नई दिल्ली, 17/12/2025
केंद्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) का नाम बदलकर ‘विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन गारंटी (ग्रामीण) बिल’ किए जाने के फैसले पर सियासत तेज हो गई है. बुधवार को ‘ऑल इंडिया अनऑर्गेनाइज्ड वर्कर्स कांग्रेस’ के बैनर तले विरोध प्रदर्शन करते हुए कांग्रेस नेता उदित राज ने इस नए बिल की प्रति जलाकर अपना विरोध दर्ज कराया.
केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए उदित राज ने कहा कि मनरेगा ग्रामीण बेरोजगारी को मिटाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक योजना रही है, उसे अब खत्म करने की साजिश रची जा रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि योजना से महात्मा गांधी का नाम हटाना न केवल उनकी विरासत पर हमला है, बल्कि यह ग्रामीण मजदूरों के ‘रोजगार के कानूनी अधिकार’ को भी छीनने की कोशिश है.
इससे पहले, कर्नाटक के मंत्री दिनेश गुंडू राव ने मनरेगा का नाम बदलने को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की. उन्होंने कहा कि यह कदम महात्मा गांधी के प्रति भाजपा और आरएसएस के वैचारिक विरोध को दर्शाता है. बेलगावी में इस फैसले के खिलाफ आयोजित एक विरोध प्रदर्शन के दौरान राव ने कहा, “यह एक सर्वविदित तथ्य है कि आरएसएस और भाजपा महात्मा गांधी को नापसंद करते हैं, जो उनके कार्यों में झलकता है.”
कर्नाटक कांग्रेस के नेताओं ने बेलगावी के सुवर्ण सौध में गांधी प्रतिमा के पास केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया. यह विरोध प्रदर्शन नेशनल हेराल्ड मामले और मनरेगा (MGNREGA) का नाम बदलकर ‘VB-GRAM’ (वीबी-ग्राम) करने के फैसले के विरोध में किया गया. इस प्रदर्शन में कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार भी शामिल हुए.
विरोध प्रदर्शन के दौरान उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा कि नेशनल हेराल्ड भारत के स्वतंत्रता आंदोलन से गहराई से जुड़ा हुआ है. उन्होंने केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा, “नेशनल हेराल्ड देश का गौरव है, जिसकी स्थापना स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान जवाहरलाल नेहरू ने की थी.” शिवकुमार ने आरोप लगाया कि उन्हें अब तक एफआईआर (FIR) की कॉपी नहीं दी गई है और ऐसी कार्रवाइयों से प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छवि “धूमिल” हुई है.
बता दें कि कांग्रेस ने इस बिल का विरोध करते हुए 17 दिसंबर 2025 को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन की घोषणा की थी. पार्टी ने भाजपा और आरएसएस पर “अधिकार-आधारित कल्याणकारी व्यवस्था” को खत्म करने और इसके स्थान पर केंद्र द्वारा नियंत्रित खैरात वाली व्यवस्था लाने का आरोप लगाया. पार्टी ने अपनी सभी प्रदेश इकाइयों को जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन करने का निर्देश दिया था. इन प्रदर्शनों में महात्मा गांधी के चित्रों का उपयोग किया गया.
क्या है ‘VB-GRAM’
लोकसभा में कृषि मंत्री द्वारा पेश किए गए इस बिल में अकुशल शारीरिक श्रम (Unskilled manual work) करने के इच्छुक वयस्क सदस्यों वाले प्रत्येक ग्रामीण परिवार के लिए अब 100 दिन के बजाय 125 दिनों के रोजगार की गारंटी दी गई है.
बिल की धारा 22 के अनुसार, केंद्र और राज्य सरकारों के बीच फंड साझा करने का अनुपात 60:40 होगा. वहीं, पूर्वोत्तर राज्यों, हिमालयी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर) के लिए यह अनुपात 90:10 होगा.
बिल की धारा 6 राज्य सरकारों को एक वित्तीय वर्ष में कुल 60 दिनों की अवधि पहले से अधिसूचित (Notify) करने की अनुमति देती है, जिसमें बुवाई और कटाई जैसे व्यस्त कृषि सीजन शामिल होंगे. इस घोषित अवधि के दौरान, इस बिल के तहत कोई भी काम शुरू या निष्पादित नहीं किया जाएगा.
