चंडीगढ़, 17/03/2025
पिछले दो वर्षों से छात्र, शिक्षक और नागरिक समाज के सदस्य पंजाब विश्वविद्यालय (PU) प्रशासन से भर्ती और प्रवेश में ओबीसी/बीसी आरक्षण लागू करने की मांग कर रहे हैं, ताकि संवैधानिक समानता सुनिश्चित की जा सके। बार-बार अपील करने के बावजूद, प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया, जिससे नाराजगी और असंतोष बढ़ता जा रहा है।
इस उपेक्षा के विरोध में प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर श्रृंखलाबद्ध अनशन शुरू कर दिया है। यह कदम अशोक कुमार समिति की सिफारिशों की अनदेखी के कारण उठाया गया है। समिति ने स्पष्ट किया था कि 2023 और 2024 की भर्ती और प्रवेश संबंधी विज्ञापन केवल ओबीसी आरक्षण नीति को अंतिम रूप देने के बाद ही जारी किए जाने चाहिए। लेकिन प्रशासन ने 2023 के विज्ञापन जारी कर दिए, जबकि ओबीसी आरक्षण पर कोई निर्णय नहीं लिया, जिससे विरोध और तेज हो गया।
अनशन के पहले दिन, चंडीगढ़ के सामाजिक कार्यकर्ता श्री लिखमा राम बुधानिया ने अनशन शुरू किया और तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। मीडिया को संबोधित करते हुए उन्होंने भारत के उपराष्ट्रपति और पंजाब विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री जगदीप धनखड़ से तुरंत कार्रवाई करने की अपील की। उन्होंने सवाल उठाया कि ओबीसी समुदाय के अधिकारों को इतने लंबे समय तक नजरअंदाज कैसे किया जा सकता है और राजस्थान से ओबीसी नेता रहे श्री धनखड़ से इस दो दशक पुराने अन्याय को समाप्त करने का आग्रह किया।
ओबीसी फेडरेशन, चंडीगढ़ के अध्यक्ष डॉ. बलविंदर सिंह मुल्तानी ने भी प्रशासन के रवैये की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि शून्य प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के साथ किसी भी संस्थान को संचालित करना संवैधानिक अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है। उन्होंने प्रशासन से ईमानदारी और जवाबदेही के साथ इस मुद्दे को हल करने की मांग की।
इस आंदोलन को और अधिक समर्थन मिल रहा है। एसएफएस, एएसएफ, एनएसयूआई, एएसएफ पंजाबनामा और एएसए सहित कई छात्र संगठनों ने अनशन में शामिल होकर प्रदर्शनकारियों के साथ एकजुटता दिखाई और न्याय की मांग को और मजबूती दी।
प्रदर्शनकारियों ने साफ कर दिया है कि जब तक पंजाब विश्वविद्यालय प्रशासन भर्ती और प्रवेश में ओबीसी आरक्षण को लागू करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाता, उनका विरोध जारी रहेगा।