी प्रणाली के विकास में प्रभावशाली ढंग से योगदान देने के लिए हमेशा महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और समाज की बेहतरी के लिए बड़े पैमाने पर काम किया है। भारत एक संप्रभु समाजवादी गणराज्य है, जिसमें संसदीय प्रणाली है और इसे यह गौरव प्राप्त है कि वह विश्व में सबसे बड़ी लोकतांत्रिक प्रणाली है। न्याय, आजादी, समानता और भाईचारा चार विशेषताएं हमारे संविधान द्वारा हर नागरिक के लिए सुरक्षित हैं।
कानूनी प्रणाली की महत्ता पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि, “कानून का राज वह नींव है, जिस पर आधुनिक लोकतांत्रिक समाज की स्थापना की जाती है। न्यायपालिका में मूल्यों, अखंडता और उत्कृष्टता के लिए प्रतिबद्ध कानूनी प्रणाली एक जीवंत और न्यायपूर्ण समाज का महत्वपूर्ण अंग है। मैं मौलिक अधिकारों को समझता हूं और वकीलों को अपने करियर में सफल होने के लिए आने वाली मुश्किलों से भी जानकार हूं।”
सार्वजनिक जीवन और कानूनी पेशे की तुलना करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “राजनीतिक नेताओं और वकीलों को एक जैसे जनता का विश्वास प्राप्त होता है और दोनों को इस विश्वास को हर तरीके से बनाए रखने के लिए काम करना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि, “इंसाफ आज-कल दूसरी चीजों की तरह महंगा है।” इसलिए उन्होंने यह विचार पेश किया कि वकीलों को समाज के हाशिए पर धकेल दिए गए वर्गों को मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करने के लिए एनजीओज की स्थापना करनी चाहिए।
नैतिकता की जरूरत पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि केस हार सकते हैं या जीत सकते हैं लेकिन कानून का राज हमेशा कायम रहना चाहिए। उन्होंने आगे कहा, “वकील सुरक्षा एक्ट और चैंबरों के कमर्शियल बिजली कनेक्शनों को घरेलू कनेक्शनों में तब्दील करने सहित वकीलों की हर मांग जायज है और इसकी समीक्षा की जाएगी। मैं खुद लोगों का वकील हूं और समाज के हर वर्ग की भलाई के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हूं।”
मीटिंग के स्थान का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “इस म्यूनिसिपल भवन को ‘नियुक्ति भवन’ के रूप में जाना जाता है, क्योंकि यहां कुल 63,000 नौकरियों में से लगभग 50,000 नियुक्ति पत्र सौंपे गए हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “पंजाब सरकार ने आम आदमी को लाभ पहुंचाने के लिए पहले ही बहुत सारे लोक पक्षी और नागरिक केंद्रित फैसले लिए हैं और कई और फैसले लिए जा रहे हैं। लोकतंत्र में लोग सर्वोच्च होते हैं। अपनी सत्ता के दौरान महलों में रहने वालों ने अपने घरों के दरवाजे लोगों के लिए बंद कर दिए थे लेकिन जब लोगों को मौका मिला तो उन महलों वालों के घरों के दरवाजे बाहर से बंद कर दिए।”
इससे पहले एडवोकेट जनरल पंजाब मनिंदरजीत सिंह बेदी ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया और समागम की महत्ता के बारे में प्रकाश डाला।
